यूपी: विश्वास और विरासत...नौकरी से मंच तक आस्था का सफर, कोई 40 तो कोई 15 साल से निभा रहा रामलीला की परंपरा
लखनऊ की ऐतिहासिक रामलीलाओं में कलाकार नौकरी और कारोबार की जिम्मेदारियों के बीच दशकों से मंचन कर रहे हैं। कोई पुलिस इंस्पेक्टर है तो कोई बैंकर, जबकि कई कलाकारों को यह परंपरा परिवार से मिली है। 78 वर्षीय हेमा जोशी समेत ये कलाकार आस्था, साधना और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
विस्तार
रामलीला सिर्फ मंच पर निभाए जाने वाले किरदारों की कहानी नहीं, बल्कि उन लोगों की भी दास्तान है, जिन्होंने दशकों से इन पात्रों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना रखा है। राजधानी की ऐतिहासिक रामलीलाओं में राम, लक्ष्मण, हनुमान, रावण, दशरथ और मेघनाद की भूमिका निभाने वाले कलाकार दिन में नौकरी और कारोबार की जिम्मेदारियां संभालते हैं, जबकि रात होते ही मंच पर उतरकर आस्था के पात्रों को जीवंत कर देते हैं। किसी के लिए यह पारिवारिक विरासत है, तो किसी के लिए जीवन का अहम हिस्सा। इन कलाकारों की कहानियां बताती हैं कि जिम्मेदारियों के बीच भी परंपरा से जुड़ाव कैसे कायम रखा जा सकता है।
दशरथ से सुबाहु तक निभाए पांच किरदार
आलमबाग रेलवे रामलीला से जुड़े मृदुल मिश्रा करीब 15 वर्षों से मंच पर अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे हैं। वह दशरथ, बाली और बाणासुर जैसे किरदारों में नजर आ चुके हैं। इससे पहले उन्होंने राम और सुग्रीव की भूमिका भी निभाई। पेशे से बैंकर मृदुल ने नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच अभिनय का सिलसिला टूटने नहीं दिया। किरदार बदलते रहे, लेकिन रामलीला से उनका जुड़ाव बना रहा।
दिन में कानून-व्यवस्था, रात में रामलीला
147 साल पुरानी मौसमगंज रामलीला से शिवकुमार वर्मा का रिश्ता चार दशक से भी अधिक पुराना है। उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर शिवकुमार दिन में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालते हैं और रात में मंच पर दशरथ या मेघनाद बन जाते हैं। नौकरी और रामलीला के बीच उन्होंने ऐसा तालमेल बनाया कि दोनों जिम्मेदारियां साथ चलती रहीं। उनके परिवार में भी शिक्षा और तरक्की की मिसाल है। उनका बेटा इंजीनियर है, जबकि बेटी ने बीएससी की पढ़ाई पूरी की है।
पिता से मिली हनुमान की विरासत
मौसमगंज रामलीला में सुशील मिश्रा पिछले 38 वर्षों से हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं। उनके पिता भी इसी रामलीला में हनुमान का किरदार निभाते थे। करीब चार दशक पहले सुशील इस परंपरा से जुड़े और धीरे-धीरे यह भूमिका उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गई। दुकान चलाने के साथ उन्होंने रामलीला के लिए भी समय निकाला और परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं। आज उनकी बेटी बंगलूरू में मैनेजर है, जबकि बेटा एक अमेरिकी कंपनी में अच्छे पद पर कार्यरत है।
21 साल की उम्र में राम की भूमिका
21 वर्षीय अभिषेक त्रिपाठी के लिए रामलीला महज शौक नहीं, बल्कि परिवार से मिला जुड़ाव है। वह सर्जिकल इंप्लांट की बिक्री का काम करते हैं और मौसमगंज रामलीला में भगवान राम की भूमिका निभाते हैं। उनके पिता चार दशक से रामलीला से जुड़े हैं। अभिषेक मंचन से करीब 15 दिन पहले रोज रात आठ से 11 बजे तक अभ्यास करते हैं। उनके मुताबिक, राम की भूमिका निभाने से उनके व्यक्तित्व में भी बदलाव आया है।
78 साल की उम्र में भी मंच पर शबरी
78 वर्षीय हेमा जोशी जब मंच पर शबरी का किरदार निभाती हैं, तो दर्शकों के सामने यह पात्र जीवंत हो उठता है। वर्ष 1982 से रामलीला से जुड़ीं हेमा लोकगीत, पार्श्व गायन और मंचीय कार्यक्रमों में लंबा सफर तय कर चुकी हैं। मूल रूप से अल्मोड़ा की रहने वाली हेमा हिंदी की लेक्चरर रहीं और वहीं अपनी सेवाएं दीं। अब वह लखनऊ में रहती हैं। उनका बेटा आईआईएम से एमबीए करने के बाद बंगलूरू में एक बड़े पद पर कार्यरत है।
30 साल से रावण, 15 साल तक संभाली रामलीला की कमान
आलमबाग रेलवे रामलीला में वीरेंद्र कुमार शर्मा करीब तीन दशक से रावण का किरदार निभा रहे हैं। निजी कंपनी में नौकरी करने वाले वीरेंद्र के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन रामलीला से उनका रिश्ता नहीं टूटा।
उन्होंने करीब 15 वर्षों तक रामलीला के निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाली। अब वह एक बार फिर रावण की भूमिका निभा रहे हैं। परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ाया, जो आज दिल्ली की एक निजी कंपनी में अच्छे पद पर कार्यरत है।
इन कलाकारों की जिंदगी बताती है कि रामलीला केवल कुछ दिनों का आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों की साधना, पारिवारिक संस्कार और आस्था से जुड़ी परंपरा है। नौकरी, कारोबार और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच मंच के लिए समय निकालकर ये कलाकार हर साल इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।