यूपी : हाईकोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे हादसे का लिया संज्ञान, कहा-स्लीपर बसों की रात में की जाए जांच
यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने रात में बसों की विशेष जांच के साथ सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले चालक, परिचालक और लाइसेंसधारक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने अधिकारियों को बसों की नियमित जांच तेज करने और विशेष रूप से रात में निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाली बसों के चालक और परिचालक के साथ ही लाइसेंसधारक के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तलब कर घटना और उसके बाद की गई कार्रवाई की जानकारी ली। कोर्ट ने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (एआईएस) का भी उल्लेख किया। इसके अनुसार स्लीपर बसों में चालक के केबिन और यात्रियों के हिस्से के बीच विभाजन, बस की ऊंचाई, आपातकालीन निकास द्वारों की संख्या और गलियारे के आकार से संबंधित तकनीकी मानकों का पालन किया जाना चाहिए।
गड़बड़ी पाए जाने पर करें सख्त कार्रवाई
स्वचालित आग बुझाने की व्यवस्था और यात्रियों के केबिन में आग पर काबू पाने के लिए उपयुक्त प्रणाली का भी प्रावधान होना चाहिए। चालक की नींद का पता लगाने वाली प्रणाली का उल्लेख भी मानकों में किया गया है। कोर्ट ने कहा यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों को चालक, परिचालक और बस के लाइसेंसधारक के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी होगी।
मुख्य सचिव ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वह मामले को व्यक्तिगत रूप से देखेंगे। बसों की संयुक्त जांच कराई जाएगी और रात में विशेष निरीक्षण किया जाएगा। हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग को हलफनामा दाखिल कर पिछले तीन वर्षों में प्रदेश से स्लीपर बसों को जारी किए गए परमिटों की संख्या बताने का निर्देश दिया है। अन्य कई जानकारी भी कोर्ट ने मांगी है। अगली सुनवाई 13 अक्तूबर 2026 को होगी। उस दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।