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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Janmashtami 2026: Shri Krishna Janmashtami celebrated with great fervor in the 'City of Confluence

जन्माष्टमी 2026 : संगमनगरी में धूमधाम से मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, सजाई गईं माखनचोर की झांकियां

Fri, 04 Sep 2026 07:47 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 04 Sep 2026 07:47 PM IST
सार

प्रयागराज में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आस्था, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक मंदिरों और घरों में आकर्षक सजावट की गई। कहीं बाल गोपाल की मनमोहक झांकी सजी तो कहीं कंस वध, माखन चोरी, रासलीला और पूतना वध जैसे कृष्ण चरित्रों का जीवंत चित्रण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता रहा। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मंदिरों में घंटे-घड़ियाल गूंज उठे और पूरा वातावरण ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से भक्तिमय हो गया।

 

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Janmashtami 2026: Shri Krishna Janmashtami celebrated with great fervor in the 'City of Confluence
प्रयागेश्वर जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथजी का भव्य शृंगार। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

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प्रयागराज में जन्माष्टमी के अवसर पर घरों से लेकर मठ-मंदिरों तक विशेष सजावट की गई। श्रद्धालुओं ने बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर पालने में विराजमान कराया। मंदिरों में फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक सजावट के बीच भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं की झांकियां सजाई गईं। माखन चोरी, कंस वध, राधा-कृष्ण की प्रेमलीला, गोपियों के साथ महारास, पूतना वध, गोचारण और बाल कृष्ण की लीलाओं पर आधारित झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। बच्चों में भी जन्माष्टमी को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया। अनेक बच्चे कृष्ण और राधा के स्वरूप में सजे नजर आए।

मध्यरात्रि में हुआ श्रीकृष्ण का जन्म

रात्रि में जैसे-जैसे भगवान के जन्म का निर्धारित मुहूर्त निकट आया, मंदिरों में भजन-कीर्तन और संकीर्तन का क्रम तेज होता गया। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की घोषणा के साथ ही शंख, घंटे और घड़ियाल बज उठे। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर बाल गोपाल का स्वागत किया। मंदिरों में ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’, ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ जैसे पारंपरिक भजनों और ‘भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला’ के गायन से वातावरण गूंजता रहा। श्रद्धालु भक्ति में झूमते और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते रहे।

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इस्कॉन से वेणी माधव मंदिर तक भक्ति की धारा

बलुआघाट स्थित इस्कॉन मंदिर, अलोपीबाग स्थित रूप गौड़ीय मठ, श्री मनकामेश्वर मंदिर, चौफटका स्थित अनंत माधव मंदिर, श्री राधाकृष्ण मंदिर और वेणी माधव मंदिर सहित शहर के अनेक मठ-मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री, फल, पंचामृत और विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए गए। बलुआघाट स्थित इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान और अभिषेक श्रद्धा के साथ किए जाने की परंपरा रही है।

दारागंज के वेणी माधव मंदिर की रही विशेष आभा

संगम नगरी की धार्मिक पहचान में श्री वेणी माधव मंदिर का विशेष स्थान है। प्रयागराज नगर निगम के अनुसार, दारागंज स्थित यह मंदिर प्रयाग के द्वादश माधव स्वरूपों में प्रमुख माना जाता है और यहां शालिग्राम शिला से निर्मित भगवान वेणी माधव की प्रतिमा विराजमान है। पौराणिक मान्यताओं में प्रयाग को भगवान विष्णु के माधव स्वरूपों की नगरी बताया गया है। जन्माष्टमी जैसे पर्व पर इन प्राचीन वैष्णव परंपराओं से जुड़े मंदिरों में विशेष पूजा का दृश्य प्रयागराज की धार्मिक विरासत को और जीवंत कर देता है।

इन इलाकों में भी सजीं कृष्ण की झांकियां

शहर के दारागंज, चौफटका, तेलियरगंज, सिविल लाइंस, कटरा, चौक, जॉनसेनगंज, मुट्ठीगंज, राजरूपपुर, धूमनगंज, नैनी, झूंसी, फाफामऊ, कीडगंज, रामबाग, सोहबतियाबाग, बाई का बाग, जार्जटाउन और टैगोर टाउन सहित विभिन्न इलाकों में स्थित मंदिरों और मठों में भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी झांकियां सजाई गईं।

जन्माष्टमी के बाद निकलती हैं रंग-बिरंगी चौकियां

प्रयागराज में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धार्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दधिकांदो उत्सव भी है। जिला प्रशासन की सांस्कृतिक जानकारी के अनुसार, जन्माष्टमी के बाद प्रयागराज में दधिकांदो मनाया जाता है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण, सुभद्रा और बलभद्र की सजीव झांकियों वाली रंगीन चौकियां निकाली जाती हैं। इस तरह जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि प्रयागराज की मठ-मंदिर परंपरा, लोक संस्कृति, भक्ति संगीत और सामुदायिक उत्सव का भी जीवंत स्वरूप बन जाती है।

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जन्माष्टमी :: इस्कॉन मंदिर में चार दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव

बलुआघाट स्थित इस्कॉन मंदिर में चार दिवसीय महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव छह सितंबर तक चलेगा। इस दाैरान एक लाख श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई है। मंदिर के महाप्रबंधक शिवकुमार कृष्ण दास ने बताया कि मंदिर में फूलों और फलों से सजावट की गई है। वृंदावन के सात प्रमुख मंदिरों पर आधारित झांकियां भी तैयार की गई हैं। पांच सितंबर को इस्कॉन के संस्थापकाचार्य श्रील प्रभुपाद का प्राकट्य दिवस व्यास पूजा महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन छह हजार भक्तों के लिए भंडारे की व्यवस्था रहेगी। इस दाैरान ब्रज उत्सव और बालक युवा महोत्सव भी होगा।

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