आईफोन डुओ बनाम गैलेक्सी जेड फोल्ड 8: क्या एपल तोड़ पाएगा सैमसंग की बादशाहत, कौन जीतेगा फोल्डेबल फोन की जंग?
करीब 3 लाख रुपये के आईफोन डुओ की एंट्री से भारत के फोल्डेबल बाजार में मुकाबला नया रूप ले चुका है। सैमसंग के पास ज्यादा मॉडल और बेहतर कीमत का फायदा है, जबकि एपल अपने प्रीमियम ग्राहकों और मजबूत इकोसिस्टम के जरिए अलग जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या भारत में एपल फोल्डेबल सेगमेंट में सैमसंग की पकड़ को कमजोर कर सकता है?

भारत में फोल्डेबल फोन की दुनिया अब तक काफी हद तक सैमसंग के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन अब एपल ने इस खेल में एंट्री कर दी है। कंपनी ने करीब 3 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ आईफोन डुओ पेश किया है। इसके बाद अब सवाल उठने लगें हैं कि क्या एपल का यह प्रीमियम फोल्डेबल फोन सैमसंग की मजबूत पकड़ को चुनौती दे पाएगा?
दिलचस्प बात यह है कि दोनों कंपनियां इस बाजार को बिल्कुल अलग तरीके से देख रही हैं। सैमसंग के पास कई मॉडल और अलग-अलग कीमतों के विकल्प हैं, जबकि एपल ने सीधे सबसे महंगे सेगमेंट को चुना है। ऐसे में दोनों कंपनियों की टक्कर सिर्फ दो फोन की नहीं, बल्कि दो अलग रणनीतियों की भी है। आइए जानते हैं क्या एपल अपने फोल्डेबल फोन के साथ सैमसंग का पासा पलट सकती है, या इस खेल में सैमसंग की बादशाहत बरकरार रहेगी।कीमत में ही दिख रही है दोनों कंपनियों की रणनीति
- एपल ने 10 सितंबर को आईफोन डुओ (iPhone Duo) को भारत में पेश किया। कंपनी ने आईफोन डुओ की 256 जीबी मॉडल की कीमत 2,99,900 रुपये रखी है। वहीं, 512 जीबी मॉडल 3,24,900 रुपये, 1 टीबी मॉडल 3,74,900 रुपये और 2 टीबी मॉडल 4,49,900 रुपये का है। दूसरी तरफ, सैमसंग गैलेक्सी जेड फोल्ड8 (Samsung Galaxy Z Fold 8) की शुरुआती कीमत 1,79,999 रुपये है। दोनों फोन की शुरुआती कीमत में करीब 1.2 लाख रुपये का अंतर है।
- यह अंतर सिर्फ कीमत का नहीं है, बल्कि दोनों कंपनियों के बाजार को लेकर नजरिए को भी दिखाता है। सैमसंग लंबे समय से फोल्डेबल फोन के अलग-अलग मॉडल और कीमतों के साथ ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। जबकि, एपल ने शुरुआत से ही अपने फोन को बेहद प्रीमियम सेगमेंट में रखा है।
- सैमसंग ने भारत में फोल्डेबल फोन का कारोबार 2019 में शुरू किया था। इन वर्षों में कंपनी ने फोल्ड और फ्लिप सीरीज के कई मॉडल पेश किए। इस वजह से उसे इस बाजार की समझ और ब्रांड वैल्यू दोनों का फायदा मिल रहा है।

बढ़ सकती है फोल्डेबल फोन की हिस्सेदारी
- आईडीसी के मुताबिक, 2025 में भारत में करीब 6.26 लाख फोल्डेबल फोन की शिपमेंट हुई थी। इसकी तुलना में देश में कुल स्मार्टफोन शिपमेंट करीब 15.2 करोड़ यूनिट रही। यानी फोल्डेबल फोन अभी कुल बाजार का छोटा हिस्सा हैं।
- इसके बावजूद इस सेगमेंट की वृद्धि तेज है। आईडीसी का अनुमान है कि 2026 में कुल स्मार्टफोन बाजार 15 से 17 फीसदी तक घट सकता है, जबकि फोल्डेबल फोन की शिपमेंट 25 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 8 लाख यूनिट से ऊपर जा सकती है। काउंटरपॉइंट रिसर्च भी आने वाले वर्षों में इस बाजार के तेजी से बढ़ने का अनुमान लगा रहा है।
- यही वह जगह है जहां एपल की एंट्री महत्वपूर्ण हो जाती है। विश्लेषकों का मानना है कि आईफोन डुओ फोल्डेबल फोन में उन ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ा सकता है, जो अभी तक इस श्रेणी से दूर रहे हैं। टेकआर्क के विश्लेषक फैसल कावूसा के अनुसार, एपल की एंट्री बाजार में करीब 10 फीसदी अतिरिक्त वृद्धि ला सकती है।

