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क्या 'धुरंधर' में दिखाई गई हर बात सच है?: थरूर ने की फिल्म की तारीफ, बोले- मैं जिस दुनिया में रहा, वह ऐसी नहीं
Tue, 20 Oct 2026 06:45 PM IST
नितिन गौतम
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 20 Oct 2026 06:45 PM IST
सार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने धुरंधर फिल्म की तारीफ की है, लेकिन उन्होंने इसमें कुछ खामियां भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि वे जिस ब्यूरोक्रेसी को जानते हैं, वह वैसे काम नहीं करती जैसे फिल्म में दिखाया गया है।
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शशि थरूर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने फिल्म 'धुरंधर' की तारीफ की है। हालांकि उन्होंने फिल्म में बहुत अधिक दुष्प्रचार और वीभत्स हिंसा दिखाए जाने की आलोचना की है। उन्होंने फिल्म की कहानी और उसमें आने वाले अप्रत्याशित मोड़ों (ट्विस्ट) की तारीफ करते हुए कहा कि इस मामले में दूसरा भाग पहले से बेहतर है। थरूर ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर साझा किए गए एक वीडियो में फिल्म 'धुरंधर' की समीक्षा की।
वीडियो में थरूर अपने कर्मचारियों के साथ फिल्म देखते नजर आ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा, 'फिल्म में जो बातें मुझे पसंद नहीं आईं, उनमें सबसे प्रमुख है अत्यधिक वीभत्स हिंसा। यह पूरी तरह गैर-जरूरी और हद से ज्यादा थी। इतनी हिंसा, खून-खराबा, तबाही और क्रूरता दिखाने की कोई जरूरत नहीं थी। इसमें कुछ ऐसे घृणित दृश्य भी हैं, जो भारतीय सिनेमा में अब तक दिखाए गए सबसे वीभत्स दृश्यों में शामिल हैं।'
'फिल्म में काफी दुष्प्रचार किया गया'
थरूर ने कहा, 'फिल्म में साफ तौर पर काफी दुष्प्रचार भी शामिल किया गया है। मुझे पता चला है कि इस फिल्म पर कई देशों में प्रतिबंध लगाया गया है। केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि खाड़ी के कई देशों ने भी इसे प्रतिबंधित किया है कि इससे भारतीयों और पाकिस्तानियों के बीच अनावश्यक रूप से कटुता बढ़ सकती है। मैं उनकी इन भावनाओं को समझ सकता हूं।'
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थरूर ने कहा, 'मुझे लगता है कि फिल्म की कुछ बातों और संवादों पर पाकिस्तानी हंसेंगे, जबकि कुछ दृश्यों को देखकर शायद उन्हें एहसास होगा कि उनके नाम पर कितना गलत किया गया है।'
कहानी और उसके मोड़ों की जमकर की तारीफ
फिल्म के निर्माण और प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए थरूर ने कहा, 'मुझे इसकी कहानी, कथानक और उसमें आने वाले अप्रत्याशित मोड़ शानदार लगे। दूसरे भाग में ये चीजें कहीं अधिक मनोरंजक थीं, क्योंकि पहला भाग देखने के बाद ऐसा महसूस हुआ था कि कहानी के कई सिरे अधूरे रह गए हैं।'
थरूर ने दोनों फिल्मों में खलनायकों की भूमिका निभाने वाले कलाकारों के अभिनय की भी सराहना की। उन्होंने कहा, 'दोनों फिल्मों में खलनायकों का अभिनय शानदार था। मुझे लगता है कि अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल दोनों ने असाधारण प्रदर्शन किया। उनका अभिनय वास्तव में बेहतरीन और बेहद विश्वसनीय था।'
खुफिया एजेंसियों से जुड़े अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए थरूर ने कहा, 'मेरा, हमारे कई खुफिया अधिकारियों से संपर्क रहा है, लेकिन वह बेहद सभ्य और औपचारिक तरीके से रहा है। इसमें विश्लेषण, बातचीत और सूचनाओं का आदान-प्रदान शामिल था। मैं कभी भी जासूसी की गुप्त और रोमांचक गतिविधियों में शामिल नहीं रहा।' उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि आदेश दिए जाने के बाद दूर-दराज की राजधानियों में विस्फोट हो जाते हों। मैं जिस दुनिया में रहा हूं, वह ऐसी नहीं है।'
देश की सेवा के लिए 'धुरंधर' बनना जरूरी नहीं
कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह नहीं मानते कि देश की सेवा करने का एकमात्र तरीका वही है, जो फिल्म 'धुरंधर' में दिखाया गया है। उन्होंने कहा, 'देश की सेवा करने के लिए आपको 'धुरंधर' बनने की जरूरत नहीं है। आप कई अन्य तरीकों से भी देश की सेवा कर सकते हैं। मुझे विश्वास है कि ऐसी कई प्रेरणादायक फिल्में भी हैं, जो देश की सेवा करने के दूसरे तरीके दिखाती हैं।'
अजीत डोभाल से प्रेरित किरदार पर भी उठाए सवाल
फिल्म में अजय सान्याल के किरदार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर आधारित बताते हुए थरूर ने कहा कि डोभाल 1998 से लेकर आज तक लगातार उस पद पर नहीं रहे होंगे, जिस पर उन्हें फिल्म में दिखाया गया है, क्योंकि नौकरशाही इस तरह काम नहीं करती।
