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ईडी का शिकंजा: जौहर यूनिवर्सिटी का सपना बना आजम के जी का जंजाल, विवि में हर विस्तार पर गहराता गया विवाद

Mon, 02 Nov 2026 06:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा मोहित सक्सेना, रामपुर
मोहित सक्सेना, रामपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 02 Nov 2026 06:43 AM IST
सार

यूनिवर्सिटी का परिसर जितना बड़ा होता गया, उसके लिए जमीन जुटाने को लेकर विवाद बढ़ते गए। 

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ED tightens the screws: Azam’s dream of Jauhar University becomes a major source of trouble for him
आजम खां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जौहर विवि के रूप में आजम खां का ड्रीम प्रोजेक्ट जैसे-जैसे विस्तार लेता गया, विवाद भी गहराते चले गए। यूनिवर्सिटी का परिसर जितना बड़ा होता गया, उसके लिए जमीन जुटाने को लेकर विवाद बढ़ते गए। 

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आरोप है कि यूनिवर्सिटी को विशालकाय और भव्य बनाने की चाहत में जमीन जुटाने के दौरान नियम-कायदों को ताक पर रख दिया गया। किसानों की जमीन पर जबरन कब्जे, सरकारी जमीन के इस्तेमाल और शत्रु संपत्ति को यूनिवर्सिटी में शामिल करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए।
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शुरुआत में ये विवाद स्थानीय स्तर पर जमीन के झगड़े तक सीमित नजर आए, लेकिन सत्ता बदलने के बाद इन मामलों ने कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का रूप लेना शुरू कर दिया। दस बार विधायक और पांच बार प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके आजम खां ने जब जाैहर विवि का निर्माण शुरू कराया तो उस वक्त प्रदेश में सपा की सरकार थी।
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सपा सरकार में जौहर यूनिवर्सिटी का उद्घाटन हुआ और फिर इसके बाद यहां पर पढ़ाई भी शुरू हो गई। यूनिवर्सिटी में पढ़ाई लगातार जारी है लेकिन सरकार बदलने के बाद आजम खां की मुश्किलें लगातार बढ़ती चली गईं। वर्ष 2019 में अजीमनगर थाने में किसानों की शिकायतों पर मुकदमों का सिलसिला शुरू हुआ।  

करोड़ के निर्माण का हिसाब बना जांच का बड़ा आधार
यूनिवर्सिटी की 59 इमारतों के निर्माण की लागत करीब 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई। जमीन की कीमत जोड़ने पर कुल लागत करीब 499.09 करोड़ रुपये बताई गई। दूसरी ओर ट्रस्ट के आयकर रिकॉर्ड में पूंजीगत व्यय 78.32 करोड़ रुपये दर्ज होने की बात सामने आई। इस तरह करीब 416.14 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब जांच एजेंसियों के लिए अहम सवाल बन गया। 

कोर्ट में छलके आंसू, हाथ जोड़कर बोले-अब कहने के लिए बचा क्या
करीब 11 महीने जेल में बिताने के बाद बाहर आने की उम्मीद पूरी हुई, लेकिन कुछ ही घंटों में फिर सलाखों के पीछे पहुंचने की नौबत आ गई। लंबे कानूनी संघर्ष के बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां रविवार को ईडी की विशेष अदालत में पेशी के दौरान भावुक हो गए। विशेष न्यायाधीश अवनीश कुमार पांडेय के सामने उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। हाथ जोड़कर उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की और कहा,  बदले की भावना में सब कुछ खत्म हो गया। अदालत पहुंचते समय भी उन्होंने कहा था कि अब बोलने के लिए बचा ही क्या है।


वर्ष 2019 में दर्ज 26 मामलों के आधार पर ईसीआईआर
ईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2019 में आजम खां के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में 26 मामले दर्ज किए गए थे। इन्हीं मामलों के आधार पर ईडी ने एक अगस्त 2019 को धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा चार के तहत एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी। इसके अलावा 13 अक्तूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में एक और प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों का जिक्र है। 

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