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अभिनेता प्रकाश राज का राजनीतिक नेताओं पर प्रहार: बोले- मीडिया का अपमान जनता का अपमान; चुनाव आयोग को ऐसे घेरा
Wed, 07 Oct 2026 02:27 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, चेन्नई।
पीटीआई, चेन्नई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 07 Oct 2026 02:27 PM IST
सार
प्रकाश राज ने राजनीतिक नेताओं से मीडिया के सवालों का सामना करने और जनता के प्रति जवाबदेह रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मीडिया का अपमान उन नागरिकों का अपमान है, जिनके सवाल पत्रकार नेताओं के सामने रखते हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति, एसआईआर और चुनावी प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाए। हालांकि, ये सभी आरोप प्रकाश राज की ओर से लगाए गए हैं।
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प्रकाश राज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज ने राजनीतिक नेताओं पर मीडिया से सवालों से बचने को लेकर हमला बोला है। चेन्नई में उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचना और मीडिया का अपमान करना उन नागरिकों का अपमान है, जिनके सवाल पत्रकार नेताओं के सामने रखते हैं। उन्होंने कहा कि चाहे मुख्यमंत्री हों या प्रधानमंत्री, चुने हुए प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब दें।
किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं प्रकाश राज?
प्रकाश राज ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों वाली राजनीति में उनकी दिलचस्पी है। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों को राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए और चुने हुए प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी शासन चलाने की है। उन्होंने सत्तारूढ़ दलों पर पारदर्शिता से बचने और जनता के विरोध-प्रदर्शन के लिए लोकतांत्रिक जगह सीमित करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने सत्ता में बैठे लोगों से जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रकाश राज ने कहा, 'आप प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से क्यों बच रहे हैं? आप प्रेस का अपमान और उसे नीचा क्यों दिखा रहे हैं?'
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प्रकाश राज ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
इतना ही नहीं, प्रकाश राज ने चुनाव आयोग को भी घेरा। प्रकाश राज ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति की व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर उनकी जगह केंद्रीय मंत्री को शामिल करने से सत्तारूढ़ दल को समिति में 2:1 का बहुमत मिल गया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को कार्यकाल के दौरान और उसके बाद कानूनी कार्रवाई से व्यापक न्यायिक सुरक्षा देने वाले प्रावधानों की भी आलोचना की।
यह भी पढ़ें: 'मोदी-शाह की जोड़ी घबराई और हताश है': राहुल-प्रियंका पर एफआईआर दर्ज होने पर भड़की कांग्रेस, क्या लगाए आरोप?
एसआईआर पर भी उठाए सवाल
प्रकाश राज ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में बड़े पैमाने पर खामियों का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सिर्फ काम पर होने, अस्पताल में रहने या अधिकारियों के दौरे के समय घर से बाहर रहने के कारण कुछ नागरिकों को 'अनुपस्थित' या 'स्थानांतरित' जैसे टैग देकर मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पर्याप्त प्रशिक्षण और जन-जागरूकता अभियान के अभाव में प्रशासनिक दबाव इतना बढ़ा कि बूथ स्तर के अधिकारियों ने आत्महत्या तक की।
चुनाव कार्यक्रम को लेकर क्या आरोप लगाए?
प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने कथित विदेशी घुसपैठियों की जानकारी देने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया। उन्होंने चुनाव कार्यक्रम में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाया। उनका आरोप था कि चुनाव कार्यक्रम इस तरह बदला गया कि प्रधानमंत्री की चुनावी रैलियों की घोषणाओं के लिए मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने से पहले जगह बनाई जा सके। ये आरोप प्रकाश राज ने चुनावी प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए लगाए।
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किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं प्रकाश राज?
प्रकाश राज ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों वाली राजनीति में उनकी दिलचस्पी है। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों को राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए और चुने हुए प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी शासन चलाने की है। उन्होंने सत्तारूढ़ दलों पर पारदर्शिता से बचने और जनता के विरोध-प्रदर्शन के लिए लोकतांत्रिक जगह सीमित करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने सत्ता में बैठे लोगों से जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रकाश राज ने कहा, 'आप प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से क्यों बच रहे हैं? आप प्रेस का अपमान और उसे नीचा क्यों दिखा रहे हैं?'
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प्रकाश राज ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
इतना ही नहीं, प्रकाश राज ने चुनाव आयोग को भी घेरा। प्रकाश राज ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति की व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर उनकी जगह केंद्रीय मंत्री को शामिल करने से सत्तारूढ़ दल को समिति में 2:1 का बहुमत मिल गया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को कार्यकाल के दौरान और उसके बाद कानूनी कार्रवाई से व्यापक न्यायिक सुरक्षा देने वाले प्रावधानों की भी आलोचना की।
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एसआईआर पर भी उठाए सवाल
प्रकाश राज ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में बड़े पैमाने पर खामियों का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सिर्फ काम पर होने, अस्पताल में रहने या अधिकारियों के दौरे के समय घर से बाहर रहने के कारण कुछ नागरिकों को 'अनुपस्थित' या 'स्थानांतरित' जैसे टैग देकर मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पर्याप्त प्रशिक्षण और जन-जागरूकता अभियान के अभाव में प्रशासनिक दबाव इतना बढ़ा कि बूथ स्तर के अधिकारियों ने आत्महत्या तक की।
चुनाव कार्यक्रम को लेकर क्या आरोप लगाए?
प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने कथित विदेशी घुसपैठियों की जानकारी देने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया। उन्होंने चुनाव कार्यक्रम में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाया। उनका आरोप था कि चुनाव कार्यक्रम इस तरह बदला गया कि प्रधानमंत्री की चुनावी रैलियों की घोषणाओं के लिए मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने से पहले जगह बनाई जा सके। ये आरोप प्रकाश राज ने चुनावी प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए लगाए।