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Jhansi: दो किलोमीटर दूर मिले लापता भाइयों के शव, एक साथ दो अर्थियां देख फटे कलेजे
Thu, 10 Sep 2026 02:11 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 02:11 AM IST
सार
सबसे पहले छोटे भाई मनीष का शव बरामद हुआ, उसके कुछ देर बाद बड़े भाई महेंद्र का भी शव उसके करीब ही मिल गया। जब दोनों भाइयों की अर्थियां एक साथ निकल रही थीं, तो परिजन के साथ ही आसपास के लोगों के कलेजे फट पड़े।
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महेंद्र और मनीष फाइल फोटो।
- फोटो : संवाद
विस्तार
बरुआसागर के कटरा मोहल्ला निवासी सगे भाई महेंद्र रायकवार (27) और मनीष (20) के शव बुधवार को घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर बरामद हुए। सबसे पहले छोटे भाई मनीष का शव बरामद हुआ, उसके कुछ देर बाद बड़े भाई महेंद्र का भी शव उसके करीब ही मिल गया। दोनों शव बेतवा नदी के तेज धार में बहते हुए यहां तक पहुंच गए थे। शाम को जब दोनों भाइयों की अर्थियां एक साथ निकल रही थीं, तो परिजन के साथ ही आसपास के लोगों के कलेजे फट पड़े। लोग कहने लगे हाय विधाता तूने यह क्या किया।
उनके पिता राजू रायकवार के पास नोटघाट से कोलवा के बीच मछली पकड़ने का ठेका है। मंगलवार सुबह सात बजे राजू अपने दोनों बेटों के साथ निगरानी के लिए पहुंचे थे। नोटघाट पुल के दूसरी तरफ कुछ लोगों ने जाल लगा रखा था। महेंद्र और मनीष उनको रोकने के लिए नाव से रवाना हुए। नदी के बीच में पहुंचने पर नाव पत्थर से टकराकर पलट गई। उसके बाद दोनों ही नदी में जा गिरे।
उनकी तलाश के लिए बरुआसागर पुलिस के साथ ही एसडीआरएफ टीम भी लगी हुई थी। नदी के तेज बहाव की वजह से मंगलवार को उनको कामयाबी नहीं मिल सकी। बुधवार सुबह टीम ने फिर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। गोताखोर भी नदी में उतारे गए। करीब दो किलोमीटर तक नदी के प्रवाह की दिशा में खंगालने पर टीम को सबसे पहले मनीष का शव मिला। उसके करीब छह घंटे बाद महेंद्र का शव भी पत्थर एवं झाड़ियों में उलझा हुआ बरामद हो गया। सीओ टहरौली रक्षपाल सिंह ने बताया कि पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
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निराशा में बदली आशा
परिवार के लोग दोनों भाइयों के सकुशल मिलने की आस लगाए बैठे थे। बुधवार दोपहर शव मिलने की खबर घर पहुंची तो परिवार में मातम पसर गया। परिजन दहाड़ें मारकर रोने लगे। घर में मौजूद महिलाएं बिलखने लगीं। जिन दो भाइयों के लौटने का इंतजार था, गांव में उनके शव पहुंचते ही मातम पसर गया। बुधवार शाम एक घर से दो अर्थियों को उठता देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो आईं। पिता राजू का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पिता का कहना है कि महेंद्र एवं मनीष दोनों ही तैरना नहीं जानते थे। इस वजह से वह उनको नदी के पास भी जाने नहीं देता था। मंगलवार को भी उसने दोनों को नदी में जाने से रोका था। हादसे के बाद परिवार में उनका एक बेटा अमित ही बचा। बड़े बेटे महेंद्र की शादी हो चुकी। परिवार में पत्नी नेहा समेत बेटा कुलदीप 5 एवं धीरज 3 हैं। पत्नी नेहा का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
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उनके पिता राजू रायकवार के पास नोटघाट से कोलवा के बीच मछली पकड़ने का ठेका है। मंगलवार सुबह सात बजे राजू अपने दोनों बेटों के साथ निगरानी के लिए पहुंचे थे। नोटघाट पुल के दूसरी तरफ कुछ लोगों ने जाल लगा रखा था। महेंद्र और मनीष उनको रोकने के लिए नाव से रवाना हुए। नदी के बीच में पहुंचने पर नाव पत्थर से टकराकर पलट गई। उसके बाद दोनों ही नदी में जा गिरे।
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उनकी तलाश के लिए बरुआसागर पुलिस के साथ ही एसडीआरएफ टीम भी लगी हुई थी। नदी के तेज बहाव की वजह से मंगलवार को उनको कामयाबी नहीं मिल सकी। बुधवार सुबह टीम ने फिर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। गोताखोर भी नदी में उतारे गए। करीब दो किलोमीटर तक नदी के प्रवाह की दिशा में खंगालने पर टीम को सबसे पहले मनीष का शव मिला। उसके करीब छह घंटे बाद महेंद्र का शव भी पत्थर एवं झाड़ियों में उलझा हुआ बरामद हो गया। सीओ टहरौली रक्षपाल सिंह ने बताया कि पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
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निराशा में बदली आशा
परिवार के लोग दोनों भाइयों के सकुशल मिलने की आस लगाए बैठे थे। बुधवार दोपहर शव मिलने की खबर घर पहुंची तो परिवार में मातम पसर गया। परिजन दहाड़ें मारकर रोने लगे। घर में मौजूद महिलाएं बिलखने लगीं। जिन दो भाइयों के लौटने का इंतजार था, गांव में उनके शव पहुंचते ही मातम पसर गया। बुधवार शाम एक घर से दो अर्थियों को उठता देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो आईं। पिता राजू का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पिता का कहना है कि महेंद्र एवं मनीष दोनों ही तैरना नहीं जानते थे। इस वजह से वह उनको नदी के पास भी जाने नहीं देता था। मंगलवार को भी उसने दोनों को नदी में जाने से रोका था। हादसे के बाद परिवार में उनका एक बेटा अमित ही बचा। बड़े बेटे महेंद्र की शादी हो चुकी। परिवार में पत्नी नेहा समेत बेटा कुलदीप 5 एवं धीरज 3 हैं। पत्नी नेहा का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया।