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Lalitpur News: ललितपुर के गनेशपुरा में 11वीं सदी की नृत्य मुद्रा वाली गणेश मूर्ति का विशेष महत्व
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बानपुर क्षेत्र के गनेशपुरा में एक प्राचीन गणेश मंदिर स्थित है। यहां 11वीं सदी की नृत्य मुद्रा में गणेश जी की मूर्ति स्थापित है। ग्राम प्रधान काशी काशीराम रजक ने नृत्य मुद्रा में गणेश मूर्ति स्थापित होने की जानकारी दी। इस मूर्ति का पूरे क्षेत्र में विशेष महत्व है। यह मंदिर एक छोटे से कमरे में बना हुआ है। माघ माह में यहां एक बड़ा मेला लगता है। गनेशपुरा के इस मंदिर में भी विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। मूर्ति 24 भुजाओं वाली नृत्य मुद्रा में स्थित है। इसकी कलाकृति की प्रत्येक मुद्रा अनूठी है।
संक्रांति के समय गणेश चतुर्थी पर यहां बड़ा मेला लगता है। इस मेले में जनपद और मध्य प्रदेश के कई जिलों से लोग दर्शनों को आते हैं। गांव के लोग मंदिर में सुंदरकांड और पूजन आदि भी रोजाना करते हैं। मंदिर तक सड़क, पेयजल और बिजली की व्यवस्था करा दी गई है। यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अंतर्गत है, इसलिए अन्य निर्माण वही करा सकता है। इस मेले में जनपद समेत मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। गणेशोत्सव सोमवार से शुरू हो गया है। हर ओर गणपति देवा की गूंज सुनाई दे रही है। गली-गली और मोहल्लों में गणेश पांडाल सजाए गए हैं।
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ललितपुर। बानपुर क्षेत्र के गनेशपुरा में एक प्राचीन गणेश मंदिर स्थित है। यहां 11वीं सदी की नृत्य मुद्रा में गणेश जी की मूर्ति स्थापित है। ग्राम प्रधान काशी काशीराम रजक ने नृत्य मुद्रा में गणेश मूर्ति स्थापित होने की जानकारी दी। इस मूर्ति का पूरे क्षेत्र में विशेष महत्व है। यह मंदिर एक छोटे से कमरे में बना हुआ है। माघ माह में यहां एक बड़ा मेला लगता है। गनेशपुरा के इस मंदिर में भी विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। मूर्ति 24 भुजाओं वाली नृत्य मुद्रा में स्थित है। इसकी कलाकृति की प्रत्येक मुद्रा अनूठी है।
संक्रांति के समय गणेश चतुर्थी पर यहां बड़ा मेला लगता है। इस मेले में जनपद और मध्य प्रदेश के कई जिलों से लोग दर्शनों को आते हैं। गांव के लोग मंदिर में सुंदरकांड और पूजन आदि भी रोजाना करते हैं। मंदिर तक सड़क, पेयजल और बिजली की व्यवस्था करा दी गई है। यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अंतर्गत है, इसलिए अन्य निर्माण वही करा सकता है। इस मेले में जनपद समेत मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। गणेशोत्सव सोमवार से शुरू हो गया है। हर ओर गणपति देवा की गूंज सुनाई दे रही है। गली-गली और मोहल्लों में गणेश पांडाल सजाए गए हैं।
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