फिल्म के निर्देशन, अभिनय और तकनीकी पक्ष को दिए पूरे अंक
थरूर ने फिल्म की प्रस्तुति की भी जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 'यह फिल्म बेहद प्रभावशाली ढंग से बनाई गई है। कल्पनाशीलता या सोचने-समझने की क्षमता रखने वाले किसी भी व्यक्ति पर इसका असर पड़ना तय है। मुझे विश्वास है कि आप सभी ने भी फिल्म देखते समय इसे महसूस किया होगा।'
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वीडियो में थरूर अपने कर्मचारियों के साथ फिल्म देखते नजर आ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा, 'फिल्म में जो बातें मुझे पसंद नहीं आईं, उनमें सबसे प्रमुख है अत्यधिक वीभत्स हिंसा। यह पूरी तरह गैर-जरूरी और हद से ज्यादा थी। इतनी हिंसा, खून-खराबा, तबाही और क्रूरता दिखाने की कोई जरूरत नहीं थी। इसमें कुछ ऐसे घृणित दृश्य भी हैं, जो भारतीय सिनेमा में अब तक दिखाए गए सबसे वीभत्स दृश्यों में शामिल हैं।'
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'फिल्म में काफी दुष्प्रचार किया गया'
थरूर ने कहा, 'फिल्म में साफ तौर पर काफी दुष्प्रचार भी शामिल किया गया है। मुझे पता चला है कि इस फिल्म पर कई देशों में प्रतिबंध लगाया गया है। केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि खाड़ी के कई देशों ने भी इसे प्रतिबंधित किया है कि इससे भारतीयों और पाकिस्तानियों के बीच अनावश्यक रूप से कटुता बढ़ सकती है। मैं उनकी इन भावनाओं को समझ सकता हूं।'
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थरूर ने कहा, 'मुझे लगता है कि फिल्म की कुछ बातों और संवादों पर पाकिस्तानी हंसेंगे, जबकि कुछ दृश्यों को देखकर शायद उन्हें एहसास होगा कि उनके नाम पर कितना गलत किया गया है।'
कहानी और उसके मोड़ों की जमकर की तारीफ
फिल्म के निर्माण और प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए थरूर ने कहा, 'मुझे इसकी कहानी, कथानक और उसमें आने वाले अप्रत्याशित मोड़ शानदार लगे। दूसरे भाग में ये चीजें कहीं अधिक मनोरंजक थीं, क्योंकि पहला भाग देखने के बाद ऐसा महसूस हुआ था कि कहानी के कई सिरे अधूरे रह गए हैं।'
थरूर ने दोनों फिल्मों में खलनायकों की भूमिका निभाने वाले कलाकारों के अभिनय की भी सराहना की। उन्होंने कहा, 'दोनों फिल्मों में खलनायकों का अभिनय शानदार था। मुझे लगता है कि अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल दोनों ने असाधारण प्रदर्शन किया। उनका अभिनय वास्तव में बेहतरीन और बेहद विश्वसनीय था।'
खुफिया एजेंसियों से जुड़े अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए थरूर ने कहा, 'मेरा, हमारे कई खुफिया अधिकारियों से संपर्क रहा है, लेकिन वह बेहद सभ्य और औपचारिक तरीके से रहा है। इसमें विश्लेषण, बातचीत और सूचनाओं का आदान-प्रदान शामिल था। मैं कभी भी जासूसी की गुप्त और रोमांचक गतिविधियों में शामिल नहीं रहा।' उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि आदेश दिए जाने के बाद दूर-दराज की राजधानियों में विस्फोट हो जाते हों। मैं जिस दुनिया में रहा हूं, वह ऐसी नहीं है।'
देश की सेवा के लिए 'धुरंधर' बनना जरूरी नहीं
कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह नहीं मानते कि देश की सेवा करने का एकमात्र तरीका वही है, जो फिल्म 'धुरंधर' में दिखाया गया है। उन्होंने कहा, 'देश की सेवा करने के लिए आपको 'धुरंधर' बनने की जरूरत नहीं है। आप कई अन्य तरीकों से भी देश की सेवा कर सकते हैं। मुझे विश्वास है कि ऐसी कई प्रेरणादायक फिल्में भी हैं, जो देश की सेवा करने के दूसरे तरीके दिखाती हैं।'
अजीत डोभाल से प्रेरित किरदार पर भी उठाए सवाल
फिल्म में अजय सान्याल के किरदार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर आधारित बताते हुए थरूर ने कहा कि डोभाल 1998 से लेकर आज तक लगातार उस पद पर नहीं रहे होंगे, जिस पर उन्हें फिल्म में दिखाया गया है, क्योंकि नौकरशाही इस तरह काम नहीं करती।
फिल्म के निर्देशन, अभिनय और तकनीकी पक्ष को दिए पूरे अंक
थरूर ने फिल्म की प्रस्तुति की भी जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 'यह फिल्म बेहद प्रभावशाली ढंग से बनाई गई है। कल्पनाशीलता या सोचने-समझने की क्षमता रखने वाले किसी भी व्यक्ति पर इसका असर पड़ना तय है। मुझे विश्वास है कि आप सभी ने भी फिल्म देखते समय इसे महसूस किया होगा।'