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Saharanpur News: मस्जिद ध्वस्तीकरण पर मौलाना अरशद मदनी ने उठाए सवाल
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देवबंद। सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर स्थित प्राचीन मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दुख जताते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या संविधान और कानून का पालन हर नागरिक और हर धर्म के लिए समान रूप से हो रहा है।
मौलाना मदनी ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि मामला केवल एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण का नहीं, बल्कि संविधान की सर्वोच्चता, कानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक समानता और राज्य की निष्पक्ष भूमिका से जुड़ा है। उन्होंने दावा किया कि 1991 का पूजा स्थल अधिनियम अभी प्रभावी है और नए वक्फ कानून में वक्फ बाय यूजर का प्रावधान भी है। ऐसे में कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि मस्जिद का वक्फ बोर्ड में पंजीकरण संख्या 451 है और जमीन याकूब खान व वहीद खान के नाम होने का दावा किया गया है। ऐसे में कार्रवाई किस आधार पर की गई, यह स्पष्ट होना चाहिए।
मौलाना मदनी ने कहा कि यदि अवैध कब्जे और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई ही आधार है तो यही मापदंड सभी धर्मों और वर्गों के धार्मिक स्थलों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मस्जिद कमेटी की ओर से अदालत में मस्जिद के पुराने होने से संबंधित दस्तावेज पेश किए गए थे। कमेटी के अनुसार, मस्जिद का अस्तित्व कलेक्ट्रेट की वर्तमान इमारत से पहले का है। 1911 से संबंधित दस्तावेजों, नगरपालिका रिकॉर्ड और पुराने राजस्व अभिलेखों का भी हवाला दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन तथ्यों को नजरअंदाज किया गया।
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मौलाना मदनी ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि मामला केवल एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण का नहीं, बल्कि संविधान की सर्वोच्चता, कानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक समानता और राज्य की निष्पक्ष भूमिका से जुड़ा है। उन्होंने दावा किया कि 1991 का पूजा स्थल अधिनियम अभी प्रभावी है और नए वक्फ कानून में वक्फ बाय यूजर का प्रावधान भी है। ऐसे में कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि मस्जिद का वक्फ बोर्ड में पंजीकरण संख्या 451 है और जमीन याकूब खान व वहीद खान के नाम होने का दावा किया गया है। ऐसे में कार्रवाई किस आधार पर की गई, यह स्पष्ट होना चाहिए।
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मौलाना मदनी ने कहा कि यदि अवैध कब्जे और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई ही आधार है तो यही मापदंड सभी धर्मों और वर्गों के धार्मिक स्थलों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मस्जिद कमेटी की ओर से अदालत में मस्जिद के पुराने होने से संबंधित दस्तावेज पेश किए गए थे। कमेटी के अनुसार, मस्जिद का अस्तित्व कलेक्ट्रेट की वर्तमान इमारत से पहले का है। 1911 से संबंधित दस्तावेजों, नगरपालिका रिकॉर्ड और पुराने राजस्व अभिलेखों का भी हवाला दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन तथ्यों को नजरअंदाज किया गया।
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