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अहोई अष्टमी: महामुहूर्त रवि पुष्य का महासंयोग, संतान की लंबी उम्र के लिए करें व्रत, राशि अनुसार करें खरीदारी
Sat, 31 Oct 2026 07:57 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Sat, 31 Oct 2026 07:57 PM IST
सार
अहोई अष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग में बही-खाते, यंत्र खरीदने का विशेष महत्व है। कार्तिक मास में दीपावली से पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र का व्यापारिक दृष्टि से विशेष महत्व है।
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अहोई अष्टमी
- फोटो : amar ujala
विस्तार
दीपावली से पहले एक नवंबर को महामुहूर्त रवि पुष्य का महासंयोग बन रहा है। इसके साथ ही अहोई अष्टमी भी है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। इसमें बही-खाते, देवी-देवताओं की प्रतियां, यंत्र खरीदने का विशेष महत्व रहता है। ज्योतिष में पुष्य को नक्षत्रों का राजा कहा गया है। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि तथा उप स्वामी देव गुरु बृहस्पति हैं। इन दोनों ही ग्रहों के संरक्षण में इस ग्रह को विशेष ऊर्जा मिलती है।
इसकी साक्षी में धार्मिक व भौतिक सुख, सुविधाओं की वस्तुएं तथा संपत्ति खरीदने का महत्व है। ज्योतिषाचार्य डॉ प्रीति अग्निहोत्री और आचार्य पवन तिवारी का कहना है कि धार्मिक मान्यता है कि इस नक्षत्र में किए गए धार्मिक कार्य अक्षय पुण्य तथा खरीदी गई वस्तु स्थायी समृद्धि प्रदान करती है।
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रविवार का अधिपति सूर्य है, जबकि सप्तमी तिथि भी सूर्य को समर्पित है। इस प्रकार सूर्य, शनि और बृहस्पति से जुड़ा यह संयोग विशेष महत्व है। वर्तमान में शनि का गोचर बृहस्पति की राशि मीन में होने से भी ज्योतिषीय दृष्टि से इसका महत्व और बढ़ गया है। कार्तिक मास में दीपावली से पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र का व्यापारिक दृष्टि से विशेष महत्व है। व्यापारी इस अवसर पर नए बही-खाते, कलम और दवात खरीदते हैं। वहीं श्रद्धालु सोने-चांदी तथा तांबे के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं, पूजन यंत्र और अन्य धार्मिक सामग्री खरीदते हैं।
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इसकी साक्षी में धार्मिक व भौतिक सुख, सुविधाओं की वस्तुएं तथा संपत्ति खरीदने का महत्व है। ज्योतिषाचार्य डॉ प्रीति अग्निहोत्री और आचार्य पवन तिवारी का कहना है कि धार्मिक मान्यता है कि इस नक्षत्र में किए गए धार्मिक कार्य अक्षय पुण्य तथा खरीदी गई वस्तु स्थायी समृद्धि प्रदान करती है।
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रविवार का अधिपति सूर्य है, जबकि सप्तमी तिथि भी सूर्य को समर्पित है। इस प्रकार सूर्य, शनि और बृहस्पति से जुड़ा यह संयोग विशेष महत्व है। वर्तमान में शनि का गोचर बृहस्पति की राशि मीन में होने से भी ज्योतिषीय दृष्टि से इसका महत्व और बढ़ गया है। कार्तिक मास में दीपावली से पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र का व्यापारिक दृष्टि से विशेष महत्व है। व्यापारी इस अवसर पर नए बही-खाते, कलम और दवात खरीदते हैं। वहीं श्रद्धालु सोने-चांदी तथा तांबे के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं, पूजन यंत्र और अन्य धार्मिक सामग्री खरीदते हैं।
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पुष्य नक्षत्र के दिन खरीदारी के शुभ मुहूर्त
लाभ सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक
अमृत सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक
शुभ दोपहर 1:30 से दोपहर 3:00 बजे तक
शुभ शाम 5:48 से शाम 7:24 बजे तक
अमृत शाम 7:30 से रात 9:00 बजे तक
लाभ सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक
अमृत सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक
शुभ दोपहर 1:30 से दोपहर 3:00 बजे तक
शुभ शाम 5:48 से शाम 7:24 बजे तक
अमृत शाम 7:30 से रात 9:00 बजे तक
राशि अनुसार खरीदारी का संकेत
मेष, सिंह और धनु: सोना, तांबे की वस्तुएं या वाहन खरीदना शुभ रहेगा।
वृषभ, कन्या, मकर: चांदी, भूमि, भवन या नया निवेश करना फायदेमंद।
मिथुन, तुला, कुंभ: इलेक्ट्रॉनिक सामान, आभूषण या नए कारोबार की शुरुआत करना उत्तम।
कर्क, वृश्चिक और मीन: पीली वस्तुएं, धार्मिक सामग्री, कीमती धातुओं की खरीदारी फलदायी।
मेष, सिंह और धनु: सोना, तांबे की वस्तुएं या वाहन खरीदना शुभ रहेगा।
वृषभ, कन्या, मकर: चांदी, भूमि, भवन या नया निवेश करना फायदेमंद।
मिथुन, तुला, कुंभ: इलेक्ट्रॉनिक सामान, आभूषण या नए कारोबार की शुरुआत करना उत्तम।
कर्क, वृश्चिक और मीन: पीली वस्तुएं, धार्मिक सामग्री, कीमती धातुओं की खरीदारी फलदायी।