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प्रयागराज : संगमनगरी में टोंस और मंदाकिनी की बाढ़ का दिखा असर,  निचले इलाकों में घरों तक पहुंचा पानी

Fri, 04 Sep 2026 02:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 04 Sep 2026 02:16 PM IST
सार

टोंस और मंदाकिनी नदियों में आई बाढ़ का असर अब गंगा और यमुना के जलस्तर पर दिखाई देने लगा है। सहायक नदियों से लगातार आ रहे पानी ने जिले में बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण निचले इलाकों के घरों में पानी पहुंच गया है।

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Impact of flooding in the Tons and Mandakini rivers visible in the 'City of Confluence
प्रयागराज में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

टोंस और मंदाकिनी नदियों में आई बाढ़ का असर अब गंगा और यमुना के जलस्तर पर दिखाई देने लगा है। सहायक नदियों से लगातार आ रहे पानी ने जिले में बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण निचले इलाकों के घरों में पानी पहुंच गया है। लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए मजबूर हैं। हालांकि, बृहस्पतिवार शाम से दोनों नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार थम गई जिससे फिलहाल कुछ राहत मिली है।

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शुक्रवार दोपहर एक बजे की बुलेटिन के अनुसार यमुना 82.42 मीटर और फाफामऊ में गंगा 82.99 मीटर पर दर्ज की गई। छतनाग में गंगा का जलस्तर 82 मीटर रहा, जबकि बक्शी बांध पर यह 82.18 मीटर दर्ज हुआ। गंगा-यमुना का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने के बाद थम गईं। जिले में चेतावनी का निशान 83.734 मीटर और खतरे का निशान 84.734 मीटर पर है।

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बाढ़ राहत केंद्रों में 197 लोगों ने ली शरण

गंगा-यमुना के जल स्तर में तेजी से बढ़ोतरी के कारण विस्थापितों की संख्या भी बढ़ने लगी है। अब तक 45 परिवारों के 197 लोगों ने बाढ़ राहत केंद्रों में शरण ली है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह के अनुसार, सदर तहसील के ऋषिकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 18 परिवारों के 67 सदस्यों, करछना के प्राथमिक विद्यालय खपटिया में 12 परिवारों के 30 सदस्यों और मेजा के प्राथमिक विद्यालय कोना में 15 परिवारों के 100 सदस्यों ने शरण ली है।

जलस्तर के साथ लोगों की मुसीबतें भी बढ़ीं

गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ ही नदी के किनारे रहने वाले लोगों की मुसीबतें भी बढ़ गई हैं। दारागंज में दशाश्वमेध घाट के पास रहने वाली पार्वती और माया ने बताया कि हमारे घरों में पानी पहुंच रहा है। रहने का कहीं ठिकाना नहीं बन पाया है। किसी तरह सामान बचा रहे हैं। हम लोग हर दिन कमाकर भोजन का प्रबंध करते हैं। बाढ़ की वजह से पर्याप्त कमाई भी नहीं हो रही है। कभी-कभी कोई राहत सामग्री दे जाता है। वहीं, दशाश्वमेध घाट के नजदीक रहने वाले आकाश निषाद बताते हैं कि घर डूब चुका है। ज्यादातर सामान सुरक्षित जगहों पर पहुंचा चुके हैं। नाव की व्यवस्था हो जाए तो आने-जाने में सहूलियत होगी। 

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बारिश से शहर के कई इलाकों में जलभराव, राहगीरों को हुई परेशानी

शहर में बृहस्पतिवार शाम हुई तेज बारिश के बाद शहर के विभिन्न इलाकों में जलभराव हो गया। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई। जलनिकासी व्यवस्था प्रभावित होने के कारण सड़कों पर पानी काफी देर तक जमा रहा। सिविल लाइंस, हनुमान मंदिर चौराहा और सीएमपी कॉलेज चौराहा जलभराव से प्रभावित हुए। अस्थायी बस अड्डे के पास, करेली और सीएमपी डॉट पुल के नीचे भी पानी भर गया। चौफटका और सुलेमसराय जैसे इलाकों में भी जलभराव देखा गया। डॉट पुल और निचले क्षेत्रों में अधिक पानी जमा होने से दोपहिया वाहन चालकों को विशेष दिक्कत हुई। कुछ स्थानों पर लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। प्रमुख मार्गों पर जलभराव के कारण यातायात की रफ्तार भी धीमी हो गई। 
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