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Balrampur News: कटान में बह गए चार घर, कई और मकानों पर मंडराया खतरा
Mon, 07 Sep 2026 11:02 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 07 Sep 2026 11:02 PM IST
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बलरामपुर के सोनडीह के पास प्रदर्शन के बाद ज्ञापन सौंपते ग्रामीण
हरैया सतघरवा। सोनडीह मजरे में हेंगहा पहाड़ी नाला अब खेतों से आगे बढ़कर आबादी को निगलने लगा है। नाले की तेज धार से अब तक चार घर नाले में समा चुके हैं, जबकि कई मकान और सरकारी आवास कटान के मुहाने पर हैं। ग्रामीणों को डर है कि कटान की रफ्तार नहीं थमी तो दर्जनों परिवारों के आशियाने उजड़ जाएंगे। उधर, राप्ती नदी भी कई इलाकों में लगातार कटान कर रही है।
सोनडीह के ग्रामीणों के लिए यह महज जमीन कटने की समस्या नहीं, बल्कि घर-परिवार और भविष्य उजड़ने का खतरा है। कभी खेतों तक सीमित रहने वाली नाले की धार अब आबादी के करीब पहुंच गई है। विश्राम गौतम, सत्यराम गौतम, झब्बर सिंह और बुझावल सिंह के मकान कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। वहीं स्वामीनाथ, दुर्गा सिंह, उजागर सिंह और जवाहर कुरील के घर भी कटान के मुहाने पर बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, कई परिवारों ने अपनी जमा पूंजी और सरकारी मदद से किसी तरह घर बनवाए थे। अब नाले की धार घरों के नीचे की जमीन को लगातार काट रही है।
राप्ती भी बढ़ा रही मुश्किल
इस मानसून राप्ती नदी और पहाड़ी नालों की धार ने कई इलाकों में कटान बढ़ाया है। अगस्त के अंतिम दिनों में राप्ती की कटान से बेला, हरबसपुर और कोडरी के करीब 200 परिवारों के घरों पर भी खतरा मंडराने की बात सामने आई थी। वहीं टेंगनहिया-जबदहा क्षेत्र में 150 बीघे से अधिक कृषि भूमि नदी में समाने की बात कही गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि हेंगहा नाले की धार लगातार जमीन काटते हुए आबादी की ओर बढ़ रही है।
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बरसात में टापू बन जाता है मजरा
सोनडीह के ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ कटान तक सीमित नहीं है। मजरे को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए न तो पक्का पुल है और न ही बेहतर रास्ता। ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात में हेंगहा नाले का जलस्तर बढ़ते ही मजरे का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता है। चारों तरफ पानी भरने से मजरा टापू जैसा हो जाता है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों और मरीजों पर पड़ता है। पानी का बहाव तेज होने पर बच्चों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। वहीं, किसी के बीमार पड़ने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत होने पर परिजनों को जोखिम उठाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार एंबुलेंस भी मजरे तक नहीं पहुंच पाती
कटानरोधी कार्य शुरू कराने के लिए दिया धरना
कटानरोधी कार्य शुरू न होने से नाराज ग्रामीणों ने सोमवार को हेंगहा नाले के किनारे धरना दिया। समाजसेवी एवं अधिवक्ता युगल कुमार शुक्ल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर कटानरोधी कार्य तत्काल शुरू कराने की मांग की। धरने में रामजी तिवारी, अर्जुन प्रसाद, योगेंद्र प्रसाद, दिनेश कुमार तिवारी, नंदलाल यादव, विवेक कुमार सिंह, व्यास मुनि पांडेय, दिवाकर तिवारी, बालेश्वर प्रसाद यादव, पुत्तन गुप्ता, नंदकिशोर तिवारी, अशोक कुमार तिवारी और दुर्गा प्रसाद तिवारी शामिल रहे। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार हर्ष सिंह को सौंपा। इसमें तत्काल कटानरोधी कार्य कराने के साथ आवागमन के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग की गई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान के बहिष्कार का निर्णय लिया जा सकता है।
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सोनडीह के ग्रामीणों के लिए यह महज जमीन कटने की समस्या नहीं, बल्कि घर-परिवार और भविष्य उजड़ने का खतरा है। कभी खेतों तक सीमित रहने वाली नाले की धार अब आबादी के करीब पहुंच गई है। विश्राम गौतम, सत्यराम गौतम, झब्बर सिंह और बुझावल सिंह के मकान कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। वहीं स्वामीनाथ, दुर्गा सिंह, उजागर सिंह और जवाहर कुरील के घर भी कटान के मुहाने पर बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, कई परिवारों ने अपनी जमा पूंजी और सरकारी मदद से किसी तरह घर बनवाए थे। अब नाले की धार घरों के नीचे की जमीन को लगातार काट रही है।
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राप्ती भी बढ़ा रही मुश्किल
इस मानसून राप्ती नदी और पहाड़ी नालों की धार ने कई इलाकों में कटान बढ़ाया है। अगस्त के अंतिम दिनों में राप्ती की कटान से बेला, हरबसपुर और कोडरी के करीब 200 परिवारों के घरों पर भी खतरा मंडराने की बात सामने आई थी। वहीं टेंगनहिया-जबदहा क्षेत्र में 150 बीघे से अधिक कृषि भूमि नदी में समाने की बात कही गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि हेंगहा नाले की धार लगातार जमीन काटते हुए आबादी की ओर बढ़ रही है।
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बरसात में टापू बन जाता है मजरा
सोनडीह के ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ कटान तक सीमित नहीं है। मजरे को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए न तो पक्का पुल है और न ही बेहतर रास्ता। ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात में हेंगहा नाले का जलस्तर बढ़ते ही मजरे का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता है। चारों तरफ पानी भरने से मजरा टापू जैसा हो जाता है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों और मरीजों पर पड़ता है। पानी का बहाव तेज होने पर बच्चों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। वहीं, किसी के बीमार पड़ने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत होने पर परिजनों को जोखिम उठाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार एंबुलेंस भी मजरे तक नहीं पहुंच पाती
कटानरोधी कार्य शुरू कराने के लिए दिया धरना
कटानरोधी कार्य शुरू न होने से नाराज ग्रामीणों ने सोमवार को हेंगहा नाले के किनारे धरना दिया। समाजसेवी एवं अधिवक्ता युगल कुमार शुक्ल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर कटानरोधी कार्य तत्काल शुरू कराने की मांग की। धरने में रामजी तिवारी, अर्जुन प्रसाद, योगेंद्र प्रसाद, दिनेश कुमार तिवारी, नंदलाल यादव, विवेक कुमार सिंह, व्यास मुनि पांडेय, दिवाकर तिवारी, बालेश्वर प्रसाद यादव, पुत्तन गुप्ता, नंदकिशोर तिवारी, अशोक कुमार तिवारी और दुर्गा प्रसाद तिवारी शामिल रहे। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार हर्ष सिंह को सौंपा। इसमें तत्काल कटानरोधी कार्य कराने के साथ आवागमन के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग की गई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान के बहिष्कार का निर्णय लिया जा सकता है।

बलरामपुर के सोनडीह के पास प्रदर्शन के बाद ज्ञापन सौंपते ग्रामीण