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Gonda News: घरों में घुसा पानी, नाव बनी सहारा, तख्त पर सिमटी गृहस्थी
Mon, 07 Sep 2026 11:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 07 Sep 2026 11:28 PM IST
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गोंडा में बाढ़ के हालात बयां करतीं तस्वीरें। संवाद
उमरी बेगमगंज/विश्नोहरपुर। बाहर सरयू का बढ़ता पानी और घर के अंदर सिमटती गृहस्थी... नवाबगंज और उमरी के माझा इलाके में बाढ़ ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दत्तनगर के बाड़ी माझा में चौकी के पीछे 12 घरों में पानी भर गया है। विजय निषाद, लुल्लर यादव, जवाहिर, मुन्नालाल निषाद, जुगाड़ी और झिन्नू समेत कई परिवारों ने जरूरी सामान तख्त व अन्य ऊंचे स्थानों पर रख दिए हैं। नीचे पानी है और ऊपर गृहस्थी, इसी के बीच परिवार समय काटने को मजबूर हैं।
बाड़ी माझा में ढेमवा चौकी जाने वाले रास्ते पर कमर तक पानी भर गया है। इससे कई परिवारों का आवागमन बाधित है। ग्रामीणों के मुताबिक अभी सरकारी नाव भी उपलब्ध नहीं है। वैकल्पिक रास्ते पर भी पानी भरने से ढेमवा आने-जाने में परेशानी हो रही है। साकीपुर के अट्ठाईसा, शुक्ल पुरवा, गोकुला के टेपरा, तुलसीपुर, चौखड़िया, महंगूपुर, जैतपुर, माझाराठ और दुर्गागंज समेत कई गांवों में पानी भर गया है। खेतों में धान की फसल डूब गई है। गन्ने के खेत भी जलमग्न हैं। गोकुला में रिंग रोड की मिट्टी कटने लगी है।
ऐली परसौली की करीब पांच हजार आबादी बाढ़ के पानी से घिरी है। कई घरों में पानी भर चुका है। सड़कें जलमग्न होने से आवागमन प्रभावित है। पानी से घिरे परिवार सामान बचाने के लिए जुगाड़ का सहारा ले रहे हैं। कई घरों में चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों को चिंता है कि पानी और बढ़ा तो घर में रखा अनाज व जरूरी सामान भी खराब हो जाएगा। माझा क्षेत्र के गढ़ी, परास, जबरनगर, ब्यौंदा और बहादुरपुर समेत कई गांवों में भी बाढ़ का असर है।
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भूसा भीगा, मवेशियों के चारे का संकट
बाढ़ से सबसे ज्यादा परेशानी पशुपालकों को हो रही है। खेत और रास्ते डूबने से हरा चारा नहीं मिल रहा है। घरों में रखा भूसा भी पानी से खराब हो रहा है। दत्तनगर और साकीपुर के ग्रामीणों का कहना है कि वे करीब दो माह से बाढ़ और कटान की मार झेल रहे हैं, लेकिन अभी तक राहत किट नहीं मिली। बाड़ी माझा के हीरालाल ने कहा कि कई जगह लोगों को दो-दो बार राहत किट मिल चुकी है, लेकिन यहां एक बार भी किसी ने हाल नहीं पूछा। उधर, साकीपुर की बाढ़ चौकी पर पशु चिकित्सा विभाग ने लंपी रोग को लेकर शिविर लगाया। उपनिदेशक डॉ. अश्वनी सिंह, डॉ. अरुण तिवारी और प्रदीप श्रीवास्तव की टीम ने ग्रामीणों को पशुओं में लंपी के लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सक को सूचना देने की सलाह दी।
खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर है सरयू
करनैलगंज। सोमवार सुबह आठ बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 106.420 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 106.070 मीटर से 35 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में है। अयोध्या में भी नदी का जलस्तर 93.030 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 92.730 मीटर से 30 सेंटीमीटर अधिक है। सोमवार सुबह सरयू में कुल 3,78,800 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज हुआ।
राहत और निगरानी जारी
