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Basti News: चेतावनी बिंंदु से 23 सेमी ऊपर सरयू, कई गांव पानी से घिरे
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सुविका बाबू गांव से निकलते स्कूली बच्चे व मोटर बोट से स्कूल जाते हुए संवाद
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बस्ती। पहाड़ों पर हुई बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण सरयू नदी उफान पर है। शनिवार शाम पांच बजे अयोध्या स्थित केंद्रीय जल आयोग कार्यालय के अनुसार नदी का जलस्तर 92.96 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 92.73 मीटर से 23 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। तटबंधों पर भी पानी का दबाव बढ़ने से ग्रामीणों में कटान को लेकर चिंता है।
दुबौलिया क्षेत्र में जलस्तर सुबह बढ़ने के बाद कुछ समय के लिए स्थिर रहा, लेकिन जलमग्न गांवों में लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हुईं। मैरुंड गांव सुविका बाबू के लोग रोजमर्रा के काम के लिए मोटरबोट का सहारा ले रहे हैं। तटबंध विहीन सतहा, बलुईया और विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती की ओर भी पानी फैल रहा है। खेतों में पानी भरने से धान समेत अन्य फसलों के खराब होने की आशंका है। माझा क्षेत्र के पशुपालक नाव के जरिए दूर-दराज के इलाकों से पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था कर रहे हैं।
कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर से खलवा गांव तक करीब दो किलोमीटर के दायरे में नदी का दबाव बना हुआ है। वहीं, विक्रमजोत क्षेत्र में भी बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। तटबंध से सटे करीब एक दर्जन गांव प्रभावित हैं। पकड़ी संग्राम और उसके दोनों पुरवों को तटबंध से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर पानी भरने से अर्जुनपुर, लकड़ी पांडेय, पकड़ी सूर्यवंश, बेतावा, कन्हईपुर और शम्भूपुर समेत आसपास के गांवों के लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है।
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कई गांवों में लंबे समय से जलभराव रहने के कारण संक्रामक रोगों का खतरा भी बढ़ गया है। चरागाहों में पानी भरने से हरी घास सड़ गई है। इससे पशुपालकों के सामने हरे चारे और भूसे का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का प्रकोप और बढ़ा तो उन्हें पशुओं के साथ तटबंध पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
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आबादी के करीब पहुंची नदी की धारा, कटान का डर
कुदरहा क्षेत्र में कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण दिशा में बसे महुआपार कला, मईपुर, टेंगरिहा राजा, बैडारी एहतमाली और हरखौलिया उर्फ मटियरिया समेत कई तटवर्ती गांवों में भी बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ गया है। जलस्तर बढ़ने से नदी की धारा आबादी के नजदीक पहुंच गई है। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। बाढ़ के पानी से धान और गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भरने से पशुओं के हरे चारे की समस्या भी गंभीर हो गई है। ग्रामीणों ने राहत और खाद्य सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की शिकायत की है। पानी भरने से स्कूली बच्चों और अन्य ग्रामीणों के आवागमन में भी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि जलस्तर और बढ़ा या कटान तेज हुआ तो नदी घरों और खेतों को चपेट में ले सकती है।
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बैराजों से पानी छोड़े जाने से बढ़ा दबाव
विक्रमजोत के जेई अतुल सिंह ने बताया कि पहाड़ों पर हुई बारिश के कारण बैराजों पर दबाव बढ़ा है। इसके चलते बड़ी मात्रा में पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है, जिससे सरयू का जलस्तर बढ़ रहा है। बीडी तटबंध के दो-तीन संवेदनशील कटान स्थलों पर कटानरोधी कार्य लगातार कराया जा रहा है।
कोट
नदी अभी बढ़ाव पर है। इसे देखते हुए सभी तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील स्थानों पर कटानरोधी कार्य कराया जा रहा है और ग्रामीणों को भी सतर्क किया जा रहा है।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड बस्ती
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दुबौलिया क्षेत्र में जलस्तर सुबह बढ़ने के बाद कुछ समय के लिए स्थिर रहा, लेकिन जलमग्न गांवों में लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हुईं। मैरुंड गांव सुविका बाबू के लोग रोजमर्रा के काम के लिए मोटरबोट का सहारा ले रहे हैं। तटबंध विहीन सतहा, बलुईया और विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती की ओर भी पानी फैल रहा है। खेतों में पानी भरने से धान समेत अन्य फसलों के खराब होने की आशंका है। माझा क्षेत्र के पशुपालक नाव के जरिए दूर-दराज के इलाकों से पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था कर रहे हैं।
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कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर से खलवा गांव तक करीब दो किलोमीटर के दायरे में नदी का दबाव बना हुआ है। वहीं, विक्रमजोत क्षेत्र में भी बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। तटबंध से सटे करीब एक दर्जन गांव प्रभावित हैं। पकड़ी संग्राम और उसके दोनों पुरवों को तटबंध से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर पानी भरने से अर्जुनपुर, लकड़ी पांडेय, पकड़ी सूर्यवंश, बेतावा, कन्हईपुर और शम्भूपुर समेत आसपास के गांवों के लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है।
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कई गांवों में लंबे समय से जलभराव रहने के कारण संक्रामक रोगों का खतरा भी बढ़ गया है। चरागाहों में पानी भरने से हरी घास सड़ गई है। इससे पशुपालकों के सामने हरे चारे और भूसे का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का प्रकोप और बढ़ा तो उन्हें पशुओं के साथ तटबंध पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
आबादी के करीब पहुंची नदी की धारा, कटान का डर
कुदरहा क्षेत्र में कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण दिशा में बसे महुआपार कला, मईपुर, टेंगरिहा राजा, बैडारी एहतमाली और हरखौलिया उर्फ मटियरिया समेत कई तटवर्ती गांवों में भी बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ गया है। जलस्तर बढ़ने से नदी की धारा आबादी के नजदीक पहुंच गई है। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। बाढ़ के पानी से धान और गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भरने से पशुओं के हरे चारे की समस्या भी गंभीर हो गई है। ग्रामीणों ने राहत और खाद्य सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की शिकायत की है। पानी भरने से स्कूली बच्चों और अन्य ग्रामीणों के आवागमन में भी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि जलस्तर और बढ़ा या कटान तेज हुआ तो नदी घरों और खेतों को चपेट में ले सकती है।
बैराजों से पानी छोड़े जाने से बढ़ा दबाव
विक्रमजोत के जेई अतुल सिंह ने बताया कि पहाड़ों पर हुई बारिश के कारण बैराजों पर दबाव बढ़ा है। इसके चलते बड़ी मात्रा में पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है, जिससे सरयू का जलस्तर बढ़ रहा है। बीडी तटबंध के दो-तीन संवेदनशील कटान स्थलों पर कटानरोधी कार्य लगातार कराया जा रहा है।
कोट
नदी अभी बढ़ाव पर है। इसे देखते हुए सभी तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील स्थानों पर कटानरोधी कार्य कराया जा रहा है और ग्रामीणों को भी सतर्क किया जा रहा है।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड बस्ती