मध्य प्रदेश के खंडवा जिला मुख्यालय पर मंगलवार दोपहर ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएं अवैध शराब बिक्री के विरोध में पहुंचीं। महिलाओं ने कच्ची और पक्की शराब की बिक्री बंद कराने की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकाली और कार्यालय का घेराव कर जमकर नारेबाजी की।
महिलाओं का कहना था कि गांवों में खुलेआम बिक रही शराब के कारण उनके परिवारों का माहौल खराब हो रहा है। शराब पीने के बाद पुरुष घरों में झगड़ा करते हैं और महिलाओं व बच्चों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। महिलाओं ने आरोप लगाया कि पति और बच्चे घर से पैसे और सामान तक चुराकर शराब पीने में खर्च कर देते हैं।
महिलाओं का दावा है कि गांव के करीब 500 घरों में से लगभग 400 घरों के पुरुष शराब का सेवन करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लाडली बहना योजना के तहत मिलने वाली राशि भी कई बार पति झगड़ा कर महिलाओं से ले लेते हैं और उसे शराब पर खर्च कर देते हैं।
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ज्ञापन देने पहुंचीं धरमपुरी निवासी ममता केशनिया ने बताया कि गांव में नुक्कड़ से लेकर गली-मोहल्लों तक अवैध शराब बेची जा रही है। शराब के कारण पुरुष, युवा और बच्चे तक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब पीकर लोग गाली-गलौज करते हैं, घरों में विवाद करते हैं और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। उनका कहना है कि अवैध शराब की बिक्री पूरी तरह बंद होनी चाहिए।
धरमपुरी से आईं बिनु बाई प्रजापति ने कहा कि गांव की महिलाएं चाहती हैं कि शराब की बिक्री गांव से बाहर हो। अवैध शराब के कारण रोजाना घरों में विवाद हो रहे हैं और मोहल्लों का माहौल खराब हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब के सेवन से बच्चों पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
खंडवा सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने बताया कि ग्राम पंचायत घाटाखेड़ी, उदयपुर और धरमपुरी की महिलाएं अवैध शराब बिक्री की शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची थीं। महिलाओं को मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम बनाकर अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अवैध अहातों पर भी कार्रवाई कर महिलाओं की शिकायत का जल्द समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।