यूपी: होमगार्डों को मिलेगा कैशलेस इलाज, खुलेंगे तीन नए निजी विवि, बदलेगा इस कस्बे का नाम; ये हैं बड़े फैसले
UP Cabinet: यूपी कैबिनेट की अहम बैठक सोमवार को हुई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले हुए। प्रदेश के होमगार्ड स्वयंसेवकों, अवैतनिक अधिकारियों और उनके आश्रित परिजनों को अब कैशलेस इलाज मिलेगा।
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विस्तार
प्रदेश सरकार ने सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में होमगार्ड स्वयंसेवकों, अवैतनिक अधिकारियों और उनके आश्रित परिजनों को परिवार कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को सालाना पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल छह दिसंबर को होमगार्ड दिवस के अवसर पर होमगार्ड जवानों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी। उसी के तहत तैयार प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत लाभार्थी राजकीय अस्पतालों के साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी उपचार करा सकेंगे। आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत आईपीडी उपचार के लिए भी कैशलेस सुविधा उपलब्ध होगी। योजना के संचालन पर प्रति होमगार्ड स्वयंसेवक एवं अवैतनिक अधिकारी तीन हजार रुपये वार्षिक प्रीमियम के हिसाब से करीब 35.50 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यय आने का अनुमान है। योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साची) के माध्यम से किया जाएगा।
एक लाख से अधिक होमगार्ड व उनके परिवार को होगा लाभ
डीजी होमगार्ड डीके ठाकुर ने बताया कि वर्तमान में 67 हजार होमगार्ड तैनात है। करीब 41 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। इस तरह आने वाले कुछ महीनों में होमगार्ड की संख्या 1.08 लाख तक हो जाएगी। कैशलेस की सुविधा इन होमगार्ड और उनके परिवारों को मिलेगी।
तीन नए निजी विवि खोलने की अनुमति
प्रदेश में कानपुर नगर, फतेहपुर व गाजियाबाद में एक-एक कुल तीन नए निजी विश्वविद्यालयों का संचालन नए सत्र 2026-27 से होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या 56 हो जाएगी।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 के तहत मूल्यांकन के बाद तीन संस्थाओं को आशय पत्र (एलओपी) जारी करने और संचालन प्राधिकार-पत्र जारी करने की सहमति दी गई है। इसके तहत प्रायोजक संस्था स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट, दिल्ली द्वारा कानपुर नगर के बिल्हौर में 51.739 एकड़ भूमि पर महर्षि महेश योगी एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है।
यह कृषि आधारित विश्वविद्यालय होगा, जो प्रदेश में कृषि शिक्षा व अनुसंधान को नई दिशा देगा। इसके लिए उप्र निजी विश्वविद्यालय (चतुर्थ संशोधन) अध्यादेश, 2026 प्रख्यापित किया जाएगा। इसी क्रम में प्रायोजक संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग सोसाइटी, गाजियाबाद द्वारा डासना में 26.2656 एकड़ भूमि पर अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय, गाजियाबाद की स्थापना की गई है। अब यहां पर भी पढ़ाई शुरू हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि संस्था पहले से मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित कर रही है। अब गाजियाबाद में यह विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के नए अवसर देगा। इसके लिए उप्र निजी विश्वविद्यालय (तृतीय संशोधन) अध्यादेश, 2026 प्रख्यापित होगा। वहीं प्रायोजक संस्था एंग्लो संस्कृत कॉलेज, फतेहपुर द्वारा फतेहपुर दक्षिणी में 20.45 एकड़ भूमि में ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। शहरी क्षेत्र के मानक के अनुरूप 20 एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध है।
मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि उच्च शिक्षा ने गुणवत्ता के साथ-साथ प्रसार में भी बड़ी छलांग लगाई है। 2017 तक उत्तर प्रदेश में मात्र 14 सरकारी विश्वविद्यालय थे। 2017 से अब तक 8 नए सरकारी विश्वविद्यालय स्थापित हुए हैं। इसी तरह 2017 तक मात्र 27 निजी विश्वविद्यालय थे, जो अब बढ़कर 56 हो जाएंगे। तीनों प्रस्तावित विश्वविद्यालय के खुलने से युवाओं को प्रदेश में ही उच्च शिक्षा, शोध और रोजगारपरक पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे।
पंचायतों के मानदेय और वेतन पर खर्च होंगे 1498 करोड़ रुपये
प्रदेश सरकार ने सोमवार को कैबिनेट की बैठक में राज्य वित्त आयोग से वर्ष 2026-27 के लिए प्राप्त धनराशि का 10 प्रतिशत पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय, पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों पर खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस मद में 1,498 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2026-27 में राज्य वित्त आयोग के तहत पंचायतों के लिए 14,988.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें से 10 प्रतिशत राशि पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय, तकनीकी व प्रशासनिक कर्मचारियों के वेतन, सिविल और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए निर्धारित की गई है। मंजूर प्रस्ताव के तहत 495.89 करोड़ रुपये पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय पर खर्च होंगे। वहीं, 1,057.38 करोड़ रुपये स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) व राज्य वित्त आयोग के तहत गठित वित्त प्रकोष्ठ में राज्य, मंडल, जिला और विकासखंड स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतन, मानदेय, तकनीकी व प्रशासनिक खर्चों पर खर्च किए जाएंगे।
