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Lucknow News: लखनऊ में आधे हुए कम उम्र में मां बनने के मामले
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लखनऊ। पांच वर्ष के दौरान लखनऊ में कम उम्र में मां बनने के मामले आधे रह गए हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) में यह आंकड़ा एक फीसदी है। एनएफएचएस-5 में इसके मामले 2.1 फीसदी थे।
सितंबर में एनएफएचएस-6 के जनपदवार आंकड़े जारी किए गए हैं। इसमें 15 से 19 वर्ष की उम्र के दौरान मां बनने या फिर गर्भवती होने का ब्योरा दर्ज किया गया है। प्रदेश के आंकड़ों से तुलना करें तो लखनऊ की स्थिति और बेहतर नजर आती है। एनएफएचएस-6 में उत्तर प्रदेश में 15 से 19 वर्ष की 3.5 फीसदी किशोरियां मां या गर्भवती थीं। जिलेवार स्थिति में लखनऊ इस मामले 71वें स्थान पर है। वहीं, बहराइच में यह आंकड़ा सबसे अधिक 9.5 फीसदी दर्ज किया गया। मतलब हर 10 में एक मामला कम उम्र में मां बनने का है।
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कम उम्र में गर्भधारण से मां और बच्चे दोनों पर असर
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की डॉ. मालविका मिश्रा के अनुसार, किशोरावस्था में शरीर गर्भावस्था और प्रसव के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होता। इससे गर्भावस्था के दौरान एनीमिया, उच्च रक्तचाप और प्रसव संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। कम उम्र की मां में पर्याप्त पोषण की कमी होने पर इसका असर गर्भस्थ शिशु के विकास पर भी पड़ सकता है।
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कम उम्र में गर्भधारण के प्रमुख जोखिम
- एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है और पोषण की कमी गंभीर हो सकती है।
- गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं का जोखिम रहता है।
- प्रसव के दौरान परेशानी की आशंका बढ़ सकती है।
- समय से पहले शिशु का जन्म और उसमें कम वजन का जोखिम बढ़ सकता है।
- किशोरावस्था में मां की पढ़ाई छूटने और आगे की शिक्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है।
- कम उम्र में मातृत्व से मानसिक और सामाजिक दबाव भी बढ़ सकता है।
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सितंबर में एनएफएचएस-6 के जनपदवार आंकड़े जारी किए गए हैं। इसमें 15 से 19 वर्ष की उम्र के दौरान मां बनने या फिर गर्भवती होने का ब्योरा दर्ज किया गया है। प्रदेश के आंकड़ों से तुलना करें तो लखनऊ की स्थिति और बेहतर नजर आती है। एनएफएचएस-6 में उत्तर प्रदेश में 15 से 19 वर्ष की 3.5 फीसदी किशोरियां मां या गर्भवती थीं। जिलेवार स्थिति में लखनऊ इस मामले 71वें स्थान पर है। वहीं, बहराइच में यह आंकड़ा सबसे अधिक 9.5 फीसदी दर्ज किया गया। मतलब हर 10 में एक मामला कम उम्र में मां बनने का है।
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कम उम्र में गर्भधारण से मां और बच्चे दोनों पर असर
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की डॉ. मालविका मिश्रा के अनुसार, किशोरावस्था में शरीर गर्भावस्था और प्रसव के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होता। इससे गर्भावस्था के दौरान एनीमिया, उच्च रक्तचाप और प्रसव संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। कम उम्र की मां में पर्याप्त पोषण की कमी होने पर इसका असर गर्भस्थ शिशु के विकास पर भी पड़ सकता है।
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कम उम्र में गर्भधारण के प्रमुख जोखिम
- एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है और पोषण की कमी गंभीर हो सकती है।
- गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं का जोखिम रहता है।
- प्रसव के दौरान परेशानी की आशंका बढ़ सकती है।
- समय से पहले शिशु का जन्म और उसमें कम वजन का जोखिम बढ़ सकता है।
- किशोरावस्था में मां की पढ़ाई छूटने और आगे की शिक्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है।
- कम उम्र में मातृत्व से मानसिक और सामाजिक दबाव भी बढ़ सकता है।