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MP News: जाति सत्यापन समिति के सामने मंत्री बागरी ने दो घंटे रखा पक्ष, दस्तावेजों की जांच के बाद आएगा फैसला

Mon, 06 Jul 2026 08:37 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Mon, 06 Jul 2026 08:37 PM IST
सार

मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में सोमवार को एससी छानबीन समिति के सामने दोनों पक्षों की सुनवाई हुई। उन्होंने करीब दो घंटे तक अपनी बात समिति के सामने रखी। वहीं, दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अब दस्तावेजों की जांच के बाद समिति अपना फैसला देंगी। 

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MP News: Minister Bagri presented his case before the Caste Verification Committee for two hours; the decision
राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश सरकार में नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र विवाद में सोमवार को अनुसूचित जाति (एससी) मामलों की छानबीन समिति के समक्ष सुनवाई हुई। समिति के सामने शिकायतकर्ता और मंत्री बागरी, दोनों पक्षों ने अपने-अपने दस्तावेज और तर्क प्रस्तुत किए। मंत्री बागरी ने करीब दो घंटे तक अपने पक्ष में प्रजेंटेशन दिया। सुनवाई के बाद समिति ने सभी दस्तावेज अपने परीक्षण के लिए सुरक्षित रख लिए हैं। अब समिति के अध्यक्ष गुलशन बामरा उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद निर्णय देंगे। 
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बागरी समाज का राजपूत में रोटी-बेटी का संबंध नहीं 
सुनवाई के दौरान प्रतिमा बागरी ने अपने पक्ष में विस्तृत प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) दिया और विभिन्न दस्तावेज समिति के समक्ष पेश किए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे रिकॉर्ड हैं, जो बागरी समाज के अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल होने का आधार प्रस्तुत करते हैं। सुनवाई के बाद मीडिया से चर्चा में प्रतिमा बागरी ने कहा कि बागरी समाज का क्षत्रिय (राजपूत) समाज से कोई रोटी-बेटी का संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बागरी समाज को राजपूत समाज का हिस्सा बताकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को इस पर संदेह है तो प्रदेश के क्षत्रिय समाज से पूछा जा सकता है कि क्या वे स्वयं को बागरी लिखते हैं। उनके अनुसार बागरी समाज एक अलग समुदाय है और अनुसूचित जाति की सूची में शामिल है।
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समिति के सामने रखे दस्तावेजों के साथ एससी होने के सबूत
प्रतिमा बागरी ने बताया कि उन्होंने समिति के सामने दस्तावेजों के साथ अपने पक्ष के प्रमाण रखे हैं। उन्होंने अपने परिवार के राजनीतिक इतिहास का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जुगलकिशोर बागरी पांच बार विधायक रहे, जबकि महेंद्र बागरी और शिवदयाल बागरी भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों से विधायक चुने गए थे। उनका कहना था कि यदि बागरी समाज अनुसूचित जाति में शामिल नहीं होता, तो आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ना संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भी बागरी को आरक्षित सीट पर टिकट दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार वर्ष 1976 की अधिसूचना को मान्यता देती है और उन्होंने उसी के अनुरूप अपने दस्तावेज समिति के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। अब अंतिम निर्णय समिति को लेना है। 

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प्रदीप अहिरवार ने भी पेश किए राजपूत होने के प्रमाण 
वहीं, शिकायतकर्ता एवं कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने समिति के समक्ष दावा किया कि बागरी समुदाय अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है। उन्होंने अपने पक्ष में दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए समिति से शिकायत पर कार्रवाई की मांग की। अब दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के परीक्षण के बाद छानबीन समिति अपना फैसला सुनाएगी।
 
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