यूपी: पुलिस से अदालत तक एक क्लिक पर मिलेगी केस की जानकारी, डिजिटल सिस्टम से जुड़ेंगे थाने और जेल
उत्तर प्रदेश में पुलिस थानों, फॉरेंसिक लैब, जेल और अदालतों को एक डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है। इससे केस से जुड़ी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी और जांच व सुनवाई में तेजी आएगी। ई-फॉरेंसिक व्यवस्था में अब तक 6334 मामले दर्ज हुए हैं। जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी बढ़ाई जा रही है।
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प्रदेश में अब पुलिस थानों से लेकर फॉरेंसिक लैब, जेल और अदालतों तक केस से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके लिए सभी विभागों को एक डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा रहा है।
इससे पुलिस की जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट, अभियोजन और अदालत की कार्रवाई के बीच तालमेल बेहतर होगा। केस से जुड़ी जानकारी के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार का मानना है कि इससे जांच और सुनवाई में लगने वाला समय भी कम होगा।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक नए आपराधिक कानूनों को लागू करने में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। 12 सितंबर 2026 के एनसीएल डैशबोर्ड पर प्रदेश को 85.99 अंक मिले हैं। 25 जून को यह स्कोर 78.13 था। यानी करीब ढाई महीने में 7.86 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। ई-साक्ष्य के इस्तेमाल में 10 में से 6.57 और ई-समन में 10 में से 6.74 अंक मिले हैं। एनएएफआईएस और न्याय श्रुति में प्रदेश को पूरे अंक मिले हैं।
ई-फॉरेंसिक पर 6334 केस मिले
फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जा रही है। जुलाई 2026 से शुरू ई-फॉरेंसिक 2.0 व्यवस्था में अब तक 6334 केस आए हैं। इनमें 535 मामलों की रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। इस सिस्टम से केस का पंजीकरण, आवंटन और रिपोर्ट भेजने का काम ऑनलाइन हो रहा है। प्रदेश की 12 फॉरेंसिक लैब के 96 अनुभागों के लिए 192 आधुनिक कंप्यूटर खरीदने की मांग की गई है।
थानों और जेलों में लगेंगे आधुनिक उपकरण
प्रदेश के 1982 पुलिस थानों और 18 फॉरेंसिक लैब में नेटवर्क कनेक्टिविटी बेहतर की जाएगी। पुलिस विभाग को कंप्यूटर, टैबलेट, प्रिंटर और क्यूआर कोड रीडर जैसे उपकरण दिए जा रहे हैं। जेलों में भी कंप्यूटर, स्कैनर और बायोमीट्रिक मशीनें लगाई जा रही हैं। जेलों और अदालतों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए 535 यूनिट की आपूर्ति और स्थापना पूरी हो चुकी है। इससे कैदियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कराने में सुविधा होगी।