{"_id":"6a9e3ca2e69141ccb20ac0f2","slug":"banks-slow-down-women-s-self-employment-only-2-544-shgs-get-loans-against-target-of-5-000-in-agra-2026-09-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"आधी आबादी के स्वरोजगार पर बैंक का ब्रेक: 5000 समूहों को लोन का लक्ष्य, अब तक सिर्फ 2544 को मंजूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आधी आबादी के स्वरोजगार पर बैंक का ब्रेक: 5000 समूहों को लोन का लक्ष्य, अब तक सिर्फ 2544 को मंजूरी
Mon, 07 Sep 2026 09:55 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 07 Sep 2026 09:55 AM IST
सार
ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजना में बैंक ऋण की सुस्त रफ्तार से स्वरोजगार के प्रयासों को झटका लग रहा है। 5000 महिला स्वयं सहायता समूहों को ऋण देने के लक्ष्य के मुकाबले 31 जुलाई तक सिर्फ 2544 समूहों के ऋण मंजूर हुए, जबकि 439 प्रस्ताव लंबित हैं।
विज्ञापन
ऋण
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें
आगरा में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और गरीबी मिटाने के लिए शुरू की गई दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों को बिना गारंटी ऋण देने में बैंक सुस्ती दिखा रहे हैं। इससे आधी आबादी के स्वरोजगार सृजन के सपनों पर ब्रेक लग रहा है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले में 5000 महिला स्वयं सहायता समूहों को ऋण देने का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके सापेक्ष 31 जुलाई 2026 तक बैंकों ने मात्र 2544 समूहों के ऋण स्वीकृत किए हैं। 439 प्रस्ताव अभी भी लंबित हैं। इस सुस्त रवैये पर नोडल विभाग ने विस्तृत चर्चा की आवश्यकता जताई है। रोजगार सृजन के इस लक्ष्य के प्रति बड़े बैंक भी गंभीर नहीं हैं।
बीती तिमाही में केनरा बैंक ने 1550 के सर्वाधिक लक्ष्य के सापेक्ष 1227 समूहों को ऋण स्वीकृत किया है। वहीं, देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 800 के लक्ष्य में से केवल 219 समूहों को ही ऋण दिया है। यूपी ग्रामीण बैंक भी 1200 के बड़े लक्ष्य के सामने मात्र 502 समूहों को ही ऋण बांट सका है।
विज्ञापन
बैंक लिंकेज के जरिये समूह बैंक को यह साबित करता है कि वह वित्तीय रूप से अनुशासित है। ऋण प्राप्ति के लिए समूह का कम से कम 6 महीने सक्रिय होना और नियमित बैठक, नियमित बचत, आंतरिक लेनदेन, समय पर कर्ज वापसी और सही हिसाब-किताब के पांच सूत्रों का पालन करना अनिवार्य है।
बिना गारंटी 1 से 10 लाख रुपए तक ऋण
नियमों के अनुसार पहले वर्ष में समूह की कुल बचत का 6 गुना या न्यूनतम 1 लाख रुपये (जो भी अधिक हो) का ऋण स्वीकृत किया जाता है। बेहतर प्रदर्शन पर बाद के वर्षों में इसे बढ़ाकर 3 लाख रुपये, 5 लाख रुपये या उससे अधिक कर दिया जाता है।
योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि गाइडलाइन के अनुसार, 10 लाख रुपये तक के ऋण प्रस्ताव पर बैंकों की ओर से किसी भी प्रकार की कोलेटरल (गिरवी) या मार्जिन मनी नहीं मांगी जाती है। इससे महिलाएं आसानी से अपना लघु उद्योग शुरू कर सकती हैं।
बैंकों से मांगा जाएगा जवाब
स्वयं सहायता समूहों की बैंक लिंकेज प्रगति बढ़ाई जाएगी। शत-प्रतिशत पात्र समूहों को ऋण से जोड़ेंगे। इस कार्य में लापरवाही बरतने वाले बैंकों से जवाब मांगा जाएगा।- प्रतिभा सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
विज्ञापन
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले में 5000 महिला स्वयं सहायता समूहों को ऋण देने का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके सापेक्ष 31 जुलाई 2026 तक बैंकों ने मात्र 2544 समूहों के ऋण स्वीकृत किए हैं। 439 प्रस्ताव अभी भी लंबित हैं। इस सुस्त रवैये पर नोडल विभाग ने विस्तृत चर्चा की आवश्यकता जताई है। रोजगार सृजन के इस लक्ष्य के प्रति बड़े बैंक भी गंभीर नहीं हैं।
विज्ञापन
बीती तिमाही में केनरा बैंक ने 1550 के सर्वाधिक लक्ष्य के सापेक्ष 1227 समूहों को ऋण स्वीकृत किया है। वहीं, देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 800 के लक्ष्य में से केवल 219 समूहों को ही ऋण दिया है। यूपी ग्रामीण बैंक भी 1200 के बड़े लक्ष्य के सामने मात्र 502 समूहों को ही ऋण बांट सका है।
विज्ञापन
बैंक लिंकेज के जरिये समूह बैंक को यह साबित करता है कि वह वित्तीय रूप से अनुशासित है। ऋण प्राप्ति के लिए समूह का कम से कम 6 महीने सक्रिय होना और नियमित बैठक, नियमित बचत, आंतरिक लेनदेन, समय पर कर्ज वापसी और सही हिसाब-किताब के पांच सूत्रों का पालन करना अनिवार्य है।
बिना गारंटी 1 से 10 लाख रुपए तक ऋण
नियमों के अनुसार पहले वर्ष में समूह की कुल बचत का 6 गुना या न्यूनतम 1 लाख रुपये (जो भी अधिक हो) का ऋण स्वीकृत किया जाता है। बेहतर प्रदर्शन पर बाद के वर्षों में इसे बढ़ाकर 3 लाख रुपये, 5 लाख रुपये या उससे अधिक कर दिया जाता है।
योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि गाइडलाइन के अनुसार, 10 लाख रुपये तक के ऋण प्रस्ताव पर बैंकों की ओर से किसी भी प्रकार की कोलेटरल (गिरवी) या मार्जिन मनी नहीं मांगी जाती है। इससे महिलाएं आसानी से अपना लघु उद्योग शुरू कर सकती हैं।
बैंकों से मांगा जाएगा जवाब
स्वयं सहायता समूहों की बैंक लिंकेज प्रगति बढ़ाई जाएगी। शत-प्रतिशत पात्र समूहों को ऋण से जोड़ेंगे। इस कार्य में लापरवाही बरतने वाले बैंकों से जवाब मांगा जाएगा।- प्रतिभा सिंह, मुख्य विकास अधिकारी