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Basti News: अनुचर के निलंबन पर प्रबंधक ने भी प्रधानाचार्य पर उठाई अंगुली
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बस्ती। अनुचर के जेल जाने के 14 दिन बाद उसे निलंबित करने के मामले में खैर इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब विद्यालय के प्रबंधक ने भी प्रधानाचार्य की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को पत्र भेजा है। इससे पहले डीआईओएस ने अनुचर के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर प्रधानाचार्य से स्पष्टीकरण तलब किया था।
प्रबंधक ने डीआईओएस को भेजे पत्र में कहा है कि आईजीआरएस पर हुई शिकायत के क्रम में वह अपना पक्ष रख रहे हैं। उनका आरोप है कि मो. सलीम की नियुक्ति प्राधिकारी होने के नाते प्रधानाचार्य का दायित्व था कि उनके खिलाफ नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाती। इसके बजाय उन्हें करीब नौ माह तक निलंबित रखा गया। प्रबंधक के मुताबिक उन्होंने कई बार नियमानुसार सेवा समाप्त करने के लिए कहा, लेकिन समय से कार्रवाई नहीं की गई।
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डीआईओएस ने छह बिंदुओं पर मांगा था जवाब
डीआईओएस की ओर से जारी नोटिस में कहा गया था कि मो. सलीम अक्तूबर 2025 से जेल में निरुद्ध थे। इसके 14 दिन बाद प्रधानाचार्य ने उन्हें निलंबित किया। 22 जुलाई को निलंबन के अनुमोदन के लिए पत्र भेजा गया था। नोटिस में यह भी कहा गया कि निलंबन से जुड़े तथ्यों को पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया। इसके बाद 29 जुलाई को विद्यालय की ओर से पत्र भेजकर बताया गया कि अनुचर के सजायाफ्ता होने के कारण उसकी सेवा समाप्त कर दी गई है। हालांकि इसमें सेवा समाप्ति की तिथि का उल्लेख नहीं था। कार्रवाई से संबंधित पत्रावली भी डीआईओएस कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई गई। इसे गंभीरता से लेते हुए डीआईओएस ने प्रधानाचार्य से छह बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था।
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21 अगस्त को प्रधानाचार्य ने दिया स्पष्टीकरण
डीआईओएस की नोटिस के जवाब में प्रधानाचार्य ने 21 अगस्त को अपना स्पष्टीकरण दिया। इसमें उन्होंने बताया कि मो. सलीम 27 अक्तूबर 2025 से बिना किसी पूर्व सूचना के लगातार अनुपस्थित थे। उनके मोबाइल पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। प्रधानाचार्य के अनुसार आठ नवंबर को उनके पते पर पत्राचार किया गया। इसके बाद मो. सलीम के बड़े भाई विद्यालय पहुंचे और बताया कि वह जेल में निरुद्ध हैं। उनके भाई की ओर से न्यायालय के आदेश की प्रति उपलब्ध कराने के बाद 11 नवंबर को मो. सलीम को निलंबित कर दिया गया। इसकी सूचना डीआईओएस कार्यालय को भी दी गई थी, लेकिन कतिपय कारणों से उसका अनुमोदन नहीं हो सका।
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प्रबंधक ने डीआईओएस को भेजे पत्र में कहा है कि आईजीआरएस पर हुई शिकायत के क्रम में वह अपना पक्ष रख रहे हैं। उनका आरोप है कि मो. सलीम की नियुक्ति प्राधिकारी होने के नाते प्रधानाचार्य का दायित्व था कि उनके खिलाफ नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाती। इसके बजाय उन्हें करीब नौ माह तक निलंबित रखा गया। प्रबंधक के मुताबिक उन्होंने कई बार नियमानुसार सेवा समाप्त करने के लिए कहा, लेकिन समय से कार्रवाई नहीं की गई।
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डीआईओएस ने छह बिंदुओं पर मांगा था जवाब
डीआईओएस की ओर से जारी नोटिस में कहा गया था कि मो. सलीम अक्तूबर 2025 से जेल में निरुद्ध थे। इसके 14 दिन बाद प्रधानाचार्य ने उन्हें निलंबित किया। 22 जुलाई को निलंबन के अनुमोदन के लिए पत्र भेजा गया था। नोटिस में यह भी कहा गया कि निलंबन से जुड़े तथ्यों को पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया। इसके बाद 29 जुलाई को विद्यालय की ओर से पत्र भेजकर बताया गया कि अनुचर के सजायाफ्ता होने के कारण उसकी सेवा समाप्त कर दी गई है। हालांकि इसमें सेवा समाप्ति की तिथि का उल्लेख नहीं था। कार्रवाई से संबंधित पत्रावली भी डीआईओएस कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई गई। इसे गंभीरता से लेते हुए डीआईओएस ने प्रधानाचार्य से छह बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था।
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21 अगस्त को प्रधानाचार्य ने दिया स्पष्टीकरण
डीआईओएस की नोटिस के जवाब में प्रधानाचार्य ने 21 अगस्त को अपना स्पष्टीकरण दिया। इसमें उन्होंने बताया कि मो. सलीम 27 अक्तूबर 2025 से बिना किसी पूर्व सूचना के लगातार अनुपस्थित थे। उनके मोबाइल पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। प्रधानाचार्य के अनुसार आठ नवंबर को उनके पते पर पत्राचार किया गया। इसके बाद मो. सलीम के बड़े भाई विद्यालय पहुंचे और बताया कि वह जेल में निरुद्ध हैं। उनके भाई की ओर से न्यायालय के आदेश की प्रति उपलब्ध कराने के बाद 11 नवंबर को मो. सलीम को निलंबित कर दिया गया। इसकी सूचना डीआईओएस कार्यालय को भी दी गई थी, लेकिन कतिपय कारणों से उसका अनुमोदन नहीं हो सका।