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Ballia News: भरसौता से लेकर टेंगरही तक 84 गांव के 71 हजार प्रभाावित
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Photo Title
बलिया/मझौवां। गंगा नदी का जलस्तर आठ दिन बढ़ने के बाद रविवार से घटाव शुरू हो गया। भयंकर बाढ़ ने लाखों लोगों की जिंदगी को न केवल अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि बुनियादी आवश्यकताओं की भी भारी कमी हो गई है। भरसौता से लेकर बिड़ला बांध टेंगरही से लगायत नौरंगा भुआल छपरा चक्की नौरंगा के लोगों की हालत काफी दयनीय हो गई है। लगभग 84 गांवों के 71 हजार आबादी बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित हो गई है। बाढ़ पीड़ितों के सामने भोजन और पीने के पानी की भारी कमी हो रही है। बाढ़ में फंसे लोग राहत सामग्री की बाट जोह रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में प्रशासन की पहुंच न के बराबर है। बाढ़ प्रभावित गांवों में लोग अपने घरों की छतों और ऊंची जगहों पर शरण लिए हैं, लेकिन वहां भी बुनियादी आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। बाढ़ के कारण शौचालयों का उपयोग भी कठिन हो गया है। बाढ़ के पानी से फैलने वाली बीमारियों के बढ़ने का खतरा बहुत अधिक हो गया है। केन्द्रीय जल आयोग गायघाट गेज के अनुसार रविवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 59.885 मीटर रिकार्ड किया गया। गंगा नदी का जलस्तर में एक सेमी प्रति घंटे घटाव पर है। खतरा बिन्दु 57.615 मीटर व मीडियम फ्लड लेबल 58.615 मीटर है। गंगा नदी इस समय खतरा बिन्दु से 2.27 मीटर ऊपर बह रही है। गंज पर 2016 में सर्वाधिक जलस्तर 60.390 मीटर रिकार्ड किया गया था।
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पानी में रहकर, पानी की किल्लत
मझौवां। बाढ़ के कारण पीने के पानी की समस्या भी बढ़ गई है। प्रशासन साफ पानी मुहैया कराने में पूरी तरह से हांफ चुका है। कई गांवों में पीने के पानी का स्रोत पूरी तरह से गंदा हो चुका है, वहां के लोग गंदे पानी को पीने पर मजबूर हैं। बाढ़ पीड़ित लोग गंदा पानी पीने पर विवश हैं। बाढ़ पीड़ित संजय चौधरी ने बताया कि मजबूरी में हम लोग पानी को उबालकर पीने का कार्य कर रहे है। बाढ़ प्रभावितों में सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, प्रसाद छपरा, धरमपुरा मझौवां डांगरबाद बेलहरी रुद्रपुर आदि दर्जनों गांवों के लोग 4 से 5 किमी की दूरी तय कर रामगढ़ के इर्द गिर्द में गंगापुर के जल निगम की टंकी से पानी भरने की कोशिश करते हैं, कभी ऐसा होता है कि वैगैर पानी मिलें निराश होकर लौटना पड़ता है क्योंकि जल निगम के द्वारा सुबह 30 मिनट और शाम को 20 मिनट ही सप्लाई दी जाती है।
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बाढ़ चौकियों पर दवाओं का अभाव
मझौवां। बाढ़ चौकियों पर स्वास्थ्य सेवाओं की भी हालत दैनिक है। स्वास्थ्य केंद्रों में बाढ़ की वजह से कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो पा रही है। प्राथमिक उपचार, दवाइयां और चिकित्सकों की कमी की वजह से ग्रामीण इलाकों में लोग जानलेवा बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जलजनित रोग, जैसे कि हैजा, मलेरिया, डेंगू और बुखार के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। राघवेन्द्र मल्लाह का कहना है कि बाढ़ चौकी पर दवा लेने के लिए गए थे तो वहां पर मौजूद स्टाफ द्वारा फ्री की दुकान समझ लिए हो कहकर भगा दिया गया।
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शहर के निचले इलाके में बाढ़ में फंसे लोगों की समस्याएं बरकरार