शाहजहांपुर के जलालाबाद कस्बे का नाम होगा परशुरामपुरी
कैबिनेट ने शाहजहांपुर के जलालाबाद कस्बे का नाम 'परशुरामपुरी' करने के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है। यह निर्णय नगर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप उसका नाम परिवर्तित करने के दृष्टिगत लिया गया है। कैबिनेट के इस फैसले से शाहजहांपुर के नगर जलालाबाद को 'परशुरामपुरी' के रूप में नई आधिकारिक पहचान मिलेगी। अधिसूचना जारी होने के बाद नाम परिवर्तन का फैसला प्रभावी होगा।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव में शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत स्थित कस्बा जलालाबाद का नाम 'परशुरामपुरी' किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। मंत्रिपरिषद ने इसे स्वीकृति दे दी। अब संबंधित विभाग द्वारा नाम परिवर्तन के संबंध में आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद सभी शासकीय अभिलेखों, विभागीय दस्तावेजों तथा अन्य आधिकारिक अभिलेखों में नगर का नाम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परिवर्तित किया जाएगा। यह कस्बा भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।
पौराणिक कथाओं एवं विभिन्न ग्रंथों में भी इस स्थान का प्रमुखता से उल्लेख है। इसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों द्वारा लंबे समय से नगर का नाम भगवान परशुराम के नाम पर 'परशुरामपुरी' किए जाने की मांग की जा रही थी। भारत सरकार द्वारा भी इस प्रस्ताव पर अनापत्ति प्रदान की थी।
गोरखपुर नगर निगम 80 करोड़, मुरादाबाद नगर निगम 50 करोड़ का म्युनिसिपल बॉण्ड करेंगे जारी
कैबिनेट ने नगर निगम गोरखपुर एवं मुरादाबाद द्वारा म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने तथा अवस्थापना विकास निधि (इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड) से क्रेडिट रेटिंग बढ़ाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस फैसले से दोनों नगर निगमों को शहरी अवसंरचना विकास के लिए बाजार से संसाधन जुटाने में सहायता मिलेगी।
वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि नगर निगम गोरखपुर द्वारा 80 करोड़ रुपये तथा नगर निगम मुरादाबाद द्वारा 50 करोड़ रुपये तक के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने के प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं। दोनों नगर निगमों ने नगर निगम सदन से अनुमोदन प्राप्त करते हुए संबंधित परियोजनाओं का चयन भी कर लिया है। इससे इन दोनों शहरों में आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी तथा नगर निकायों की वित्तीय क्षमता और सुदृढ़ होगी। प्रदेश सरकार का उद्देश्य नगर निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है।
शहरी अवसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न वित्तीय स्रोतों से धन जुटाने की आवश्यकता को देखते हुए नगर निकायों में सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन, मार्केट ओरिएंटेशन तथा क्रेडिट वर्थनेस बढ़ाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय है। भारत सरकार भी अपनी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने वाले निकायों को प्रोत्साहन दे रही है। भारत सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड जारी करने पर 13 करोड़ रुपये तथा 200 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड जारी करने पर अधिकतम 26 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता है। बॉण्ड जारी करने के लिए सभी नगर निगम भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रावधानों का पालन करेंगे। अमृत 2.0 की गाइडलाइंस के अंतर्गत नगर निकायों को म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसे राज्य स्तरीय सुधारों में भी शामिल किया गया है।
उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026'' को कैबिनेट की मंजूरी
प्रदेश सरकार ने राज्य को देश का अग्रणी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डाटा सेंटर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2026 को सोमवार को कैबिनेट की मंजूरी दे दी। नई नीति का उद्देश्य प्रदेश में ग्रीन और एआई-रेडी डेटा सेंटरों को बढ़ावा देना, डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। सरकार ने नीति के तहत दो गीगावाट से अधिक अतिरिक्त डाटा सेंटर क्षमता विकसित करने और दो लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है।
पशुओं के बीमा किश्त में 85 फीसदी देगी सरकार
