निकाय चुनाव: केकड़ी में कांग्रेस का पलड़ा भारी, 1075 वोट ज्यादा फिर भी बहुमत से एक कदम दूर; भाजपा 18 पर सिमटी
केकड़ी नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस 20 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और बहुमत के आंकड़े से महज एक सीट दूर है। कांग्रेस को कुल 13,361 वोट मिले, जो भाजपा के 12,286 वोट से 1,075 अधिक हैं। भाजपा ने 18 सीटें और आरएलपी ने दो सीटें जीती हैं।
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केकड़ी नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस सत्ता की दहलीज पर पहुंच गई है। 40 वार्डों वाली नगरपालिका में कांग्रेस ने 20 सीटों पर जीत दर्ज की है और बहुमत के जादुई आंकड़े से महज एक सीट दूर है। चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को भाजपा उम्मीदवारों की तुलना में कुल 1075 वोट अधिक मिले। कांग्रेस को कुल 47.51 प्रतिशत वोट मिले, जबकि भाजपा के खाते में 43.69 प्रतिशत वोट आए। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने दो वार्डों में जीत दर्ज की है।
28,120 मतदाताओं ने किया मतदान
केकड़ी नगरपालिका क्षेत्र में कुल 35,829 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 28,120 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। कांग्रेस को कुल 13,361 वोट मिले और उसके 20 प्रत्याशी विजयी रहे। भाजपा को 12,286 वोट मिले और उसे 18 सीटों पर जीत मिली। वहीं आरएलपी को 1,629 वोट मिले और उसके दो प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। निर्दलीय प्रत्याशियों को कुल 622 वोट मिले, जबकि 222 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। वोटों के आंकड़ों से साफ है कि कांग्रेस भले ही बहुमत से एक सीट दूर रह गई हो, लेकिन कुल मतों के मामले में उसने भाजपा पर बढ़त बनाई है।
वार्ड एक में सबसे बड़ी जीत, वार्ड 20 में सबसे करीबी मुकाबला
चुनाव में सबसे बड़ी जीत वार्ड संख्या एक में भाजपा प्रत्याशी केदार शर्मा के नाम रही। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी प्रकाश तेली को 431 वोटों के बड़े अंतर से हराया। केदार शर्मा को 580 वोट मिले, जबकि प्रकाश तेली को 149 वोट प्राप्त हुए।
वहीं सबसे कम अंतर से जीत वार्ड संख्या 20 में भाजपा की पूजा सोनी ने दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी प्रीति जैन को महज तीन वोटों के अंतर से हराया। पूजा सोनी को 384 और प्रीति जैन को 381 वोट मिले।
जाट समाज के सबसे ज्यादा 9 पार्षद
केकड़ी नगरपालिका चुनाव में इस बार जाट समाज के नौ पार्षद निर्वाचित हुए हैं। इसके अलावा ब्राह्मण समाज के छह, जैन-अग्रवाल समाज के चार और खटीक समाज के तीन पार्षद चुने गए हैं। माली, रेगर और वैष्णव समाज के दो-दो पार्षद निर्वाचित हुए हैं। वहीं धोबी, सिंधी, विजयवर्गीय, नायक, तेली, सरावगी जैन, ओसवाल जैन, वैष्णव अग्रवाल, कोली, मुस्लिम, गुर्जर और सोनी समाज से एक-एक पार्षद निर्वाचित हुआ है। 40 नवनिर्वाचित पार्षदों में 25 पुरुष और 15 महिलाएं हैं।
66 साल की सलमा बेगम सबसे उम्रदराज, दो 25 वर्षीय पार्षद सबसे युवा
नवनिर्वाचित पार्षदों में वार्ड संख्या 30 से कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करने वाली 66 वर्षीय सलमा बेगम सबसे उम्रदराज पार्षद बनी हैं। वहीं वार्ड संख्या दो से भाजपा के टिकट पर विजयी 25 वर्षीय अरविंद कांसोटिया और वार्ड संख्या 32 से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित 25 वर्षीय दिलखुश चौधरी सबसे कम उम्र के पार्षद बने हैं।
पुराने चेहरों की भी नगरपालिका में वापसी
चुनाव में कई अनुभवी चेहरों ने भी जीत दर्ज कर नगरपालिका में वापसी की है। वार्ड संख्या आठ से भाजपा के राजेंद्र चौधरी, वार्ड संख्या 19 से कांग्रेस की पूजा व्यास और वार्ड संख्या 31 से भाजपा के कैलाश चौधरी इससे पहले वाले बोर्ड में भी पार्षद रह चुके हैं। वहीं वार्ड संख्या 25 से कांग्रेस के टिकट पर जीतने वाले अनिल मित्तल इससे पहले के कार्यकाल में नगरपालिका अध्यक्ष रह चुके हैं। इनके अलावा निवर्तमान पार्षद मंजू बज के पति भंवर बज वार्ड 22 से, आसिफ हुसैन की मां सलमा बेगम वार्ड 30 से, रामराज शर्मा की पत्नी सीमा शर्मा वार्ड 33 से और उषा जैन के पति रितेश जैन वार्ड 35 से पार्षद निर्वाचित हुए हैं।
13 प्रत्याशी नहीं बचा पाए जमानत
चुनाव परिणाम के अनुसार 13 प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। इनमें आरएलपी का एक प्रत्याशी, भाजपा का एक प्रत्याशी और 11 निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। जिन प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई, उनमें वार्ड पांच के राजेंद्र चौधरी (आरएलपी), वार्ड 16 के अमरचंद टेलर (निर्दलीय), वार्ड 17 के अरिहंत तेजस्वी और जितेंद्र बोयत (निर्दलीय), वार्ड 18 के ओमप्रकाश माली (निर्दलीय), वार्ड 20 की नीता विजय (निर्दलीय), वार्ड 21 के सिराज अहमद (निर्दलीय), वार्ड 30 की गुलनाज बानो (भाजपा) और नाजमीन बानो (निर्दलीय), वार्ड 31 के राधेश्याम माहेश्वरी (निर्दलीय), वार्ड 38 के राजू चौधरी (निर्दलीय) तथा वार्ड 40 के गणेश तारावत और मनीष वर्मा (दोनों निर्दलीय) शामिल हैं। अब कांग्रेस के सामने नगरपालिका में बोर्ड बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा पूरा करने की चुनौती है। कांग्रेस 20 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि भाजपा के पास 18 पार्षद हैं। आरएलपी के दो पार्षदों की भूमिका भी आगे अहम हो सकती है।