राजगढ़: दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर खिलचीपुर में अनिश्चितकालीन हड़ताल, 140 से ज्यादा डेयरियों का कारोबार बंद
खिलचीपुर में दूध की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर दूध विक्रेताओं और दुग्ध उत्पादक किसानों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की 140 से अधिक डेयरियां बंद रहीं। आंदोलनकारियों ने दूध के दाम बढ़ाने की मांग रखी।
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दूध की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर खिलचीपुर में दूध विक्रेताओं और दुग्ध उत्पादक किसानों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। आंदोलन के पहले ही दिन इसका सीधा असर शहर की दूध आपूर्ति पर दिखाई दिया। शहर की करीब 40 डेयरियों के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की 100 से अधिक डेयरियों में कारोबार बंद रहा। सुबह नियमित रूप से दूध लेने वाले लोगों को कई स्थानों से खाली हाथ लौटना पड़ा।
दूध कारोबार से जुड़े संगठन के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण सुबह झालावाड़ नाके के आसपास जमा हुए। यहां उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। आंदोलन के चलते ग्रामीण क्षेत्रों से शहर की ओर आने वाली दूध की सप्लाई प्रभावित रही। इससे सुबह दूध लेने निकले लोगों को अलग-अलग स्थानों पर भटकना पड़ा।
दूध उत्पादकों का कहना है कि पशुओं के चारे, देखभाल और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला दूध का भाव उस अनुपात में नहीं बढ़ा है। वर्तमान में करीब 9 रुपए फैट के आधार पर भुगतान होने की बात कही जा रही है। संगठन इसे बढ़ाकर 12 रुपए फैट करने की मांग कर रहा है।
इसके अलावा बाजार में गाय के दूध की कीमत 80 रुपए और भैंस के दूध की कीमत 100 रुपए प्रति लीटर किए जाने की मांग भी रखी गई है। किसानों और दूध कारोबारियों का कहना है कि मौजूदा दरों पर दूध उत्पादन करना लगातार महंगा होता जा रहा है।
हड़ताल का निर्णय अचानक नहीं लिया गया। मंगलवार को दूध विक्रेताओं और किसानों ने पहले नाहरदा मंदिर पर बैठक कर अपनी मांगों पर चर्चा की। इसके बाद रैली के रूप में एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया। संगठन के प्रतिनिधियों ने बाद में खिलचीपुर थाने पहुंचकर टीआई कमल सिंह गेहलोत को भी अपनी मांगों से अवगत कराया। इसी दौरान दूध की बिक्री और सप्लाई रोकने की घोषणा की गई।
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आंदोलनकारियों ने हड़ताल के दौरान होटल और पैकिंग वाले दूध की बिक्री का विरोध करने की बात कही है। संगठन से जुड़े कुछ सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि हड़ताल के दौरान बाहर से दूध लाकर बिक्री की जाती है तो उसका विरोध किया जाएगा। हालांकि पुलिस ने आंदोलनकारियों को स्पष्ट रूप से कानून हाथ में नहीं लेने की हिदायत दी है।
टीआई कमल सिंह गेहलोत ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों से शहर में दूध बेचने आने वाले लोगों के साथ किसी तरह की जोर-जबरदस्ती, मारपीट या नुकसान नहीं होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति द्वारा कानून व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हड़ताल में शामिल संगठन ने अपने स्तर पर नियम तय करते हुए आंदोलन का साथ नहीं देने वालों पर आर्थिक दंड लगाने की बात कही है। गांव से दूध लाकर शहर में बेचने पर 11 हजार रुपए और संगठन की अनुमति के बिना डेयरी संचालित करने पर 21 हजार रुपए के जुर्माने की चेतावनी दी गई है।
गणेश उत्सव के दौरान दूध की मांग सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है। ऐसे में हड़ताल लंबी खिंचने पर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ होटल, चाय दुकानदारों और मिठाई कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आने वाले श्राद्ध पक्ष और अन्य त्योहारों में भी दूध की खपत बढ़ने की संभावना है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और दूध संगठन के बीच बातचीत से गतिरोध कब खत्म होता है।
