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बैतूल: अस्पताल में फर्जी डॉक्टर बनकर प्रसूताओं के परिजनों को ठगने वाला गिरफ्तार, दसवीं फेल का कारनामा
Wed, 28 Oct 2026 07:36 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 28 Oct 2026 07:36 PM IST
सार
बैतूल जिला अस्पताल में खुद को डॉक्टर बताकर प्रसूताओं के परिजनों से बेहतर इलाज और सीजर डिलीवरी के नाम पर रुपये ठगने के आरोप में पुलिस ने जितेंद्र खाकरे को गिरफ्तार किया है। आरोपी तीन से पांच हजार रुपये ऑनलाइन मंगवाता था। पुलिस ने सिम कार्ड और बेटिंग आईडी जब्त की है।
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पुलिस मामले की जांच में जुटी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बैतूल जिला अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं के स्वजनों को फोन पर खुद को डॉक्टर बताकर बेहतर इलाज के नाम पर ठगी करने वाले दसवीं फेल आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कोतवाली पुलिस ने आरोपी जितेंद्र खाकरे (30 वर्ष) को 27 अक्तूबर को पकड़ा और बुधवार को उसे अदालत में पेश किया। आरोपी प्रसूताओं की सीजर डिलीवरी अच्छी तरह कराने और बेहतर चिकित्सा सुविधा का भरोसा देकर परिजनों से तीन हजार से पांच हजार रुपये मांगता था। वह ठगी की यह राशि सीधे ऑनलाइन बेटिंग गेम से जुड़े खातों में भेजता था। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी के खिलाफ इंदौर और भोपाल के थानों में भी धोखाधड़ी के इसी तरह के मामले दर्ज हैं।
अस्पताल परिसर में रेकी और बेटिंग कनेक्शन
अस्पताल परिसर में आरोपी लगातार चक्कर लगाता था। वह अस्पताल की कैंटीन, प्रसूति कक्ष और ऑपरेशन थिएटर के आसपास घूमकर ऐसे परिवारों की पहचान करता था, जिनके मरीजों को सीजर डिलीवरी या बेहतर इलाज की जरूरत होती थी। इसके बाद आरोपी पीड़ितों से संपर्क करके खुद को डॉक्टर बताता और उन्हें भरोसे में लेता था। वह परिजनों से कहता था कि वह सीजर ऑपरेशन अच्छी तरह करवा देगा और टांके भी ठीक से लगवा देगा, जिससे आगे कोई परेशानी नहीं होगी। इसके बदले में वह तीन हजार से पांच हजार रुपये मांगता था। आरोपी पीड़ितों को क्यूआर कोड भेजता था, जिसके जरिये स्वजन फोन-पे या अन्य माध्यमों से ऑनलाइन भुगतान कर देते थे।
जिला अस्पताल में शिकायतें मिलने के बाद कोतवाली पुलिस ने भुगतान विवरण, मोबाइल नंबर और सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। पुलिस पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि पीड़ितों द्वारा भेजा गया पैसा लुधियाना और नोएडा के बैंक खातों में जा रहा था। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन बेटिंग गेम से जुड़े लेन-देन के लिए होता था। पुलिस ने आरोपी के पास से वह सिम कार्ड बरामद किया, जिसका उपयोग वह लोगों को फोन करने में करता था। इसके साथ ही पुलिस ने आरोपी की ऑनलाइन बेटिंग से जुड़ी आईडी भी जब्त की है।
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ये भी पढ़ें- एमपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 19 नवंबर से, बेहतर तैयारी के लिए पाठ्यक्रम और अंक विभाजन को ध्यान से समझें
पीड़ितों से वसूली और पुराने मामले
पुलिस पड़ताल में पीड़ितों से ठगी के कई मामले उजागर हुए हैं। विजय नागले की पत्नी मीरा नागले की सीजर डिलीवरी के दौरान आरोपी ने पांच हजार रुपये मांगे थे, जिसे उनके भाई ने जमा कराया था। एक अन्य महिला रेसु आरसे के परिजनों से आरोपी ने पांच हजार रुपये मांगे, जिनमें से उन्होंने तीन हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए थे। आरोपी ने कविता पिपरदे के परिजनों से छह हजार रुपये मांगकर तीन हजार रुपये ऐंठ लिए। वहीं एक अन्य मामले में बच्चे को हमीदिया अस्पताल भोपाल रेफर करने पर इलाज के नाम पर आरोपी ने 24 हजार रुपये की ठगी की।
बैतूल के अलावा इंदौर के संयोगितागंज थाने में साल 2025 में और भोपाल के कोहेफिजा थाने में साल 2026 में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए थे। इन शहरों में भी उसने ऑपरेशन, प्रसव और बेहतर इलाज के नाम पर लोगों से ऑनलाइन रुपये ऐंठे थे।
दुकान में घाटे से ठगी तक का सफर
पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी जितेंद्र खाकरे पहले मोबाइल फोन की दुकान चलाता था। दुकान में भारी नुकसान होने के कारण उसने व्यापार बंद कर दिया था। पुलिस को संदेह है कि कारोबार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए उसने अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को ठगने का रास्ता चुना।
अब कोतवाली पुलिस इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है कि आरोपी को अस्पताल में भर्ती गंभीर प्रसूताओं और उनके परिजनों की जानकारी किस प्रकार मिलती थी। वह खुद अस्पताल परिसर में घूमकर मरीजों के परिजनों की पहचान करता था या अस्पताल का कोई कर्मचारी उसे यह जानकारी मुहैया कराता था, पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है।
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अस्पताल परिसर में रेकी और बेटिंग कनेक्शन
अस्पताल परिसर में आरोपी लगातार चक्कर लगाता था। वह अस्पताल की कैंटीन, प्रसूति कक्ष और ऑपरेशन थिएटर के आसपास घूमकर ऐसे परिवारों की पहचान करता था, जिनके मरीजों को सीजर डिलीवरी या बेहतर इलाज की जरूरत होती थी। इसके बाद आरोपी पीड़ितों से संपर्क करके खुद को डॉक्टर बताता और उन्हें भरोसे में लेता था। वह परिजनों से कहता था कि वह सीजर ऑपरेशन अच्छी तरह करवा देगा और टांके भी ठीक से लगवा देगा, जिससे आगे कोई परेशानी नहीं होगी। इसके बदले में वह तीन हजार से पांच हजार रुपये मांगता था। आरोपी पीड़ितों को क्यूआर कोड भेजता था, जिसके जरिये स्वजन फोन-पे या अन्य माध्यमों से ऑनलाइन भुगतान कर देते थे।
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जिला अस्पताल में शिकायतें मिलने के बाद कोतवाली पुलिस ने भुगतान विवरण, मोबाइल नंबर और सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। पुलिस पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि पीड़ितों द्वारा भेजा गया पैसा लुधियाना और नोएडा के बैंक खातों में जा रहा था। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन बेटिंग गेम से जुड़े लेन-देन के लिए होता था। पुलिस ने आरोपी के पास से वह सिम कार्ड बरामद किया, जिसका उपयोग वह लोगों को फोन करने में करता था। इसके साथ ही पुलिस ने आरोपी की ऑनलाइन बेटिंग से जुड़ी आईडी भी जब्त की है।
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पीड़ितों से वसूली और पुराने मामले
पुलिस पड़ताल में पीड़ितों से ठगी के कई मामले उजागर हुए हैं। विजय नागले की पत्नी मीरा नागले की सीजर डिलीवरी के दौरान आरोपी ने पांच हजार रुपये मांगे थे, जिसे उनके भाई ने जमा कराया था। एक अन्य महिला रेसु आरसे के परिजनों से आरोपी ने पांच हजार रुपये मांगे, जिनमें से उन्होंने तीन हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए थे। आरोपी ने कविता पिपरदे के परिजनों से छह हजार रुपये मांगकर तीन हजार रुपये ऐंठ लिए। वहीं एक अन्य मामले में बच्चे को हमीदिया अस्पताल भोपाल रेफर करने पर इलाज के नाम पर आरोपी ने 24 हजार रुपये की ठगी की।
बैतूल के अलावा इंदौर के संयोगितागंज थाने में साल 2025 में और भोपाल के कोहेफिजा थाने में साल 2026 में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए थे। इन शहरों में भी उसने ऑपरेशन, प्रसव और बेहतर इलाज के नाम पर लोगों से ऑनलाइन रुपये ऐंठे थे।
दुकान में घाटे से ठगी तक का सफर
पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी जितेंद्र खाकरे पहले मोबाइल फोन की दुकान चलाता था। दुकान में भारी नुकसान होने के कारण उसने व्यापार बंद कर दिया था। पुलिस को संदेह है कि कारोबार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए उसने अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को ठगने का रास्ता चुना।
अब कोतवाली पुलिस इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है कि आरोपी को अस्पताल में भर्ती गंभीर प्रसूताओं और उनके परिजनों की जानकारी किस प्रकार मिलती थी। वह खुद अस्पताल परिसर में घूमकर मरीजों के परिजनों की पहचान करता था या अस्पताल का कोई कर्मचारी उसे यह जानकारी मुहैया कराता था, पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है।