शहर के निचले इलाके में गंगा की बाढ़ का पानी में फंसे लोगों के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी हो गई है। विषैले जीव जंतु का डर हर पल समाया हुआ है। वहीं, राशन, भोजन व पीने के शुद्ध पानी के लिए बाढ़ पीड़ित जूझ रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से काई व्यवस्था नहीं है। पीने के पानी का संकट सबसे बड़ा है। माल्देपुर में एनएच-31 के करीब पानी पहुंचने से दिक्कत बढ़ने लगी है।
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वर्जन-- -
आज कहीं भी कटान होने की सूचना नहीं मिली है, आबादी वाला इलाका बिल्कुल सुरक्षित है नदी के जलस्तर में घटाव शुरू हो गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के डेंजर प्वाइंट पर कोई खतरा नहीं है नदी किनारे 80 फीट नीचे पत्थर पड़ा हुआ है बाढ़ क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है।
संजय कुमार मिश्र, एक्सईएन, बाढ़ विभाग
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सुरेमनपुर दियरांचल बद से बदतर, प्रशासन की सुविधा नाकाफी
बैरिया। गंगा व सरयू नदी के जल स्तर में मामूली कमी के बावजूद बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सुरेमनपुर दियराचंल की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। सरकार द्वारा राहत और बचाव के नाम पर उपलब्ध कराई गई सुविधा नाकाफी साबित हो रही है। दियराचंल के शिवाल मठिया, गोपाल नगर टाड़ी, गोपाल नगर, वशिष्ठ नगर, धूपनाथ के डेरा, बैज के डेरा, देवपुर मठिया सहित कुल आधा दर्जन गांवों के बाढ़ पीड़ितों की संख्या 40 हजार के आसपास है। प्रतिदिन सुबह शाम ढाई सौ से तीन सौ भोजन के पैकेट आ रहे हैं। किसी को मिल रहा है किसी को नहीं मिल पा रहा है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि पिछले 30 वर्षों में बाढ़ पीड़ितों की इतनी अपेक्षा शासन प्रशासन द्वारा कभी नहीं की गई थी।
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पुलिस चौकी तथा ग्राम सचिवालय बाढ़ के पानी में डूबा
बैरिया। गोपाल नगर पुलिस चौकी, ग्राम सचिवालय गोपाल नगर व कंपोजिट विद्यालय गोपाल नगर में पानी घुस जाने से व्यवस्था अस्त व्यस्त हो गई है। ग्राम सचिवालय व कंपोजिट विद्यालय को प्रशासन ने बाढ़ राहत केंद्र बना रखा था। अब बाढ़ राहत केंद्र कहां होगा, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस चौकी के बाढ़ के पानी में डूब जाने के कारण पुलिस कर्मियों की भी परेशानी बढ़ गई है।
शिवाल मठिया के ओमप्रकाश सिंह, राकेश सिंह, संजय साहनी, राजेश यादव गोपाल नगर टाड़ी के पप्पू यादव, मैनेजर यादव, गणेश यादव, महेश यादव, मुखराम यादव, वशिष्ठ नगर के राज किशोर सिंह, दिनेश सिंह, छोटू यादव, गणेश यादव, गोपाल नगर के अर्जुन यादव, प्रमोद यादव, सुनील यादव, महेश यादव सहित आदि ने पर्याप्त संख्या में नाव चलाने व जनरेटर की व्यवस्था की मांग की है। बकुलहा टोला फते राय, चांद दियर, आठगावा में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।सैकड़ो की संख्या में लोग अपने मवेशियों के साथ बंधे पर शरण लिए हुए हैं।
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बाढ़ चौकी पर राहत कर्मी नदारद
बैरिया। बाढ़ चौकी दुबे छपरा को छोड़कर अन्य बाढ़ चौकियो पर तैनात किए गए कर्मियों का मौके पर कहीं अता-पता नहीं है। पांडेपुर, दया छपरा, शिवपुर कपूर दियर, रामपुर कोड़रहा,चांद दियर व जय प्रकाश नगर बाढ़ चौकी पर कर्मचारी नदारद है।
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वर्जन-- -
