एक्सक्लूसिव: दोनों तलवों पर शरीर का 70 से 93% भार, जल्दी थक रहे खिलाड़ी; बीएचयू में शोध से तैयार होगी नई तकनीक
पैर के दोनों तलवों पर शरीर का 70 से 93% भार पड़ने से खिलाड़ी जल्दी थक रहे हैं। यो-यो इंटर मिटेंट रिकवरी टेस्ट और फिक्स क्योर मशीन से परीक्षण के बाद बीएचयू में मैच जिताऊ बायो मैकेनिक्स तैयार हो रही है।
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हम अपने पैर के पंजे पर बढ़ रहे भार को नजर अंदाज कर रहे हैं। ये साइलेंट किलर की तरह से शरीर की क्षमताओं को घटा रहा है। खासकर खिलाड़ियों के बाएं पंजे पर आने वाला प्रेशर उनकी क्षमता को कम और एड़ी को चोटिल कर रहा है। यह खुलासा बीएचयू में फुटबॉल खिलाड़ियों पर हुए ताजा (अगस्त-सितंबर 2026) अध्ययन से हुआ है।
पता चला कि बाएं पैर के तलवे की एड़ी पर 70 फीसदी और अगले हिस्से पर 30 फीसदी भार पड़ रहा। इसी तरह दाएं पैर की एड़ी पर 93 फीसदी भार नोट किया गया जबकि ये 50 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। जिन खिलाड़ियों का प्रेशर असंतुलित था उनका प्रदर्शन घटता जा रहा है।
लंबे समय तक ऐसे ही खेलने के बाद पैर का पोस्चर बिगड़ रहा। साथ ही घुटनों का दर्द, स्पोंडलाइटिस की समस्या भी हो रही है। अब इससे बचाने और मैच जिताऊ बायो मैकेनिक्स पर बीएचयू में रिसर्च हुआ है।
30 फुटबॉलर्स को 20-20 मीटर की दूरी पर कई बार दौड़ाया
बीएचयू के शारीरिक शिक्षा विभाग में डॉ. विनायक दुबे के निर्देशन में उनके छात्र आकाश बक्सला ने अपने शोध प्रबंध में ये अध्ययन 30 फुटबॉलर्स पर किया। पहले यो-यो इंटर मिटेंट रिकवरी टेस्ट में खिलाड़ियों को 20-20 मीटर की दूरी पर कई बार दौड़ाया गया। इस टेस्ट के बाद फिक्स क्योर मशीन से पैर के तलवे को स्कैन कर दोनों पंजों पर पड़े प्रेशर को नोट किया गया। दोनों डेटा को जोड़ने पर पता चला कि जिन खिलाड़ियों का प्रेशर एड़ी पर आ रहा उनका प्रदर्शन घट रहा और जिनके पैर के पंजे पर कम प्रेशर आ रहा है उनका मैदान में प्रदर्शन ज्यादा बेहतर है। अध्ययन में पाया गया कि बिना थके लंबे समय तक दौड़ने और बॉल किक करने का स्टेमिना बना रहता है।
अध्ययन में बताया गया कि यदि आपका वजन 60 किलो है तो दोनों पैरों पर 30-30 किलो का वजन होना चाहिए। बाएं पैर की एड़ी पर 15 किलो, अग्र भाग पर 10 किलो और उंगलियों पर पांच किलो का भार होना चाहिए। लेकिन अध्ययन में शामिल ज्यादातर खिलाड़ियों का वजन पैर की एड़ी पर ही पड़ रहा है। डॉ. विनायक दुबे ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए बीएचयू में तय मैकेनिज्म पर रिसर्च जारी है।