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Italy: मेलोनी पर ट्रंप के तंज को लेकर इटली ने दिखाया अमेरिकी राष्ट्रपति को आईना, क्या बोले रक्षा मंत्री?
Tue, 07 Jul 2026 12:19 AM IST
Devesh Tripathi
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 07 Jul 2026 12:19 AM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच सार्वजनिक बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में है। नाटो शिखर सम्मेलन से पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर मेलोनी को लेकर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा किया, जिस पर इटली के वरिष्ठ नेताओं ने संयमित प्रतिक्रिया देते हुए दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों को अधिक महत्वपूर्ण बताया।
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इटली की पीएम मेलोनी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। तुर्किये में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन से ठीक पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर मेलोनी का मजाक उड़ाते हुए एक पोस्ट साझा किया। इसके जवाब में इटली ने कहा कि नेताओं के आने-जाने से देशों के रिश्ते नहीं बदलते।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर मेलोनी की एक संपादित तस्वीर साझा की। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा, "मुझसे दूरी बनाए रखने का आदेश (रिस्ट्रेनिंग ऑर्डर) चाहिए।" यह पोस्ट ऐसे समय आई है, जब दोनों नेताओं की इस सप्ताह नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात होने की संभावना है।
इटली के नेताओं ने ट्रंप की टिप्पणी पर दिया क्या जवाब?
ट्रंप की टिप्पणी पर इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेत्तो ने कहा कि इस पोस्ट पर उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं है। उन्होंने कहा, "सबसे अहम बात अमेरिका जैसे महत्वपूर्ण सहयोगी देश के साथ रिश्ते बनाए रखना है। लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन रिश्ते बने रहते हैं।"
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इटली के विदेश मंत्री अंतोनियो तायानी ने भी विवाद को ज्यादा तूल नहीं दिया। उन्होंने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि दोनों देशों के संबंध किसी एक व्यक्ति की टिप्पणी से कहीं बड़े हैं।" हालांकि, प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ट्रंप की ताजा टिप्पणी पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
जी-7 सम्मेलन के बाद शुरू हुई थी तल्खी
दोनों नेताओं के बीच तनाव की शुरुआत हाल ही में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद हुई थी। पिछले महीने ट्रंप ने दावा किया था कि सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनसे कई बार तस्वीर खिंचवाने का अनुरोध किया था और उन्होंने सिर्फ इसलिए इसकी अनुमति दी क्योंकि उन्हें "उन पर तरस आ गया था।"
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया था कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं करने के बाद मेलोनी घरेलू राजनीतिक कारणों से अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रही हैं।
ट्रंप के तस्वीर वाले बयान पर मेलोनी ने कैसे दिया था करारा जवाब?
मेलोनी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था, "ये लगातार और बिना किसी वजह के किए जा रहे हमले पूरी तरह निरर्थक हैं।" उन्होंने ट्रंप को जवाब देते हुए कहा था, "आपकी दोस्त होने से मेरी लोकप्रियता नहीं बढ़ी है। मेरा सुझाव है कि आप अपनी लोकप्रियता पर ध्यान दें।"
एक अन्य साक्षात्कार में मेलोनी ने कहा था, "इटली और मैं कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाते। मैं अमेरिका विरोधी नहीं हूं, लेकिन मजबूत रिश्ते स्पष्ट बातचीत पर भी टिके होते हैं और मैं साफ बात करने वाली व्यक्ति हूं।"
करीबी सहयोगी माने जाते थे दोनों नेता
ट्रंप और मेलोनी को लंबे समय तक समान विचारधारा वाला सहयोगी माना जाता रहा है। अवैध प्रवासन, रूढ़िवादी राजनीति और पश्चिमी देशों की सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर दोनों की सोच मिलती रही है। वर्ष 2025 में ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली मेलोनी एकमात्र यूरोपीय नेता थीं।
हालांकि, इस वर्ष दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ गई। ईरान के मुद्दे पर इटली के रुख और पश्चिम एशिया के हालात को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत टिप्पणियों का दौर भी शुरू हो गया। अब सभी की नजर तुर्किये में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन पर है, जहां ट्रंप और मेलोनी आमने-सामने आ सकते हैं। इस बैठक में रक्षा खर्च और सैन्य सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
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ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर मेलोनी की एक संपादित तस्वीर साझा की। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा, "मुझसे दूरी बनाए रखने का आदेश (रिस्ट्रेनिंग ऑर्डर) चाहिए।" यह पोस्ट ऐसे समय आई है, जब दोनों नेताओं की इस सप्ताह नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात होने की संभावना है।
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इटली के नेताओं ने ट्रंप की टिप्पणी पर दिया क्या जवाब?
ट्रंप की टिप्पणी पर इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेत्तो ने कहा कि इस पोस्ट पर उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं है। उन्होंने कहा, "सबसे अहम बात अमेरिका जैसे महत्वपूर्ण सहयोगी देश के साथ रिश्ते बनाए रखना है। लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन रिश्ते बने रहते हैं।"
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इटली के विदेश मंत्री अंतोनियो तायानी ने भी विवाद को ज्यादा तूल नहीं दिया। उन्होंने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि दोनों देशों के संबंध किसी एक व्यक्ति की टिप्पणी से कहीं बड़े हैं।" हालांकि, प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ट्रंप की ताजा टिप्पणी पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
जी-7 सम्मेलन के बाद शुरू हुई थी तल्खी
दोनों नेताओं के बीच तनाव की शुरुआत हाल ही में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद हुई थी। पिछले महीने ट्रंप ने दावा किया था कि सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनसे कई बार तस्वीर खिंचवाने का अनुरोध किया था और उन्होंने सिर्फ इसलिए इसकी अनुमति दी क्योंकि उन्हें "उन पर तरस आ गया था।"
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया था कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं करने के बाद मेलोनी घरेलू राजनीतिक कारणों से अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रही हैं।
ट्रंप के तस्वीर वाले बयान पर मेलोनी ने कैसे दिया था करारा जवाब?
मेलोनी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था, "ये लगातार और बिना किसी वजह के किए जा रहे हमले पूरी तरह निरर्थक हैं।" उन्होंने ट्रंप को जवाब देते हुए कहा था, "आपकी दोस्त होने से मेरी लोकप्रियता नहीं बढ़ी है। मेरा सुझाव है कि आप अपनी लोकप्रियता पर ध्यान दें।"
एक अन्य साक्षात्कार में मेलोनी ने कहा था, "इटली और मैं कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाते। मैं अमेरिका विरोधी नहीं हूं, लेकिन मजबूत रिश्ते स्पष्ट बातचीत पर भी टिके होते हैं और मैं साफ बात करने वाली व्यक्ति हूं।"
करीबी सहयोगी माने जाते थे दोनों नेता
ट्रंप और मेलोनी को लंबे समय तक समान विचारधारा वाला सहयोगी माना जाता रहा है। अवैध प्रवासन, रूढ़िवादी राजनीति और पश्चिमी देशों की सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर दोनों की सोच मिलती रही है। वर्ष 2025 में ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली मेलोनी एकमात्र यूरोपीय नेता थीं।
हालांकि, इस वर्ष दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ गई। ईरान के मुद्दे पर इटली के रुख और पश्चिम एशिया के हालात को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत टिप्पणियों का दौर भी शुरू हो गया। अब सभी की नजर तुर्किये में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन पर है, जहां ट्रंप और मेलोनी आमने-सामने आ सकते हैं। इस बैठक में रक्षा खर्च और सैन्य सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।