भारत में गुरुद्वारों पर हमलों का दावा: अमेरिकी आयोग के दो अधिकारियों ने उठाए सवाल; जवाबदेही तय करने की मांग
अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के दो अधिकारियों ने दावा किया है कि भारत में सिख गुरुद्वारों को निशाना बनाया गया और धार्मिक नेताओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई। उन्होंने अमेरिकी सरकार से भारत पर कार्रवाई का दबाव बनाने की मांग की है। चर्च और मस्जिदों का भी जिक्र हुआ है। आखिर अधिकारियों ने कौन-से आरोप लगाए? क्या अमेरिका भारत को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता पर शर्त लगाने की बात कर रहा है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) के आयुक्त डेविड एंडरसन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया कि पिछले कुछ सप्ताहों में भारत में सिख गुरुद्वारों को निशाना बनाकर हमले किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में धार्मिक नेताओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिशें भी शामिल हैं। एंडरसन ने इन हमलों को लेकर अमेरिकी सरकार से भारत के प्रति अपना रुख सख्त करने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को भारत को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता को इस बात से जोड़ना चाहिए कि भारत सरकार धार्मिक स्वतंत्रता में बाधा डालने वाली हिंसा पर क्या कार्रवाई करती है। यानी उनके मुताबिक, भारत की प्रतिक्रिया के आधार पर अमेरिकी सुरक्षा सहायता पर फैसला होना चाहिए।
डेविड एंडरसन ने भारत को लेकर क्या दावा किया?
एंडरसन ने कहा कि भारत में पिछले कई सप्ताहों से सिख गुरुद्वारों पर कथित तौर पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से धार्मिक नेताओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों का जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने अपने पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया कि ये घटनाएं किन राज्यों या शहरों में हुईं, कितने गुरुद्वारों को निशाना बनाया गया और हमलों के पीछे कौन लोग थे। उन्होंने अमेरिकी सरकार से कहा कि धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने वाले लोगों को हिंसा से बचाने के लिए भारत सरकार की कार्रवाई को सुरक्षा सहायता से जोड़ा जाए। उनका बयान भारत में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाता है।
जो ग्रोगन ने चर्च और मस्जिदों का भी क्यों किया जिक्र?
यूएससीआईआरएफ के दूसरे आयुक्त जो ग्रोगन ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत में चर्च, गुरुद्वारों और मस्जिदों सहित धार्मिक स्थलों पर हमले अंतरराष्ट्रीय कानून में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों को कमजोर करते हैं। ग्रोगन ने अमेरिकी सरकार से अपील की कि वह भारत सरकार पर ऐसे हमलों के दोषियों को जवाबदेह ठहराने और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा करने का दबाव जारी रखे। इस तरह दोनों अधिकारियों ने केवल सिख गुरुद्वारों का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि अलग-अलग धर्मों के पूजा स्थलों की सुरक्षा को भी अपनी चिंता में शामिल किया।
अमेरिकी आयोग ने भारत सरकार से क्या कार्रवाई करने को कहा?
दोनों अधिकारियों की मांग का मुख्य जोर कथित हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर है। एंडरसन ने सुरक्षा सहायता को भारत सरकार की प्रतिक्रिया से जोड़ने का सुझाव दिया, जबकि ग्रोगन ने दोषियों को जवाबदेह बनाने के लिए अमेरिकी दबाव जारी रखने की बात कही। उनके बयानों में धार्मिक स्वतंत्रता यानी अपनी आस्था के अनुसार पूजा करने और धार्मिक गतिविधियां चलाने के अधिकार को केंद्र में रखा गया है। हालांकि, इन अधिकारियों ने कथित हमलों की जांच, आरोपियों की पहचान या किसी खास घटना से जुड़े सबूतों का विवरण साझा नहीं किया।
यूएससीआईआरएफ क्या है और भारत इस पर क्या रुख रखता है?
- यूएससीआईआरएफ का पूरा नाम अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग है।
- इसकी स्थापना 1998 में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के बाद अमेरिकी सरकार ने की थी।
- आयोग धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों पर अमेरिकी सरकार को सुझाव देता है।
- आयोग की सिफारिशें अमेरिकी विदेश विभाग के लिए बाध्यकारी नहीं होती हैं।
- भारत इस आयोग को पक्षपाती और विश्वसनीयता से रहित संगठन बताता है।
इस मामले में भारत का रुख और अमेरिकी आयोग के अधिकारियों के आरोप अलग-अलग हैं। आयोग के दोनों आयुक्तों ने भारत में धार्मिक स्थलों पर कथित हमलों को लेकर चिंता जताई है, जबकि भारत इस संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाता रहा है। फिलहाल, अधिकारियों के बयानों में कथित घटनाओं का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए इन दावों और उनसे जुड़े तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है।