श्रीनगर: 'जम्मू-कश्मीर विधानसभा जनता के मुद्दे सुलझाने के बजाय कुश्ती का अखाड़ा बन गई', आगा सैयद रूहुल्ला
सांसद आगा सैयद रूहुल्ला मेहदी ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदन जनता के मुद्दों के समाधान के बजाय राजनीतिक टकराव का मंच बन गया है।
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नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहुल्ला मेहदी ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदन जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा लोगों की समस्याओं का समाधान करने के मंच के बजाय राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बनती जा रही है।
किश्तवाड़ में युवाओं के साथ बातचीत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए श्रीनगर से लोकसभा सांसद मेहदी ने कहा कि 2024 में लोगों ने इस उम्मीद के साथ अपने प्रतिनिधियों को चुना था कि विधानसभा पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे रोजमर्रा के मुद्दों पर चर्चा कर समाधान का रास्ता निकालेगी।
उन्होंने कहा कि विधानसभा का गठन छह साल के उपराज्यपाल प्रशासन के बाद निर्वाचित व्यवस्था को बहाल करने के उद्देश्य से हुआ था, लेकिन मौजूदा स्थिति में जनता की उम्मीदें पूरी होती नजर नहीं आ रही हैं। मेहदी ने आरोप लगाया कि शासन और जनसमस्याओं के समाधान के बजाय राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया रीलों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
मेहदी ने विधानसभा में पहले पारित स्वायत्तता और विशेष दर्जे से जुड़े प्रस्तावों के संदर्भ में भी सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा 25 सितंबर को पेश किए गए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सदन में भारी हंगामा हुआ और सत्ता पक्ष तथा भाजपा विधायकों के बीच तीखी झड़पें भी हुईं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने प्रस्ताव में केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की थी। प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को विधानसभा द्वारा पारित पुराने प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया था। भाजपा ने प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव के संदर्भ पर आपत्ति जताते हुए विरोध किया था।
मेहदी ने कहा कि विधानसभा के मौजूदा राजनीतिक माहौल से आम लोगों की उम्मीदों को झटका लगा है। उन्होंने सरकार और विपक्ष दोनों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदन को जनता के मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए।
स्टेटहुड के मुद्दे पर एनसी की मौजूदा स्थिति पर भी मेहदी ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले पार्टी का तर्क था कि केवल स्टेटहुड पर जोर देने से भाजपा के एजेंडे को बढ़ावा मिलता है। अब उन्होंने सवाल किया कि सत्ता में बैठे लोग जब संवैधानिक अधिकारों और सुरक्षा उपायों पर पर्याप्त जोर दिए बिना सिर्फ स्टेटहुड की बात कर रहे हैं, तो क्या वे भी उसी एजेंडे को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं।
राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि फिलहाल उनका लोगों से संवाद किसी नई पार्टी के गठन या किसी मौजूदा पार्टी में शामिल होने के लिए नहीं है। 3 नवंबर तक उनका ध्यान अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों को पूरा करने पर रहेगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि वह नई पार्टी बनाएंगे या किसी राजनीतिक दल में शामिल होंगे।