हिमाचल: हाईकोर्ट के फैसले पर टिका सीबीएसई सब काडर भर्तियों का भविष्य, जानें पूरा मामला
सीबीएसई सब काडर के तहत हुई नियुक्तियों और चयन प्रक्रियाओं पर अब हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अंतिम फैसले की छाया पड़ गई है।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में सीबीएसई सब काडर के तहत हुई नियुक्तियों और चयन प्रक्रियाओं पर अब हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अंतिम फैसले की छाया पड़ गई है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने प्रदेशभर में नियुक्त या चयनित अभ्यर्थियों को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया है कि उनकी नियुक्तियां फिलहाल जारी रहेंगी, लेकिन उनका भविष्य हाईकोर्ट में लंबित मामले के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी कार्यालय आदेश में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सीडब्ल्यूपी संख्या 14833/2026 मामले में 26 अगस्त 2026 को दिए अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है कि विवादित नीति, आरएंडपी नियमों तथा उसके तहत की गई किसी भी नियुक्ति या नियुक्ति प्रक्रिया से किसी भी व्यक्ति के पक्ष में कोई स्थायी या न्यायसंगत अधिकार उत्पन्न नहीं होगा। इन नियुक्तियों को याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन माना जाएगा।
नियुक्ति हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी
निदेशालय के आदेश के अनुसार सीबीएसई सब काडर नीति के तहत नियुक्त या अनुबंधित सभी अभ्यर्थियों को यह जानकारी देना अनिवार्य किया गया है कि उनकी नियुक्ति हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। यदि अदालत भविष्य में इस नीति को लेकर कोई अलग निर्णय देती है तो उसका सीधा प्रभाव इन नियुक्तियों पर पड़ सकता है। शिक्षा विभाग ने सभी उपनिदेशकों और सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि वे संबंधित अभ्यर्थियों तक यह आदेश तत्काल पहुंचाना सुनिश्चित करें।
यह है मामला
प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीबीएसई सब काडर नीति लागू की है। इसके तहत विभिन्न विषयों के शिक्षकों और अन्य पदों पर विशेष भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि, इस नीति और भर्ती नियमों को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिसके बाद अदालत ने नियुक्तियों पर रोक नहीं लगाई, लेकिन उन्हें अंतिम निर्णय के अधीन रखने के निर्देश दिए। शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद सीबीएसई सब काडर के तहत नियुक्त और चयनित अभ्यर्थियों में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
विभाग ने मांगा सख्त अनुपालन
स्कूल शिक्षा निदेशक की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कदम हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन के लिए उठाया गया है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को आदेश की प्रति सभी प्रभावित अभ्यर्थियों तक पहुंचाने और इसकी रिपोर्ट सुनिश्चित करने को कहा है।