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'अपुष्ट सूचना पर भरोसा न करें': गृह मंत्रालय ने किया राहुल-प्रियंका से संपर्क? पीआईबी ने दावे को बताया भ्रामक
Tue, 06 Oct 2026 09:19 PM IST
देवेश त्रिपाठी
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Tue, 06 Oct 2026 09:19 PM IST
सार
पीआईबी ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन दावों को भ्रामक बताया है, जिनमें कहा गया था कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से संपर्क कर निर्वाचन सदन के बाहर जारी विरोध खत्म कराने की कोशिश की। यह दावे उस समय सामने आए जब राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसद निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे।
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राहुल-प्रियंका से गृह मंत्रालय के संपर्क की खबर पर पीआईबी का फैक्ट चेक
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने मंगलवार को एक फैक्ट चेक जारी कर सोशल मीडिया पर किए जा रहे उन दावों को भ्रामक बताया, जिनमें कहा गया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से संपर्क किया था। दावा किया गया था कि निर्वाचन सदन के बाहर चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए गृह मंत्रालय की ओर से दोनों नेताओं से संपर्क किया गया।
पीआईबी ने कहा कि ऐसे भ्रामक दावों या अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा नहीं करना चाहिए। लोगों से केवल सत्यापित स्रोतों से मिली जानकारी पर भरोसा करने की अपील की गई। पीआईबी की फैक्ट चेक के साथ सोशल मीडिया पर किए गए कुछ पोस्ट के स्क्रीनशॉट भी साझा किए गए। इनमें एक पत्रकार और एक समाचार चैनल की वेबसाइट से जुड़े पोस्ट शामिल थे।
राहुल गांधी के नेतृत्व में करीब 300 विपक्षी सांसदों ने किया मार्च
ये दावे निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास विपक्षी सांसदों के विरोध प्रदर्शन और राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों की निर्वाचन सदन पहुंचकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करने की कोशिश के संदर्भ में किए गए थे। इससे पहले दिन में राहुल गांधी ने टीएमसी समेत लोकसभा और राज्यसभा के करीब 300 विपक्षी सांसदों के साथ संसद से निर्वाचन सदन की ओर मार्च किया। संसद से निर्वाचन सदन की दूरी करीब एक किलोमीटर है।
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रोके जाने पर आकाशवाणी भवन में शुरू किया था धरना
निर्वाचन सदन से करीब 50 गज पहले रोके जाने के बाद राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा कि वे मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां जाने से रोक दिया गया। सुरक्षा कर्मियों द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी और राहुल गांधी समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास स्थित आकाशवाणी भवन के भीतर धरना दिया।
भाजपा ने की राहुल गांधी की आलोचना
उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में विपक्षी नेताओं के इस विरोध प्रदर्शन की भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विपक्षी दल अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। रविशंकर प्रसाद ने आईएएनएस से कहा, "दिल्ली में बैठकर उन्होंने यहां एक संवेदनशील इलाके को घेर लिया है और वे कह रहे हैं कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के दबाव में हैं। यह शर्मनाक है। मैं इसकी निंदा करता हूं।"
रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर लगाए क्या आरोप?
प्रसाद ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उस कथित बयान की भी आलोचना की, जिसमें चुनाव रद्द कराकर दोबारा मतपत्रों के जरिए चुनाव कराने की मांग की गई थी। रविशंकर प्रसाद ने कहा, "उन्होंने कहा था कि सभी चुनाव रद्द कर दिए जाने चाहिए और दोबारा मतपत्रों के जरिए चुनाव होने चाहिए। यही उनकी मंशा है और वे यही चाहते हैं। वे ईमानदार चुनाव में जीत नहीं सकते। अब वे बूथों पर कब्जा करना चाहते हैं। वे दबाव बनाकर चुनाव जीतना चाहते हैं। वे दलितों और गरीबों को मतदान करने से रोकना चाहते हैं। कांग्रेस इसी तरह जीतती रही है, चाहे वह बिहार हो, पश्चिम बंगाल हो या कोई अन्य राज्य।"
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पीआईबी ने कहा कि ऐसे भ्रामक दावों या अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा नहीं करना चाहिए। लोगों से केवल सत्यापित स्रोतों से मिली जानकारी पर भरोसा करने की अपील की गई। पीआईबी की फैक्ट चेक के साथ सोशल मीडिया पर किए गए कुछ पोस्ट के स्क्रीनशॉट भी साझा किए गए। इनमें एक पत्रकार और एक समाचार चैनल की वेबसाइट से जुड़े पोस्ट शामिल थे।
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राहुल गांधी के नेतृत्व में करीब 300 विपक्षी सांसदों ने किया मार्च
ये दावे निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास विपक्षी सांसदों के विरोध प्रदर्शन और राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों की निर्वाचन सदन पहुंचकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करने की कोशिश के संदर्भ में किए गए थे। इससे पहले दिन में राहुल गांधी ने टीएमसी समेत लोकसभा और राज्यसभा के करीब 300 विपक्षी सांसदों के साथ संसद से निर्वाचन सदन की ओर मार्च किया। संसद से निर्वाचन सदन की दूरी करीब एक किलोमीटर है।
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रोके जाने पर आकाशवाणी भवन में शुरू किया था धरना
निर्वाचन सदन से करीब 50 गज पहले रोके जाने के बाद राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा कि वे मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां जाने से रोक दिया गया। सुरक्षा कर्मियों द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी और राहुल गांधी समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास स्थित आकाशवाणी भवन के भीतर धरना दिया।
भाजपा ने की राहुल गांधी की आलोचना
उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में विपक्षी नेताओं के इस विरोध प्रदर्शन की भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विपक्षी दल अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। रविशंकर प्रसाद ने आईएएनएस से कहा, "दिल्ली में बैठकर उन्होंने यहां एक संवेदनशील इलाके को घेर लिया है और वे कह रहे हैं कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के दबाव में हैं। यह शर्मनाक है। मैं इसकी निंदा करता हूं।"
रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर लगाए क्या आरोप?
प्रसाद ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उस कथित बयान की भी आलोचना की, जिसमें चुनाव रद्द कराकर दोबारा मतपत्रों के जरिए चुनाव कराने की मांग की गई थी। रविशंकर प्रसाद ने कहा, "उन्होंने कहा था कि सभी चुनाव रद्द कर दिए जाने चाहिए और दोबारा मतपत्रों के जरिए चुनाव होने चाहिए। यही उनकी मंशा है और वे यही चाहते हैं। वे ईमानदार चुनाव में जीत नहीं सकते। अब वे बूथों पर कब्जा करना चाहते हैं। वे दबाव बनाकर चुनाव जीतना चाहते हैं। वे दलितों और गरीबों को मतदान करने से रोकना चाहते हैं। कांग्रेस इसी तरह जीतती रही है, चाहे वह बिहार हो, पश्चिम बंगाल हो या कोई अन्य राज्य।"