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VIDEO: लखनऊ में एक्सप्रेस-वे के चक्कर में दो सरकारी स्कूलों पर चला बुलडोजर, 11 साल बाद भी बच्चों को नहीं मिला स्कूल
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VIDEO: लखनऊ में एक्सप्रेस-वे के चक्कर में दो सरकारी स्कूलों पर चला बुलडोजर, 11 साल बाद भी बच्चों को नहीं मिला स्कूल
आगरा एक्सप्रेसवे ने दिल्ली का सफर भले ही आसान कर दिया हो, लेकिन इसकी जद में आए काकोरी ब्लॉक के माधवपुर के बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना आज भी मुश्किल है। वर्ष 2015 में एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान प्राथमिक विद्यालय माधवपुर और पूर्व माध्यमिक विद्यालय जलियामऊ को ढहा दिया गया था।
11 साल बीतने के बाद भी दोनों विद्यालयों के नए भवन नहीं बन सके हैं। दोनों स्कूलों को करीब आधा किलोमीटर दूर प्राथमिक विद्यालय जलियामऊ के परिसर में संचालित किया जा रहा है। यहां एक ही भवन में तीन विद्यालय चल रहे हैं। कमरों की कमी के चलते कई बार बच्चों को मैदान में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है।
मंगलवार को अमर उजाला ने मौके पर पहुंचकर स्थिति की पड़ताल की। विद्यालय में उपलब्ध पांच कक्षों में तीनों स्कूलों के बच्चों की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इससे शिक्षकों के सामने भी कक्षाएं संचालित करने की चुनौती बनी रहती है।
स्कूल में पर्याप्त जगह और सुविधाएं नहीं होने का असर विद्यार्थियों के नामांकन पर भी पड़ रहा है। बता दें कि अमर उजाला की पड़ताल में ये भी पता चला कि प्राथमिक विद्यालाय माधवपुर के एक बच्चे की मौत सर्विस लेन पार करने के दौरान हो गई थी। ऐसे में अधिकांश अभिभावकों ने प्राथमिक विद्यालय जलियामऊ में भेजने से इनकार कर दिया है।
स्थानीय लोगों और शिक्षकों के मुताबिक, जिस समय विद्यालयों को हटाया गया था, उस समय प्राथमिक विद्यालय माधवपुर में करीब 150 और पूर्व माध्यमिक विद्यालय जलियामऊ में भी करीब 150 विद्यार्थी पढ़ते थे। वर्तमान में दोनों विद्यालयों की छात्र संख्या घटकर करीब 65 रह गई है।
शिक्षकों का कहना है कि बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने और अन्य सुविधाओं के अभाव में अभिभावक बच्चों का नामांकन कराने से कतरा रहे हैं। क्षेत्र में करीब 10 निजी विद्यालयों को भी मान्यता मिली हुई है। ऐसे में जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक है, वे बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कई बच्चे दूर स्कूल होने के कारण पढ़ाई से भी दूर हो रहे हैं।
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