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 3700 पैकेट बना बनाया खाना उपलब्ध कराया जा रहा है। गोपाल नगर में 1200, गोपालपुर दूबे छपरा 700, रामपुर कोड़रहा 100, जगदेवा 700, दया छपरा 200, बहुआरा 600 व मुरारपट्टी में 200 पैकेट पका पकाया भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।यह प्राकृतिक आपदा है, इसे रोका नहीं जा सकता है, किंतु हम कहीं से भी राहत और बचाव कार्य में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।
-उदय राज रत्ना नायब तहसीलदार, बैरिया
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राशन किट से कोई भी पीड़ित परिवार नहीं रहेगा वंचित
जयप्रकाश नगर। सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ प्रभावित विकासखंड मुरली छपरा की चांददीयर पंचायत के पुरवों का रविवार को अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार ने स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि किसी भी बाढ़ पीड़ित परिवार को कोई समस्या हो तो वह स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करें। कहा कि कोई भी पीड़ित परिवार राशन किट से वंचित नहीं रहेगा। राहत सामग्री के लिए राशन की कोई कमी नहीं है। जिला पंचायत सदस्य अजय कुमार यादव, चांददीयर पुलिस चौकी प्रभारी एसआई अवनीश कुमार त्रिपाठी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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पंद्रह दिनों से रात में मोबाइल की रोशनी में पक रहा खाना
जयप्रकाश नगर। विकासखंड मुरली छपरा की चांददीयर पंचायत की करीब 10 हजार आबादी सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित है। बैजनाथ बाबा का डेरा और पियारी टोला में करीब 750 लोग पिछले 15 दिनों से बाढ़ की मार झेल रहे हैं। आवागमन के लिए मात्र एक नाव की व्यवस्था है। कई परिवारों को रात में मोबाइल की रोशनी में भोजन पकाना पड़ रहा है। मोबाइल चार्ज करने के लिए ग्रामीणों को बकुल्हा रेलवे स्टेशन तक जाना पड़ रहा है।
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बोले बाढ़ पीड़ित-- -
बैजनाथ बाबा का डेरा निवासी संदेश यादव ने बताया कि करीब 15 दिनों से बाढ़ का पानी परेशानी का कारण बना हुआ है। नाव की संख्या कम होने से जरूरी काम के लिए बाहर निकलना भी मुश्किल है।
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- प्रभु यादव ने बताया कि रात में कई परिवार मोबाइल की रोशनी में खाना बनाने को मजबूर हैं। बिजली और मोबाइल चार्जिंग की सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को बकुल्हा रेलवे स्टेशन तक जाना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से नाव, रोशनी, राहत सामग्री और शौच की व्यवस्था कराने की मांग की।
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तेतरी देवी ने बताया कि घर में पानी भरने के बाद परिवार के साथ पुरानी रेलवे लाइन पर रहना पड़ रहा है। शौच के लिए भी कोई उचित स्थान नहीं है। बाढ़ के बीच महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
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सुनैना देवी ने बताया कि हर साल बाढ़ में घर छोड़कर ऊंचे स्थान पर शरण लेनी पड़ती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि राहत सामग्री के साथ महिलाओं और परिवारों के लिए सुरक्षित शौच की व्यवस्था भी जरूरी है। ग्रामीणों ने तत्काल राहत, स्वास्थ्य सुविधा और मवेशियों के लिए चारे की मांग की है।
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ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ीं, पानी के बीच रहने को मजबूर