प्रदेश में मानव की तरह ही पशुओं का भी बीमा कराया जाएगा। पशु बीमा के प्रीमियम (किस्त) की रकम में 85 फीसदी सरकार देगी, जबकि 15 फीसदी पशुपालक को लगाना होगा। इसके लिए मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना (राज्य-योजना) की कार्य योजना एवं निहित वित्तीय उपाशय के के प्रस्ताव को सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है।
कैबिनेट की बैठक के बाद पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि भारत सरकार द्वारा केंद्र पुरोनिधानित कार्यक्रम के तहत वित पोषित जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2017-18 से किया जा रहा है। लघु एवं सीमान्त कृषक/पशुपालकों/डेयरी फर्म के पशुपालकों के साथ-साथ समाज के कमजोर/भूमिहीन पशुपालकों द्वारा पाले जा रहे पशुओं को सुरक्षित एवं किसी महामारी, दैवी आपदा, आकास्मिक दुर्घटना के कारण पशु के अपंग/अनुपयोगी/मृत्यु होने पर पशुपालक आर्थिक रूप से दयनीय स्थिति में चला जाता है।
पशुपालकों की आर्थिक रूप से होने वाली क्षति को सुरक्षित रखने के लिए अब पशुओं का मानवों की तरह पशुधन बीमा कराया जाएगा। पशु मृत्यु के बाद दावे की धनराशि का सीधे लाभार्थी के खाते में भुगतान किया जाएगा। पूर्ण स्थाई विकलांगता पर बीमित राशि का 75% तक भुगतान बीमा कंपनी द्वारा किया जाएगा। योजना में राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं एवं डेयरी उन्मुख योजनाओं में शामिल सभी पशुओं का बीमा कराया जाएगा। वर्ष 2026-27 के लिए शासन स्तर से करीब छह हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 2,28,350 पशुधन का बीमा किया जाएगा। बीमा प्रीमियम का भुगतान राज्य सरकार 85 प्रतिशत एवं लाभार्थीं 15 प्रतिशत करेगा।
ग्राम पंचायतों में बुनियादी ढांचे के संचालन के लिए होगी धन की व्यवस्था
इस नीति का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी बुनियादी ढांचे जैसे सामुदायिक शौचालय और अपशिष्ट संयंत्रों का दीर्घकालिक संचालन सुनिश्चित करना है। यह नीति केंद्र सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत तैयार हुई है। इसका लक्ष्य राज्य के सभी गांवों में खुले में शौच मुक्त स्थिति को स्थायी रूप से बनाए रखना है। पूर्व में निर्मित शौचालयों व सोक पिट की देखरेख की जाएगी। ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन संसाधनों का निर्माण और सेवाओं का विस्तार भी होगा। वर्तमान में पंचायतीराज विभाग की करीब सवा लाख संपत्तियों के रखरखाव में बजट की कमी थी।
ग्राम पंचायतें स्वच्छता ढांचों के संचालन व रखरखाव का काम करेंगी। वे उपयोगकर्ता शुल्क लगाकर आत्मनिर्भर बन सकेंगी। वर्तमान में राज्य में पंचायतीराज विभाग की करीब सवा लाख संपत्तियां हैं। इनके रखरखाव व संचालन के लिए बजट की व्यवस्था न होने से समस्याएं भी खड़ी हो रहीं थीं। यह नीति राज्य में विकेंद्रीकृत मॉडल, उपयोगकर्ता शुल्क, वित्त आयोग अनुदान तथा राजस्व सृजन के माध्यम से ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन परिसपंत्तियों का संचालन और रखरखाव सुनिश्चित कर पाने में मददगार साबित होगी।
यूपी में पुलिस समेत कई विभागों के भत्तों में बढ़ोतरी
प्रदेश सरकार ने वेतन समिति-2016 की लंबित सिफारिशों पर बड़ा फैसला लेते हुए पुलिस सहित कई विभागों के कर्मचारियों के भत्तों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्य सचिव समिति द्वारा विचारोपरांत दी गई संस्तुतियों को यथावत स्वीकार कर लिया गया। इन फैसलों के लागू होने से राज्य सरकार पर लगभग 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक वित्तीय भार आएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद भत्तों में करीब 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो जाएगी।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि वेतन समिति-2016 की विभिन्न संस्तुतियों पर मुख्य सचिव समिति ने विचार कर अपनी सिफारिशें दी थीं। इनमें वर्दी, वर्दी नवीनीकरण और वर्दी धुलाई भत्ता, गृह (पुलिस) विभाग से संबंधित विभिन्न भत्ते, अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों और कर्मचारियों के भत्ते, अवकाश यात्रा सुविधा तथा शिक्षा संबंधी सहायता जैसे विषय शामिल थे। इसके अलावा बेसिक, माध्यमिक, उच्च, प्राविधिक, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग, राज्यपाल सचिवालय, उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय और विधान परिषद सचिवालय से जुड़े मामलों पर भी विचार किया गया।
कैबिनेट ने गृह (पुलिस) विभाग के कार्मिकों को मिलने वाले भत्तों में वृद्धि करने का निर्णय लिया है। साथ ही न्याय विभाग के अधीनस्थ न्यायालयों, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, वन विभाग, आबकारी विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा आयुष विभाग के कर्मचारियों के वर्दी, वर्दी नवीनीकरण और वर्दी धुलाई भत्ते में भी बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है।
हालांकि, प्रेस नोट के अनुसार अन्य लंबित प्रकरणों में किसी प्रकार का संशोधन या अतिरिक्त निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार का कहना है कि स्वीकृत सिफारिशों के लागू होने से संबंधित विभागों के कर्मचारियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जबकि राज्य सरकार पर लगभग 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक व्ययभार आएगा।