नाबालिग को गाड़ी देना पड़ा भारी: हादसे में गई थी रेलवे कर्मचारी की जान, मृतक के मां को मिलेगा 38 लाख का मुआवजा
ठाणे मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 2020 के सड़क हादसे में जान गंवाने वाले 25 वर्षीय रेलवे कर्मचारी धीरज पवार की मां को 38.13 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। हादसा नाबालिग और बिना लाइसेंस बाइक चालक की लापरवाही से हुआ था। मुआवजे पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी मिलेगा।
विस्तार
छह साल पहले सड़क हादसे में जान गंवाने वाले रेलवे कर्मचारी की मां को आखिरकार न्याय मिला है। ठाणे मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने 25 वर्षीय धीरज शरद पवार की मौत के मामले में उसकी मां को 38.13 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने माना कि हादसा पीछे से आ रही बाइक के नाबालिग चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार के कारण हुआ था। साथ ही, हादसे के लिए मृतक को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश को भी खारिज कर दिया।
बीमा कंपनी पहले देगी रकम, बाद में वाहन मालिक से होगी वसूली
MACT सदस्य आर. वी. मोहिते ने शनिवार को सुनाए आदेश में कहा कि जिस बाइक से हादसा हुआ, उसकी बीमा कंपनी पहले पीड़ित परिवार को मुआवजे की रकम देगी। इसके बाद वह यह पूरी रकम वाहन मालिक से वसूल सकती है। इसकी वजह यह है कि हादसे के समय बाइक एक ऐसे नाबालिग के हाथ में थी, जिसके पास वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं था। इसे बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन माना गया है।
8 जून 2020 को सड़क पर हुआ था जानलेवा हादसा
मामले के मुताबिक, 25 वर्षीय धीरज शरद पवार मुंबई के सेंट्रल रेलवे लोको वर्कशॉप में खलासी के पद पर काम करता था। 8 जून 2020 को वह अपनी बाइक से नालासोपारा रेलवे स्टेशन की ओर जा रहा था। बताया गया कि वह सामान्य रफ्तार में और सावधानी से बाइक चला रहा था। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आई दूसरी बाइक ने उसकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
टक्कर इतनी जोरदार थी कि धीरज को गंभीर चोटें आईं। उसे तुरंत नालासोपारा के पब्लिक हेल्थ सेंटर ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद तुलिंज पुलिस ने शुरुआत में अज्ञात बाइक सवार के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
जांच में सामने आया नाबालिग चालक का सच
पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो हादसे के लिए जिम्मेदार बाइक और उसके चालक की पहचान हो गई। बाइक चलाने वाला नाबालिग था। मामले में उसने जनवरी 2021 में भिवंडी के किशोर न्याय बोर्ड के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। बोर्ड ने उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
बेटे की मौत के बाद मां ने लिया मुआवजे के लिए अदालत का दरवाजा
धीरज की मौत के बाद उसकी मां ने MACT में मुआवजे के लिए याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के दौरान बाइक का मालिक ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं हुआ। इसके बाद उसके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की गई।
बीमा कंपनी ने उठाया 'हिट एंड रन' का सवाल
दूसरी तरफ, बाइक की बीमा कंपनी ट्रिब्यूनल के सामने पेश हुई। कंपनी ने दावा किया कि यह मामला 'हिट एंड रन' का है। उसने यह भी कहा कि बाइक चला रहा नाबालिग वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं रखता था। बीमा कंपनी के मुताबिक, यह पॉलिसी की शर्तों का जानबूझकर किया गया उल्लंघन था।
ट्रिब्यूनल ने 24,712 रुपये मासिक आय मानी
सभी दलीलों और मामले के रिकॉर्ड को देखने के बाद ट्रिब्यूनल ने धीरज की मासिक शुद्ध आय 24,712 रुपये तय की। इसके आधार पर उसकी मां को कुल 38.13 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया। इस रकम पर याचिका दायर किए जाने की तारीख से 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
एक महीने के भीतर जमा करनी होगी मुआवजे की रकम
ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह एक महीने के भीतर मुआवजे की पूरी रकम ब्याज समेत MACT के बैंक खाते में जमा करे। इसके बाद रकम का भुगतान मां को किया जाएगा। ट्रिब्यूनल ने मुआवजे की रकम के इस्तेमाल को लेकर भी निर्देश दिए हैं। कुल 38.13 लाख रुपये में से 9 लाख रुपये राष्ट्रीयकृत बैंक में मां के नाम तीन साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट किए जाएंगे। बाकी रकम सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।
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नाबालिग की गलती का खामियाजा वाहन मालिक को उठाना होगा
ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि बीमा कंपनी को पहले मुआवजा देना होगा, लेकिन बाद में वह यह रकम वाहन मालिक से वसूल सकती है। यानी बिना लाइसेंस वाले नाबालिग को बाइक चलाने देने की जिम्मेदारी आखिरकार वाहन मालिक पर आएगी। इस तरह छह साल पुराने इस सड़क हादसे में मृतक की मां को 38.13 लाख रुपये के मुआवजे का रास्ता साफ हुआ।