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ज्ञानवापी मुकदमा: वादमित्र के दस्तावेज की प्रमाणिकता पर सवाल, अदालत में रखी दलील; बहस कैसे संभव?

Sat, 31 Oct 2026 08:20 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 31 Oct 2026 08:20 AM IST
सार

ज्ञानवापी मुकदमे में वादमित्र की ओर से दाखिल दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सवाल उठाए। अदालत में दलील दी कि जब दस्तावेज अप्रमाणित हैं तो उनके आधार पर बहस कैसे की जा सकती है। उन्होंने दस्तावेजों की वैधता और प्रमाणिकता स्पष्ट किए बिना उन पर विचार किए जाने पर आपत्ति जताई।

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Gyanvapi case Questions regarding authenticity plaintiff representative documents arguments presented
वाराणसी कोर्ट में चल रही सुनवाई। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

ज्ञानवापी से जुड़े वर्ष 1991 के मुकदमे में वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने और दिवंगत वादी हरिहर पांडेय की पुत्रियों को पक्षकार बनाए जाने के मामले में विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत में सुनवाई हुई। लंबित पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने वादमित्र की ओर से दाखिल दस्तावेज की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए।

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उन्होंने कहा कि दस्तावेज अप्रमाणित हैं और साक्ष्य अधिनियम के दायरे में नहीं आते। ऐसे में इन्हें पत्रावली पर शामिल करने का औचित्य और इनके आधार पर बहस की वैधानिकता स्पष्ट होनी चाहिए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 31 अक्तूबर की तारीख तय की है। 

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विशेष न्यायाधीश द्वितीय की अदालत में सुनवाई

ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने की मांग को लेकर वर्ष 1991 में मुकदमा दाखिल किया गया था। इस मुकदमे के वादी पक्षकार हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनकी तीन पुत्रियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेनू पांडेय ने पिता के स्थान पर पक्षकार बनाए जाने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने के लिए भी प्रार्थना पत्र दिया था।

सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की अदालत ने 11 जुलाई 2025 को दोनों मांगों से संबंधित प्रार्थना पत्रों को पोषणीयता के आधार पर खारिज कर दिया था। इस आदेश को तीनों बहनों की ओर से अधिवक्ता ने पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से चुनौती दी है। इसी याचिका पर विशेष न्यायाधीश द्वितीय की अदालत में सुनवाई चल रही है। वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से पुनरीक्षण याचिका पर आपत्ति दाखिल कर अपना पक्ष रखा जा रहा है।

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