सहतवार (बलिया)। सरयू नदी के जलस्तर बढ़ने से बीन बस्ती, चितविसाव चांदपुर, पुरानी बस्ती सहित दर्जनों बस्तियां पानी से घिर गई हैं। सबसे खराब स्थिति बिन बस्ती की है। पानी के बीच लोग रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों में जहरीले जीव-जंतुओं का भय भी बना हुआ है। रात में अंधेरा होने के कारण सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के घरों में आने की आशंका से लोग पूरी रात दहशत में रहते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रकाश, जनरेटर तथा सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम कराने की मांग की है।
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24 घंटे में 9 सेमी सरयू का जलस्तर बढ़ने से सहमे लोग
बेल्थरारोड। पिछले कई दिनों से सरयू नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। लाल निशान से ऊपर बहने वाली नदी के जलस्तर में वृद्धि से तटवर्ती लोग बाढ़ की आशंका को लेकर सहम गए हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार रविवार की शाम चार बजे जलस्तर 64.53 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान से 52 सेंटीमीटर अधिक है। पिछले 24 घंटे के दौरान 9 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आयोग ने अगले 24 घंटे में आधा-आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में वृद्धि होने का अनुमान किया है।
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पानी में रहकर, पानी की किल्लत
मझौवां। बाढ़ के कारण पीने के पानी की समस्या भी बढ़ गई है। प्रशासन साफ पानी मुहैया कराने में पूरी तरह से हांफ चुका है। कई गांवों में पीने के पानी का स्रोत पूरी तरह से गंदा हो चुका है, वहां के लोग गंदे पानी को पीने पर मजबूर हैं। बाढ़ पीड़ित लोग गंदा पानी पीने पर विवश हैं। बाढ़ पीड़ित संजय चौधरी ने बताया कि मजबूरी में हम लोग पानी को उबालकर पीने का कार्य कर रहे है। बाढ़ प्रभावितों में सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, प्रसाद छपरा, धरमपुरा मझौवां डांगरबाद बेलहरी रुद्रपुर आदि दर्जनों गांवों के लोग 4 से 5 किमी की दूरी तय कर रामगढ़ के इर्द गिर्द में गंगापुर के जल निगम की टंकी से पानी भरने की कोशिश करते हैं, कभी ऐसा होता है कि वैगैर पानी मिलें निराश होकर लौटना पड़ता है क्योंकि जल निगम के द्वारा सुबह 30 मिनट और शाम को 20 मिनट ही सप्लाई दी जाती है।
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बाढ़ चौकियों पर दवाओं का अभाव
मझौवां। बाढ़ चौकियों पर स्वास्थ्य सेवाओं की भी हालत दैनिक है। स्वास्थ्य केंद्रों में बाढ़ की वजह से कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो पा रही है। प्राथमिक उपचार, दवाइयां और चिकित्सकों की कमी की वजह से ग्रामीण इलाकों में लोग जानलेवा बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जलजनित रोग, जैसे कि हैजा, मलेरिया, डेंगू और बुखार के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। राघवेन्द्र मल्लाह का कहना है कि बाढ़ चौकी पर दवा लेने के लिए गए थे तो वहां पर मौजूद स्टाफ द्वारा फ्री की दुकान समझ लिए हो कहकर भगा दिया गया।
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शहर के निचले इलाके में बाढ़ में फंसे लोगों की समस्याएं बरकरार
शहर के निचले इलाके में गंगा की बाढ़ का पानी में फंसे लोगों के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी हो गई है। विषैले जीव जंतु का डर हर पल समाया हुआ है। वहीं, राशन, भोजन व पीने के शुद्ध पानी के लिए बाढ़ पीड़ित जूझ रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से काई व्यवस्था नहीं है। पीने के पानी का संकट सबसे बड़ा है। माल्देपुर में एनएच-31 के करीब पानी पहुंचने से दिक्कत बढ़ने लगी है।
