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सीट का समीकरण: सपा चार, भाजपा तीन तो दो बार जीती कांग्रेस, बीते नौ चुनाव में ऐसा रहा सीसामऊ का चुनावी संग्राम
Wed, 09 Sep 2026 01:59 PM IST
अमन तिवारी
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 09 Sep 2026 01:59 PM IST
सार
कानपुर नगर की सीसामऊ विधानसभा सीट 1974 में अस्तित्व में आई इस सीट पर 1991 से लगातार तीन चुनाव भाजपा ने जीते। वहीं, 2002 और 2007 में यहां से कांग्रेस को जीत मिली। 2012 के बाद सपा लगातार चार बार सीसामऊ से जीत दर्ज कर चुकी है। इनमें एक उप-चुनाव भी शामिल है।
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सीसामऊ सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम का समय रह गया है। प्रदेश की राजनीति एक बार फिर चुनावी मोड में नजर आने लगी है। यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सियासी दल जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में हम आपको यूपी की सभी विधानसभा सीटों का इतिहास, राजनीतिक सफर और चुनावी गणित बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा कानपुर नगर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं सीसामऊ विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला कानपुर नगर है। जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें हैं। इनमें- बिल्हौर, बिठूर, कल्याणपुर, सीसामऊ, आर्य नगर, कानपुर कैंट (छावनी), गोविंदनगर, किदवई नगर, महाराजपुर और घाटमपुर शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम सीसामऊ विधानसभा सीट की बात करेंगे। कानपुर नगर की सीसामऊ विधानसभा सीट पहली बार साल 1974 में अस्तित्व में आई थी। उस समय यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट थी। 1974 के पहले चुनाव में कांग्रेस के शिव लाल यहां से पहले विधायक चुने गए।
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पहले जानते हैं सीसामऊ विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला कानपुर नगर है। जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें हैं। इनमें- बिल्हौर, बिठूर, कल्याणपुर, सीसामऊ, आर्य नगर, कानपुर कैंट (छावनी), गोविंदनगर, किदवई नगर, महाराजपुर और घाटमपुर शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम सीसामऊ विधानसभा सीट की बात करेंगे। कानपुर नगर की सीसामऊ विधानसभा सीट पहली बार साल 1974 में अस्तित्व में आई थी। उस समय यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट थी। 1974 के पहले चुनाव में कांग्रेस के शिव लाल यहां से पहले विधायक चुने गए।
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सीसामऊ विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
सीसामऊ के पहले चुनाव में जीती कांग्रेस
1974 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कानपुर नगर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शिव लाल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ (जनसंघ) के पन्ना लाल पांडेय को 21,768 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव लाल को 37,527 वोट मिले, जबकि पन्ना लाल पांडेय को 15,759 वोटों से संतोष करना पड़ा।
आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
सीसामऊ के पहले चुनाव में जीती कांग्रेस
1974 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कानपुर नगर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शिव लाल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ (जनसंघ) के पन्ना लाल पांडेय को 21,768 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव लाल को 37,527 वोट मिले, जबकि पन्ना लाल पांडेय को 15,759 वोटों से संतोष करना पड़ा।
आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1977 में जनता पार्टी ने मारी बाजी
इस चुनाव मेंं उत्तर प्रदेश के सीसामऊ विधानसभा सीट पर जनता पार्टी (JNP) ने जीत दर्ज की। चुनाव में मोती राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के शिव लाल को 8,944 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोती राम को 28,567 वोट मिले, जबकि शिव लाल को 19,623 वोट मिले।
राजनीतिक अस्थिरता का समय
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
इस चुनाव मेंं उत्तर प्रदेश के सीसामऊ विधानसभा सीट पर जनता पार्टी (JNP) ने जीत दर्ज की। चुनाव में मोती राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के शिव लाल को 8,944 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोती राम को 28,567 वोट मिले, जबकि शिव लाल को 19,623 वोट मिले।
राजनीतिक अस्थिरता का समय
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1980: इंदिरा गांधी की कांग्रेस ने की वापसी
1980 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कानपुर नगर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट पर कांग्रेस (आई) की कमला दरियाबादी विजयी हुईं। उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के दौलत राम को 14,754 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में कमला दरियाबादी को 25,252 वोट मिले, जबकि दौलत राम को 10,498 वोट मिले।
