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Auraiya News: महाविद्यालय की 1210 वर्गमीटर जमीन पर अवैध कब्जे की अपील खारिज
Sun, 06 Sep 2026 12:13 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 06 Sep 2026 12:13 AM IST
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औरैया। उमरी गांव में विवेकानंद ग्रामोद्योग महाविद्यालय दिबियापुर ने खलिहान की जमीन पर अवैध कब्जा किया था। इस मामले में जिलाधिकारी न्यायालय ने संस्था की अपील खारिज कर दी है। न्यायालय ने पूर्व तहसीलदार न्यायालय के 21 दिसंबर 2019 के बेदखली, क्षतिपूर्ति व निष्पादन शुल्क के आदेश को बरकरार रखा है।
गाटा संख्या 1202 की 0.1210 हेक्टेयर भूमि पर महाविद्यालय का कब्जा था। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि खलिहान के रूप में दर्ज है। लेखपाल की रिपोर्ट के अनुसार, महाविद्यालय प्रबंधन ने इस हिस्से पर पक्की दीवार बनाकर कब्जा किया था। तहसीलदार न्यायालय ने धारा 67 के तहत कार्रवाई करते हुए बेदखली का आदेश दिया था। महाविद्यालय प्रबंधन ने करीब छह वर्ष बाद 19 सितंबर 2025 को अपील दाखिल की।
संस्था ने दावा किया कि उसका भवन गाटा संख्या 1199 पर स्थित है। गाटा संख्या 1202 पर उसका कोई कब्जा नहीं है। प्रबंधन ने 1988 के चकबंदी अधिकारी के कथित आदेश का भी हवाला दिया था। जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व ने अपील का विरोध करते हुए इसे कालबाधित बताया। जिलाधिकारी न्यायालय ने पत्रावली और साक्ष्यों का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि तहसीलदार न्यायालय ने महाविद्यालय को सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिया था। जांच में गाटा संख्या 1202 की भूमि पर 1210 वर्गमीटर हिस्से में कब्जे की पुष्टि हुई। संस्था कोई वैध साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिससे कब्जा वैध साबित हो सके।
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आदेश में महाविद्यालय के चकबंदी अधिकारी के कथित आदेश की छायाप्रति को फर्जी और कूटरचित माना गया। न्यायालय ने कहा कि इस दस्तावेज के आधार पर राजस्व अभिलेखों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। विवादित भूमि वर्तमान में भी खलिहान के रूप में दर्ज है। जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने प्रबंधक आनंद स्वरूप गुप्ता की 19 सितंबर 2025 को दाखिल अपील निरस्त कर दी।
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गाटा संख्या 1202 की 0.1210 हेक्टेयर भूमि पर महाविद्यालय का कब्जा था। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि खलिहान के रूप में दर्ज है। लेखपाल की रिपोर्ट के अनुसार, महाविद्यालय प्रबंधन ने इस हिस्से पर पक्की दीवार बनाकर कब्जा किया था। तहसीलदार न्यायालय ने धारा 67 के तहत कार्रवाई करते हुए बेदखली का आदेश दिया था। महाविद्यालय प्रबंधन ने करीब छह वर्ष बाद 19 सितंबर 2025 को अपील दाखिल की।
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संस्था ने दावा किया कि उसका भवन गाटा संख्या 1199 पर स्थित है। गाटा संख्या 1202 पर उसका कोई कब्जा नहीं है। प्रबंधन ने 1988 के चकबंदी अधिकारी के कथित आदेश का भी हवाला दिया था। जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व ने अपील का विरोध करते हुए इसे कालबाधित बताया। जिलाधिकारी न्यायालय ने पत्रावली और साक्ष्यों का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि तहसीलदार न्यायालय ने महाविद्यालय को सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिया था। जांच में गाटा संख्या 1202 की भूमि पर 1210 वर्गमीटर हिस्से में कब्जे की पुष्टि हुई। संस्था कोई वैध साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिससे कब्जा वैध साबित हो सके।
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आदेश में महाविद्यालय के चकबंदी अधिकारी के कथित आदेश की छायाप्रति को फर्जी और कूटरचित माना गया। न्यायालय ने कहा कि इस दस्तावेज के आधार पर राजस्व अभिलेखों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। विवादित भूमि वर्तमान में भी खलिहान के रूप में दर्ज है। जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने प्रबंधक आनंद स्वरूप गुप्ता की 19 सितंबर 2025 को दाखिल अपील निरस्त कर दी।