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जम्मू-कश्मीर: मिलेट्स को खेत से बाजार तक पहुंचाने की तैयारी, पैकिंग-ब्रांडिंग पर एलजी का फोकस

Tue, 22 Sep 2026 12:39 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Tue, 22 Sep 2026 12:39 PM IST
सार

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मोटे अनाज को किसानों की आय, पोषण और टिकाऊ खेती से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि कम पानी और सीमित संसाधनों में इनकी खेती किसानों का जोखिम घटा सकती है।

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Millets are not just crops; they are a source of health and income.
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा - फोटो : संवाद

विस्तार

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि मोटे अनाज में वह क्षमता है जो किसानों को मुश्किल हालात से उबार सकते हैं। ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, कुटकी, कंगनो और सांवा जैसी फसलों ने किसानों और उनके परिवार को कई पीढि़यों तक पोषण दिया है।

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उपराज्यपाल ने स्कॉस्ट जम्मू में स्वस्थ पर्यावरण और टिकाऊ खाद्य व्यवस्था विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन और राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जम्मू में मिलेट्स फॉर हेल्थ सेमिनार को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज से तैयार खाद्य उत्पादों की पैकिंग, ब्रांडिंग और बिक्री के जरिए गांवों में महिलाओं और युवाओं के लिए कारोबार के मौके भी पैदा हो सकते हैं। इसकी खेती को बढ़ावा देने के साथ इसके उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और लोगों की थाली में इसे फिर जगह देने की जरूरत है।

एलजी ने कहा कि प्रदेश के 80 फीसदी से ज्यादा किसान छोटे और सीमांत हैं। मौसम में बदलाव का असर इनकी खेती पर ज्यादा पड़ता है। कम पानी और कम साधनों में होने वाली मोटे अनाज की खेती किसानों का जोखिम घटा सकती है। सम्मेलन में पद्मश्री डॉ. खादर वली, खेती विरासत मिशन के कार्यकारी निदेशक उमेंद्र दत्त, स्कॉस्ट के कुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी, आईएफपीआरआई के डॉ. अंजनी कुमार व शोध निदेशक प्रो. एसके गुप्ता समेत विशेषज्ञ व किसान माैजूद रहे।

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फसल के साथ गांव में खुलेंगे कारोबार के रास्ते
उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों और युवाओं से अपील की कि वे मोटे अनाज से बने खाद्य उत्पादों की पैकिंग, ब्रांडिंग और बिक्री के क्षेत्र में आगे आएं। एक जिला, एक उत्पाद जैसी योजनाओं का लाभ उठाकर इसे बड़े कारोबार में बदला जा सकता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में भारत ने लगभग 1.8 करोड़ टन मोटे अनाज का उत्पादन किया है जो वैश्विक उत्पादन का करीब 38 फीसदी है।

जीएमसी में थाली में मिलेट लौटाने पर जोर
जीएमसी में एलजी ने मोटे अनाज को सेहत से जोड़ते हुए बाजरा, ज्वार, रागी, कोदो, कुटकी, कंगनी और सांवा जैसे अनाजों को भोजन में शामिल करने की अपील की। इनमें रेशे, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। आईसीएमआर की 2018 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश में गैर-संचारी बीमारियों से होने वाली मौतों का आंकड़ा 1990 के 37.09% से बढ़कर 2016 में 61.8% हो गया है। उन्होंने डॉक्टरों और पोषण विशेषज्ञों से मिलेट के बारे में लोगों तक सही और शोध आधारित जानकारी पहुंचाने की अपील की।

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