डीएम प्रियंका निरंजन ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों पर प्रशासन की पूरी नजर है। प्रभावित लोगों को बाढ़ शरणालयों में लाया जा रहा है। लंच पैकेट वितरित किए जा रहे हैं। पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी लगाई गई हैं। पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। सीआरओ रिंकी जायसवाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर प्रभावित लोगों से बातचीत की है। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
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बाड़ी माझा में ढेमवा चौकी जाने वाले रास्ते पर कमर तक पानी भर गया है। इससे कई परिवारों का आवागमन बाधित है। ग्रामीणों के मुताबिक अभी सरकारी नाव भी उपलब्ध नहीं है। वैकल्पिक रास्ते पर भी पानी भरने से ढेमवा आने-जाने में परेशानी हो रही है। साकीपुर के अट्ठाईसा, शुक्ल पुरवा, गोकुला के टेपरा, तुलसीपुर, चौखड़िया, महंगूपुर, जैतपुर, माझाराठ और दुर्गागंज समेत कई गांवों में पानी भर गया है। खेतों में धान की फसल डूब गई है। गन्ने के खेत भी जलमग्न हैं। गोकुला में रिंग रोड की मिट्टी कटने लगी है।
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ऐली परसौली की करीब पांच हजार आबादी बाढ़ के पानी से घिरी है। कई घरों में पानी भर चुका है। सड़कें जलमग्न होने से आवागमन प्रभावित है। पानी से घिरे परिवार सामान बचाने के लिए जुगाड़ का सहारा ले रहे हैं। कई घरों में चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों को चिंता है कि पानी और बढ़ा तो घर में रखा अनाज व जरूरी सामान भी खराब हो जाएगा। माझा क्षेत्र के गढ़ी, परास, जबरनगर, ब्यौंदा और बहादुरपुर समेत कई गांवों में भी बाढ़ का असर है।
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भूसा भीगा, मवेशियों के चारे का संकट
बाढ़ से सबसे ज्यादा परेशानी पशुपालकों को हो रही है। खेत और रास्ते डूबने से हरा चारा नहीं मिल रहा है। घरों में रखा भूसा भी पानी से खराब हो रहा है। दत्तनगर और साकीपुर के ग्रामीणों का कहना है कि वे करीब दो माह से बाढ़ और कटान की मार झेल रहे हैं, लेकिन अभी तक राहत किट नहीं मिली। बाड़ी माझा के हीरालाल ने कहा कि कई जगह लोगों को दो-दो बार राहत किट मिल चुकी है, लेकिन यहां एक बार भी किसी ने हाल नहीं पूछा। उधर, साकीपुर की बाढ़ चौकी पर पशु चिकित्सा विभाग ने लंपी रोग को लेकर शिविर लगाया। उपनिदेशक डॉ. अश्वनी सिंह, डॉ. अरुण तिवारी और प्रदीप श्रीवास्तव की टीम ने ग्रामीणों को पशुओं में लंपी के लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सक को सूचना देने की सलाह दी।
खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर है सरयू
करनैलगंज। सोमवार सुबह आठ बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 106.420 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 106.070 मीटर से 35 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में है। अयोध्या में भी नदी का जलस्तर 93.030 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 92.730 मीटर से 30 सेंटीमीटर अधिक है। सोमवार सुबह सरयू में कुल 3,78,800 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज हुआ।
राहत और निगरानी जारी
डीएम प्रियंका निरंजन ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों पर प्रशासन की पूरी नजर है। प्रभावित लोगों को बाढ़ शरणालयों में लाया जा रहा है। लंच पैकेट वितरित किए जा रहे हैं। पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी लगाई गई हैं। पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। सीआरओ रिंकी जायसवाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर प्रभावित लोगों से बातचीत की है। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

गोंडा में बाढ़ के हालात बयां करतीं तस्वीरें। संवाद

गोंडा में बाढ़ के हालात बयां करतीं तस्वीरें। संवाद

गोंडा में बाढ़ के हालात बयां करतीं तस्वीरें। संवाद