सैमसंग के पास बढ़त, एपल के पास अलग रणनीति
- फोल्डेबल बाजार में सैमसंग की सबसे बड़ी ताकत उसका पोर्टफोलियो है। कंपनी के पास अलग-अलग कीमतों में फोल्ड और फ्लिप मॉडल हैं। रीन्यूड और एक्सचेंज जैसे विकल्प भी महंगे फोन को खरीदना आसान बना देते हैं।
- एपल फिलहाल इन रास्तों के बजाय ब्रांड और इकोसिस्टम की ताकत पर ज्यादा भरोसा कर रहा है। आईफोन डुओ की ऊंची कीमत से संकेत मिलता है कि कंपनी अभी बड़ी संख्या में फोन बेचने के बजाय खास प्रीमियम ग्राहकों को टार्गेट कर रही है।
- इसमें एपल को अपने मौजूदा आईफोन ग्राहकों का फायदा मिल सकता है। ऐसे ग्राहक, जो पहले से एपल के इकोसिस्टम में हैं, नया उत्पाद खरीदने के लिए दूसरी कंपनियों के ग्राहकों की तुलना में ज्यादा तैयार हो सकते हैं। टेक्नोलॉजी के शौकीन और नए उत्पादों पर खर्च करने वाले ग्राहक भी आईफोन डुओ के शुरुआती खरीदार बन सकते हैं।
- हालांकि, करीब 3 लाख रुपये की कीमत एपल के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी है। भारत में बहुत से ग्राहक फोल्डेबल फोन खरीदते समय ईएमआई, एक्सचेंज और ऑफर देखते हैं। इस मामले में सैमसंग के पास फिलहाल ज्यादा विकल्प हैं।
- काउंटरपॉइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक का मानना है कि सैमसंग की कीमत, बड़ा पोर्टफोलियो और खरीदारी के अलग-अलग विकल्प उसे बढ़त देते रहेंगे। इसलिए पहले साल में एपल के लिए सैमसंग को पीछे छोड़ना आसान नहीं होगा। फिर भी आईफोन डुओ की सफलता का पैमाना सिर्फ बिक्री नहीं होगा। अगर एपल अपने प्रीमियम ग्राहकों के बीच फोल्डेबल फोन को लोकप्रिय बना पाता है, तो वह इस सेगमेंट में एक नई श्रेणी तैयार कर सकता है।
फोल्डेबल बाजार में किसकी होगी बादशाहत?
- आने वाले समय में भारत के फोल्डेबल बाजार में शायद एक ब्रांड की हिस्सेदारी दूसरे में सीधे तौर पर जाती न दिखे। इसके बजाए सैमसंग की रणनीति कम कीमत और ज्यादा मॉडल के जरिए बड़े ग्राहक वर्ग को जोड़ने पर हो सकती है, जबकि एपल बेहद प्रीमियम सेगमेंट पर ध्यान बढ़ा सकती है।
- एपल की मौजूदगी का एक बड़ा फायदा पूरे बाजार को मिल सकता है। अब फोल्डेबल फोन को सिर्फ एंड्रॉयड की तकनीक के तौर पर देखने की धारणा कमजोर हो सकती है। आईफोन डुओ अगर प्रीमियम खरीदारों के बीच सफल होता है, तो दूसरे ग्राहक भी इस सेगमेंट को आजमाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
- इस लिहाज से फिलहाल सैमसंग के पास स्पष्ट बढ़त है, लेकिन एपल ने मुकाबले का तरीका बदल दिया है। आने वाले महीनों में सबसे दिलचस्प बात यह होगी कि भारत के ग्राहक करीब 3 लाख रुपये के एपल फोल्डेबल फोन को कितना स्वीकार करते हैं और क्या इसकी एंट्री पूरे बाजार को उम्मीद से ज्यादा बड़ा बना देगी?
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