वर्जन
आज कहीं भी कटान होने की सूचना नहीं मिली है, आबादी वाला इलाका बिल्कुल सुरक्षित है नदी के जलस्तर में घटाव शुरू हो गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के डेंजर प्वाइंट पर कोई खतरा नहीं है नदी किनारे 80 फीट नीचे पत्थर पड़ा हुआ है बाढ़ क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है।
संजय कुमार मिश्र, एक्सईएन, बाढ़ विभाग
सुरेमनपुर दियरांचल बद से बदतर, प्रशासन की सुविधा नाकाफी
बैरिया। गंगा व सरयू नदी के जल स्तर में मामूली कमी के बावजूद बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सुरेमनपुर दियराचंल की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। सरकार द्वारा राहत और बचाव के नाम पर उपलब्ध कराई गई सुविधा नाकाफी साबित हो रही है। दियराचंल के शिवाल मठिया, गोपाल नगर टाड़ी, गोपाल नगर, वशिष्ठ नगर, धूपनाथ के डेरा, बैज के डेरा, देवपुर मठिया सहित कुल आधा दर्जन गांवों के बाढ़ पीड़ितों की संख्या 40 हजार के आसपास है। प्रतिदिन सुबह शाम ढाई सौ से तीन सौ भोजन के पैकेट आ रहे हैं। किसी को मिल रहा है किसी को नहीं मिल पा रहा है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि पिछले 30 वर्षों में बाढ़ पीड़ितों की इतनी अपेक्षा शासन प्रशासन द्वारा कभी नहीं की गई थी।
पुलिस चौकी तथा ग्राम सचिवालय बाढ़ के पानी में डूबा
बैरिया। गोपाल नगर पुलिस चौकी, ग्राम सचिवालय गोपाल नगर व कंपोजिट विद्यालय गोपाल नगर में पानी घुस जाने से व्यवस्था अस्त व्यस्त हो गई है। ग्राम सचिवालय व कंपोजिट विद्यालय को प्रशासन ने बाढ़ राहत केंद्र बना रखा था। अब बाढ़ राहत केंद्र कहां होगा, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस चौकी के बाढ़ के पानी में डूब जाने के कारण पुलिस कर्मियों की भी परेशानी बढ़ गई है।
शिवाल मठिया के ओमप्रकाश सिंह, राकेश सिंह, संजय साहनी, राजेश यादव गोपाल नगर टाड़ी के पप्पू यादव, मैनेजर यादव, गणेश यादव, महेश यादव, मुखराम यादव, वशिष्ठ नगर के राज किशोर सिंह, दिनेश सिंह, छोटू यादव, गणेश यादव, गोपाल नगर के अर्जुन यादव, प्रमोद यादव, सुनील यादव, महेश यादव सहित आदि ने पर्याप्त संख्या में नाव चलाने व जनरेटर की व्यवस्था की मांग की है। बकुलहा टोला फते राय, चांद दियर, आठगावा में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।सैकड़ो की संख्या में लोग अपने मवेशियों के साथ बंधे पर शरण लिए हुए हैं।
बाढ़ चौकी पर राहत कर्मी नदारद
बैरिया। बाढ़ चौकी दुबे छपरा को छोड़कर अन्य बाढ़ चौकियो पर तैनात किए गए कर्मियों का मौके पर कहीं अता-पता नहीं है। पांडेपुर, दया छपरा, शिवपुर कपूर दियर, रामपुर कोड़रहा,चांद दियर व जय प्रकाश नगर बाढ़ चौकी पर कर्मचारी नदारद है।
वर्जन
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 3700 पैकेट बना बनाया खाना उपलब्ध कराया जा रहा है। गोपाल नगर में 1200, गोपालपुर दूबे छपरा 700, रामपुर कोड़रहा 100, जगदेवा 700, दया छपरा 200, बहुआरा 600 व मुरारपट्टी में 200 पैकेट पका पकाया भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।यह प्राकृतिक आपदा है, इसे रोका नहीं जा सकता है, किंतु हम कहीं से भी राहत और बचाव कार्य में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।
-उदय राज रत्ना नायब तहसीलदार, बैरिया
राशन किट से कोई भी पीड़ित परिवार नहीं रहेगा वंचित
