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फ्रांस: राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मेलेंशों ने किया छात्र आंदोलन का समर्थन; क्या युवा बदलेंगे चुनावी समीकरण?

Mon, 12 Oct 2026 02:13 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 12 Oct 2026 02:13 AM IST
सार

फ्रांस में स्कूलों की बदहाल व्यवस्था और असमानता के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज हो रहा है। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जीन-ल्यूक मेलेंशों ने छात्रों का समर्थन करते हुए 16 साल की उम्र से मतदान का अधिकार देने की मांग की है। क्या युवाओं का यह आंदोलन अगले राष्ट्रपति चुनाव के समीकरण बदल सकता है? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

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France's far-left presidential candidate cheers Gen Z school protests
जीन-ल्यूक मेलेंशों - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/जीन-ल्यूक मेलेंशों

विस्तार

फ्रांस में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जीन-ल्यूक मेलेंशों ने रविवार को हाईस्कूल के उन छात्रों का समर्थन किया, जिनके विरोध प्रदर्शन ने पूरे फ्रांस को हिलाकर रख दिया है। उन्होंने चुनावी रैली में 16 साल की उम्र से मतदान का अधिकार देने की मांग की। साथ ही, विश्वविद्यालयों में चुनिंदा छात्रों को दाखिला देने की व्यवस्था खत्म करने की बात कही।
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पूंजीवाद के मुखर विरोधी मेलेंशों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर भी निशाना साधा। उन्होंने हजारों समर्थकों के सामने लंबा भाषण दिया। इसका मकसद अगले साल अप्रैल और मई में होने वाले दो चरणों के राष्ट्रपति चुनाव से पहले अपने चुनाव अभियान को तेज करना था।
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रविवार को फ्रांस के समाजवादी और उनके सहयोगी दलों के मतदाताओं ने भी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का चुनाव किया। उन्होंने यूरोपीय संसद के सदस्य राफेल ग्लुक्समैन को अपना उम्मीदवार चुना। हालांकि, यह प्राथमिक चुनाव साइबर हमले और मुख्यधारा के वामपंथी दलों के बीच मतभेदों से प्रभावित रहा।
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राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपना दूसरा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। वह दोबारा चुनाव नहीं लड़ सकते। ऐसे में अगले साल का चुनाव फ्रांस और यूरोप के लिए एक अहम मोड़ साबित होगा। फ्रांस यूरोपीय संघ (ईयू) का एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न देश है। यह ईयू की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी है। फ्रांस उन देशों में शामिल है, जहां यूरो मुद्रा चलती है। इस साझा मुद्रा व्यवस्था में फ्रांस की अहम भूमिका है।

फिलहाल, चुनावी सर्वेक्षणों से पता चलता है कि मेलेंशों और मध्य-दक्षिणपंथी उम्मीदवार एडुआर्ड फिलिप, दक्षिणपंथी उम्मीदवार मरीन ले पेन से पीछे हैं। हालांकि, वे कई अन्य संभावित उम्मीदवारों से आगे हैं। यह देखना बाकी है कि क्या वे अपना मौजूदा जनसमर्थन बनाए रख पाते हैं।

क्यों सड़कों पर उतरे छात्र?
पूरे फ्रांस में हाईस्कूल के छात्रों का आंदोलन चल रहा है। छात्र स्कूलों की खराब होती इमारतों, शिक्षकों की कमी और उन असमानताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनसे पिछड़े इलाकों के स्कूल ज्यादा प्रभावित होते हैं। इस आंदोलन ने युवा मतदाताओं को सक्रिय किया है। चुनाव के नतीजों में उनकी भूमिका अहम हो सकती है। हालांकि, कुछ मौकों पर यह आंदोलन हिंसक भी हो गया है। पुलिस अब तक 6,600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। सैकड़ों लोग घायल हैं। इनमें छात्र, शिक्षक और पुलिसकर्मी भी हैं।

मेलेंशों के आलोचकों का कहना है कि वह और उनकी पार्टी 'फ्रांस अनबाउड' चुनावी फायदे के लिए इस आंदोलन को और भड़का रहे हैं। वहीं, मेलेंशों का कहना है कि उनकी पार्टी इस आंदोलन का आयोजन नहीं कर रही है। वह चाहती है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहें।

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दक्षिणी शहर क्लेरमों-फेरां में रविवार को हुई रैली में उनकी पार्टी ने छात्र प्रदर्शनकारियों को मंच पर बुलाया। मेलेंशों ने कहा कि छात्रों का यह आंदोलन उनकी 'राजनीतिक और ट्रेड यूनियन से जुड़ी परिपक्वता के ऊंचे स्तर' को दिखाता है।

कई प्रदर्शनकारी छात्र 18 साल से कम उम्र के हैं। 75 वर्षीय मेलेंशों चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने भविष्य के इन मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए मतदान की उम्र घटाकर 16 साल करने का प्रस्ताव दिया।


उन्होंने विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए इस्तेमाल होने वाले राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म (केंद्रीकृति ऑनलाइन व्यवस्था) की भी आलोचना की। इस प्लेटफॉर्म से छात्र प्रदर्शनकारी नाराज हैं। मेलेंशों ने कहा कि चुनिंदा छात्रों को दाखिला देने की व्यवस्था खत्म होनी चाहिए। ज्ञान को 'व्यापार का सामान' नहीं बनाया जाना चाहिए। छात्रों ने मंगलवार और अगले शनिवार को भी प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।

सरकार ने शिक्षकों की भर्ती का आदेश दिया
स्कूलों में जारी प्रदर्शनों के बाद सरकार ने तत्काल कदम उठाने के आदेश दिए हैं। इनमें अस्थायी शिक्षकों की जल्द भर्ती करना और स्कूलों के समय में बदलाव करना शामिल है। इन कदमों का मकसद छात्रों की शिकायतों को दूर करना है। हालांकि, स्कूलों के प्रवेश द्वारों पर अवरोध लगाकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि ये कदम पर्याप्त नहीं हैं। इसके बावजूद, इस आंदोलन ने युवाओं को अपनी ताकत का एहसास कराया है। मेलेंशों को उम्मीद है कि इसका असर चुनाव में दिखेगा। वह चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा युवा मतदान करने पहुंचें।
 
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