1985 में कांग्रेस ने फिर जीती चुनाव
इस चुनाव में भी सीसामऊ विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस की कमला दरियाबादी लगातार दूसरी बार विजयी हुईं। उन्होंने माकपा के दौलत राम को फिर से हराया। इस बार जीत जीत-हार का अंतर घटकर 9,702 वोट का रह गया।
1980 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कानपुर नगर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट पर कांग्रेस (आई) की कमला दरियाबादी विजयी हुईं। उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के दौलत राम को 14,754 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में कमला दरियाबादी को 25,252 वोट मिले, जबकि दौलत राम को 10,498 वोट मिले।
1985 में कांग्रेस ने फिर जीती चुनाव
इस चुनाव में भी सीसामऊ विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस की कमला दरियाबादी लगातार दूसरी बार विजयी हुईं। उन्होंने माकपा के दौलत राम को फिर से हराया। इस बार जीत जीत-हार का अंतर घटकर 9,702 वोट का रह गया।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1989: जनता दल ने खोला जीत का खाता
इस चुनाव में सीसामऊ विधानसभा सीट पर जनता दल (जेडी) ने पहली बार जीत दर्ज की। चुनाव में जनता दल के शिव कुमार बेरिया विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस की कमला दरियाबादी को 7,215 वोटों के अंतर से हराया।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में सीसामऊ विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
1991: सीसामऊ सीट पर भाजापा की पहली जीत
इस चुनाव में सीसामऊ विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में राकेश सोनकर विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दीन दयाल को 21,756 वोटों के अंतर से हराया।
1993: भाजपा ने दोहराई जीत
1991 के बाद राज्य में 1993 में चुनाव हुए। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। चुनाव में राकेश सोनकर लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के संजय सोनकर को 29,974 वोटों के भारी अंतर से हराया।
इस चुनाव में सीसामऊ विधानसभा सीट पर जनता दल (जेडी) ने पहली बार जीत दर्ज की। चुनाव में जनता दल के शिव कुमार बेरिया विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस की कमला दरियाबादी को 7,215 वोटों के अंतर से हराया।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में सीसामऊ विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
1991: सीसामऊ सीट पर भाजापा की पहली जीत
इस चुनाव में सीसामऊ विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में राकेश सोनकर विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दीन दयाल को 21,756 वोटों के अंतर से हराया।
1993: भाजपा ने दोहराई जीत
1991 के बाद राज्य में 1993 में चुनाव हुए। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। चुनाव में राकेश सोनकर लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के संजय सोनकर को 29,974 वोटों के भारी अंतर से हराया।
1996: भाजपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
1996 के विधानसभा चुनाव में सीसामऊ विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत की हैट्रिक लगाई। चुनाव में राकेश सोनकर लगातार तीसरी बार विजयी हुए। उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के दौलत राम को 17,100 वोटों के अंतर से हराया।
2002: 17 साल बाद कांग्रेस की वापसी
1996 के बाद राज्य में 2002 में चुनाव हुए। इस चुनाव में कानपुर नगर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संजीव दरियावादी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कपूर चंद्र सोनकर को 5,549 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में संजीव दरियावादी को 29,482 वोट मिले, जबकि कपूर चंद्र सोनकर को 23,933 वोट मिले। जबकि सपा के दुर्गेश बाल्मीकि 16,878 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
2007: कांग्रेस ने दोहराई जीत
इस विधानसभा चुनाव में सीसामऊ विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संजीव दरियाबादी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राकेश सोनकर को 1,364 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में संजीव दरियाबादी को 25,775 वोट मिले, जबकि राकेश सोनकर को 24,411 वोट मिले। जबकि बसपा के अनिल कुमार 13,986 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
1996 के विधानसभा चुनाव में सीसामऊ विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत की हैट्रिक लगाई। चुनाव में राकेश सोनकर लगातार तीसरी बार विजयी हुए। उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के दौलत राम को 17,100 वोटों के अंतर से हराया।
2002: 17 साल बाद कांग्रेस की वापसी
1996 के बाद राज्य में 2002 में चुनाव हुए। इस चुनाव में कानपुर नगर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संजीव दरियावादी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कपूर चंद्र सोनकर को 5,549 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में संजीव दरियावादी को 29,482 वोट मिले, जबकि कपूर चंद्र सोनकर को 23,933 वोट मिले। जबकि सपा के दुर्गेश बाल्मीकि 16,878 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