जयप्रकाश नगर। सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ प्रभावित विकासखंड मुरली छपरा की चांददीयर पंचायत के पुरवों का रविवार को अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार ने स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि किसी भी बाढ़ पीड़ित परिवार को कोई समस्या हो तो वह स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करें। कहा कि कोई भी पीड़ित परिवार राशन किट से वंचित नहीं रहेगा। राहत सामग्री के लिए राशन की कोई कमी नहीं है। जिला पंचायत सदस्य अजय कुमार यादव, चांददीयर पुलिस चौकी प्रभारी एसआई अवनीश कुमार त्रिपाठी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
पंद्रह दिनों से रात में मोबाइल की रोशनी में पक रहा खाना
जयप्रकाश नगर। विकासखंड मुरली छपरा की चांददीयर पंचायत की करीब 10 हजार आबादी सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित है। बैजनाथ बाबा का डेरा और पियारी टोला में करीब 750 लोग पिछले 15 दिनों से बाढ़ की मार झेल रहे हैं। आवागमन के लिए मात्र एक नाव की व्यवस्था है। कई परिवारों को रात में मोबाइल की रोशनी में भोजन पकाना पड़ रहा है। मोबाइल चार्ज करने के लिए ग्रामीणों को बकुल्हा रेलवे स्टेशन तक जाना पड़ रहा है।
बोले बाढ़ पीड़ित
बैजनाथ बाबा का डेरा निवासी संदेश यादव ने बताया कि करीब 15 दिनों से बाढ़ का पानी परेशानी का कारण बना हुआ है। नाव की संख्या कम होने से जरूरी काम के लिए बाहर निकलना भी मुश्किल है।
- प्रभु यादव ने बताया कि रात में कई परिवार मोबाइल की रोशनी में खाना बनाने को मजबूर हैं। बिजली और मोबाइल चार्जिंग की सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को बकुल्हा रेलवे स्टेशन तक जाना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से नाव, रोशनी, राहत सामग्री और शौच की व्यवस्था कराने की मांग की।
तेतरी देवी ने बताया कि घर में पानी भरने के बाद परिवार के साथ पुरानी रेलवे लाइन पर रहना पड़ रहा है। शौच के लिए भी कोई उचित स्थान नहीं है। बाढ़ के बीच महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
सुनैना देवी ने बताया कि हर साल बाढ़ में घर छोड़कर ऊंचे स्थान पर शरण लेनी पड़ती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि राहत सामग्री के साथ महिलाओं और परिवारों के लिए सुरक्षित शौच की व्यवस्था भी जरूरी है। ग्रामीणों ने तत्काल राहत, स्वास्थ्य सुविधा और मवेशियों के लिए चारे की मांग की है।
ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ीं, पानी के बीच रहने को मजबूर
सहतवार (बलिया)। सरयू नदी के जलस्तर बढ़ने से बीन बस्ती, चितविसाव चांदपुर, पुरानी बस्ती सहित दर्जनों बस्तियां पानी से घिर गई हैं। सबसे खराब स्थिति बिन बस्ती की है। पानी के बीच लोग रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों में जहरीले जीव-जंतुओं का भय भी बना हुआ है। रात में अंधेरा होने के कारण सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के घरों में आने की आशंका से लोग पूरी रात दहशत में रहते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रकाश, जनरेटर तथा सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम कराने की मांग की है।
24 घंटे में 9 सेमी सरयू का जलस्तर बढ़ने से सहमे लोग
बेल्थरारोड। पिछले कई दिनों से सरयू नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। लाल निशान से ऊपर बहने वाली नदी के जलस्तर में वृद्धि से तटवर्ती लोग बाढ़ की आशंका को लेकर सहम गए हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार रविवार की शाम चार बजे जलस्तर 64.53 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान से 52 सेंटीमीटर अधिक है। पिछले 24 घंटे के दौरान 9 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आयोग ने अगले 24 घंटे में आधा-आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में वृद्धि होने का अनुमान किया है।