लंबी कतारों से अब निजात: क्यूआर कोड स्कैन करते ही बनेगी ओपीडी पर्ची, 100 शैय्या अस्पताल में आभा डिजिटल सेवा
अतरौलिया के 100 शैय्या अस्पताल में आभा डिजिटल सेवा शुरू की गई है। इसके तहत मरीज क्यूआर कोड स्कैन कर चंद सेकेंड में ओपीडी पर्ची बनवा सकेंगे और टोकन प्राप्त कर सकेंगे। इससे पर्ची बनवाने के लिए लंबी कतारों में लगने से निजात मिलेगी। डिजिटल व्यवस्था से मरीजों का समय बचेगा और अस्पताल में पंजीकरण प्रक्रिया भी आसान होगी।
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अमर शहीद राजा जयलाल सिंह 100 शैय्या संयुक्त जिला चिकित्सालय में ओपीडी पर्ची बनवाने के लिए मरीजों को अब घंटों कतार में खड़े रहने से राहत मिलेगी। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत अस्पताल में आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) डिजिटल सेवा शुरू की गई है। इसके तहत अस्पताल परिसर में जगह-जगह क्यूआर कोड लगाए गए हैं।
मरीज या तीमारदार स्मार्टफोन से कोड स्कैन कर जरूरी विवरण दर्ज करेंगे। इसके बाद मोबाइल पर टोकन नंबर जनरेट हो जाएगा। काउंटर पर टोकन नंबर बताकर ओपीडी पर्ची प्राप्त की जा सकेगी।
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा ने बताया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य ओपीडी काउंटर पर भीड़ कम करना और मरीजों के समय की बचत करना है। डिजिटल पंजीकरण से प्रक्रिया आसान और तेज होगी।
साथ ही पैथोलॉजी और एक्स-रे जैसी सेवाओं को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी। सीएमएस डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा ने लोगों से आभा आईडी बनवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से मरीजों का समय बचेगा और उपचार संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
एक आईडी में सुरक्षित रहेगा पूरा मेडिकल रिकॉर्ड
सीएमएस के अनुसार, आभा आईडी बनने के बाद मरीज की एक्स-रे रिपोर्ट, लैब जांच और उपचार से संबंधित रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा सकेगा। भविष्य में मरीज किसी दूसरे सरकारी या पंजीकृत स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराने जाता है तो उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से चिकित्सक उसकी पुरानी जांच और इलाज की जानकारी देख सकेंगे। इससे जरूरत के अनुसार दोबारा जांच कराने की परेशानी कम हो सकती है और उपचार में सहूलियत मिलेगी।
बुजुर्गों के लिए भी रहेगी सुविधा
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था के कारण किसी मरीज को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। आभा आईडी बनाने और क्यूआर कोड से पंजीकरण की प्रक्रिया समझाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को तैनात किया गया है। जागरूकता के लिए पंपलेट भी लगाए गए हैं। जिन मरीजों के पास स्मार्टफोन नहीं है या जो डिजिटल प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं कर सकते, उनके लिए सामान्य पंजीकरण काउंटर की व्यवस्था जारी रहेगी। आधार नंबर और ओटीपी के माध्यम से भी पंजीकरण कराया जा सकेगा।