2007: कांग्रेस ने दोहराई जीत
इस विधानसभा चुनाव में सीसामऊ विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संजीव दरियाबादी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राकेश सोनकर को 1,364 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में संजीव दरियाबादी को 25,775 वोट मिले, जबकि राकेश सोनकर को 24,411 वोट मिले। जबकि बसपा के अनिल कुमार 13,986 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
2012: सीसामऊ में पहली बार जीती सपा
2012 के विधानसभा चुनाव में सीसामऊ विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के हाजी इरफान सोलंकी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के हनुमान स्वरूप मिश्रा को 19,663 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हाजी इरफान सोलंकी को 56,496 वोट मिले, जबकि हनुमान स्वरूप मिश्रा को 36,833 वोट मिले। जबकि कांग्रेस के संजीव दरियाबादी 22,024 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
भाजपा के लहर के बीच 2017 में भी जीती सपा
2012 के बाद उत्तर प्रदेश में 2017 में चुनाव हुए। इन चुनावों में राज्य में भाजपा का बोलबाला रहा। राज्य के चुनावी नतीजों में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई। हालांकि कानपुर नगर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के हाजी इरफान सोलंकी अपनी सीट बचाने में सफल रहे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सुरेश अवस्थी को 5,826 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हाजी इरफान सोलंकी को 73,030 वोट मिले, जबकि सुरेश अवस्थी को 67,204 वोट मिले। जबकि बसपा के नंद लाल कोरी 11,949 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
2012 के विधानसभा चुनाव में सीसामऊ विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के हाजी इरफान सोलंकी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के हनुमान स्वरूप मिश्रा को 19,663 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हाजी इरफान सोलंकी को 56,496 वोट मिले, जबकि हनुमान स्वरूप मिश्रा को 36,833 वोट मिले। जबकि कांग्रेस के संजीव दरियाबादी 22,024 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
भाजपा के लहर के बीच 2017 में भी जीती सपा
2012 के बाद उत्तर प्रदेश में 2017 में चुनाव हुए। इन चुनावों में राज्य में भाजपा का बोलबाला रहा। राज्य के चुनावी नतीजों में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई। हालांकि कानपुर नगर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के हाजी इरफान सोलंकी अपनी सीट बचाने में सफल रहे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सुरेश अवस्थी को 5,826 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हाजी इरफान सोलंकी को 73,030 वोट मिले, जबकि सुरेश अवस्थी को 67,204 वोट मिले। जबकि बसपा के नंद लाल कोरी 11,949 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
2022: सपा और इरफान सोलंकी ने लगाई जीत की हैट्रिक
इस चुनाव में कानपुर नगर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के हाजी इरफान सोलंकी लगातार तीसरी बार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सलिल विश्नोई को 12,266 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हाजी इरफान सोलंकी को 79,163 वोट मिले, जबकि सलिल विश्नोई को 66,897 वोट मिले। जबकि चुनाव में कांग्रेस के हाजी सुहेल अहमद 5,598 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
2024: उपचुनाव में भी जीती सपा
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सीसामऊ सीट से समाजवादी पार्टी के इरफान सोलंकी विधायक चुने गए थे। हालांकि, एक आपराधिक मामले में कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधायकी रद्द हो गई। सीट खाली होने के कारण यहां नवंबर 2024 में उपचुनाव कराया गया। इस उपचुनाव में सपा प्रत्याशी और इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी ने जीत दर्ज कर इस सीट पर पार्टी का दबदबा बरकरार रखा।
इस चुनाव में कानपुर नगर जिले की सीसामऊ विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के हाजी इरफान सोलंकी लगातार तीसरी बार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सलिल विश्नोई को 12,266 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हाजी इरफान सोलंकी को 79,163 वोट मिले, जबकि सलिल विश्नोई को 66,897 वोट मिले। जबकि चुनाव में कांग्रेस के हाजी सुहेल अहमद 5,598 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
2024: उपचुनाव में भी जीती सपा
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सीसामऊ सीट से समाजवादी पार्टी के इरफान सोलंकी विधायक चुने गए थे। हालांकि, एक आपराधिक मामले में कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधायकी रद्द हो गई। सीट खाली होने के कारण यहां नवंबर 2024 में उपचुनाव कराया गया। इस उपचुनाव में सपा प्रत्याशी और इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी ने जीत दर्ज कर इस सीट पर पार्टी का दबदबा बरकरार रखा।