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बीयू के छात्रावासों की बदलेगी सूरत?: वर्षोंं से चली आ रही समस्याओं पर अब कुलगुरु सख्त, खराब कमरे होंगे दुरुस्त
Sat, 31 Oct 2026 03:49 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 31 Oct 2026 03:49 PM IST
सार
बरकतुल्ला विश्वविद्यालय के छात्रावासों में लंबे समय से सामने आ रही बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं के बीच प्रशासन ने सुधार की पहल की है। खराब कमरों की मरम्मत, वाटर कूलर, बिजली, वाई-फाई और साफ-सफाई दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। निवेदिता कन्या छात्रावास के अनुपयोगी कमरों को भी छात्राओं के लिए तैयार किया जाएगा।
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बीयू भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बरकतुल्ला विश्वविद्यालय के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं नई नहीं हैं। कभी पीने के साफ पानी और खराब वाटर कूलर को लेकर शिकायतें सामने आईं तो कभी गंदगी, जर्जर कमरों, बंद लाइटों और भोजन व्यवस्था को लेकर विद्यार्थियों को विरोध करना पड़ा। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रावासों की व्यवस्थाएं सुधारने के लिए नए सिरे से कवायद शुरू की है। इसमें केवल भवनों की मरम्मत ही नहीं, बल्कि वार्डनों की जिम्मेदारी और विद्यार्थियों से सीधे संवाद को भी प्राथमिकता दी गई है। कुलगुरु प्रो. दीनदयाल बेदिया ने छात्रावासों के वार्डन, विश्वविद्यालय के अभियंताओं और अधीक्षकों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए हैं। खास बात यह है कि उन्होंने वार्डनों को विद्यार्थियों के साथ प्रशासनिक अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि अभिभावक की तरह व्यवहार करने को कहा है। विद्यार्थियों की शिकायतें सुनने और उनका समयबद्ध समाधान कराने पर जोर दिया गया है।
अब इन व्यवस्थाओं को सुधारने की तैयारी
कुलगुरु की बैठक के बाद छात्रावासों में मरम्मत और रखरखाव के काम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय के अभियंताओं को खिड़कियों की जालियां, वाटर कूलर, विद्युत उपकरण, वाई-फाई और अन्य जरूरी सुविधाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। कुलगुरु ने निवेदिता कन्या छात्रावास का निरीक्षण भी किया। यहां कुछ कमरे खराब स्थिति में मिले। उन्होंने अभियंता को इन कमरों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें उपयोग योग्य बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि मरम्मत के बाद इन कमरों को छात्राओं के आवंटन के लिए उपलब्ध कराया जा सके। इससे छात्रावास में मौजूद आवासीय क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।
वार्डन अब सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहेंगे
वार्डनों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बनाया गया
इस पहल में वार्डनों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। कुलगुरु ने निर्देश दिए हैं कि वार्डन विद्यार्थियों से लगातार संपर्क में रहें। उनकी परेशानियों को सुनें और समाधान के लिए तत्काल पहल करें। उनका कहना है कि छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थी अपने घर से दूर रहते हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षित और सहज माहौल देना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है।
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यह भी पढ़ें-भोपाल में खपने से पहले पकड़ा सात क्विंटल पनीर: जांच में पांचों नमूने हुए फेल, मुरैना तक पहुंची कार्रवाई
श्रमदान के जरिए साफ-सफाई बनाए रखने की अपील
छात्रावासों में कार्यरत कर्मचारियों से श्रमदान के जरिए साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की गई है। विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी बनाने पर भी जोर दिया गया है। अब इन निर्देशों के बाद असली चुनौती इन्हें जमीन पर उतारने की होगी। पेयजल, भोजन, सफाई और भवनों के रखरखाव जैसी समस्याएं पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं में कितना सुधार होता है और शिकायतों का समाधान कितनी तेजी से होता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
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अब इन व्यवस्थाओं को सुधारने की तैयारी
कुलगुरु की बैठक के बाद छात्रावासों में मरम्मत और रखरखाव के काम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय के अभियंताओं को खिड़कियों की जालियां, वाटर कूलर, विद्युत उपकरण, वाई-फाई और अन्य जरूरी सुविधाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। कुलगुरु ने निवेदिता कन्या छात्रावास का निरीक्षण भी किया। यहां कुछ कमरे खराब स्थिति में मिले। उन्होंने अभियंता को इन कमरों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें उपयोग योग्य बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि मरम्मत के बाद इन कमरों को छात्राओं के आवंटन के लिए उपलब्ध कराया जा सके। इससे छात्रावास में मौजूद आवासीय क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।
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वार्डन अब सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहेंगे
वार्डनों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बनाया गया
इस पहल में वार्डनों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। कुलगुरु ने निर्देश दिए हैं कि वार्डन विद्यार्थियों से लगातार संपर्क में रहें। उनकी परेशानियों को सुनें और समाधान के लिए तत्काल पहल करें। उनका कहना है कि छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थी अपने घर से दूर रहते हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षित और सहज माहौल देना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है।
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श्रमदान के जरिए साफ-सफाई बनाए रखने की अपील
छात्रावासों में कार्यरत कर्मचारियों से श्रमदान के जरिए साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की गई है। विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी बनाने पर भी जोर दिया गया है। अब इन निर्देशों के बाद असली चुनौती इन्हें जमीन पर उतारने की होगी। पेयजल, भोजन, सफाई और भवनों के रखरखाव जैसी समस्याएं पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं में कितना सुधार होता है और शिकायतों का समाधान कितनी तेजी से होता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
