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जम्मू-कश्मीर: 36 माह में 70 में से मारे गए 34 पाकिस्तानी आतंकी, अब पांच वार से बाहर निकलेंगे छिपे हुए दहशतगर्द

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 21 Oct 2026 10:11 PM IST
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J&K: 34 of 70 Terrorists Killed in 36 Months Were Pakistani,5-Pronged Strategy to Flush Out Hidden Militant
जम्मू कश्मीर - फोटो : बासीत जरगर
सुरक्षा बलों ने पिछले तीन साल के दौरान जम्मू-कश्मीर में छिपे पाकिस्तानी आतंकियों पर तगड़ा प्रहार किया है। पहाड़, जंगल और गुफाओं में छिपे 70 में से 34 आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में अब 35-36 पाकिस्तानी आतंकी बचे हैं। लोकल आतंकियों की नई भर्ती पूरी तरह बंद हो चुकी है।इसका नतीजा यह रहा कि राज्य में एक या दो लोकल आतंकी ही सक्रिय है। पाकिस्तानी मूल के लगभग तीन दर्जन आतंकियों को उनके 'बिल' से बाहर निकालने के लिए अब सुरक्षा एजेंसियां, पांच 'वार' एक साथ कर रही हैं। 
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बता दें कि तीन साल पहले तक जेएंडके में लगभग 70 'ए' ग्रेड पाकिस्तानी आतंकवादियों की मौजूदगी रही है। तब दर्जनभर लोकल दहशगर्द भी सक्रिय थे। सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए गए अभियानों में विदेशी और लोकल आतंकियों को निशाना बनाया गया। जेएंडके में मौजूद ज्यादातर पाकिस्तानी दहशतगर्दों की ट्रेनिंग 'अफगानिस्तान' फ्रंट पर हुई है। इन आतंकियों तक पहुंचना और उन्हें मुठभेड़ में मार गिराना, सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है। इन आतंकियों ने सुरक्षा बलों को काफी नुकसान भी पहुंचाया है। 
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अब हो रहे 'पांच' वार एक साथ 
पाकिस्तानी आतंकियों को उनके बिल से बाहर निकालने के लिए अब सुरक्षा बलों ने एक साथ 'पांच' वार करने की रणनीति बनाई है। पहला, जहां ऐसा खुफिया अलर्ट मिलता है कि इस क्षेत्र में आतंकी छिपे हो सकते हैं, वहां कड़ी नजर रखते हुए सप्लाई चेन काटी जा रही है। संभावित ठिकानों की तरफ जाने वाले सभी कच्चे-पक्के रास्तों पर गश्त शुरू की गई है। सामान कहां पर पहुंचता है, उसके गन्तव्य की सूची तैयार की गई है। दूसरा, 'सीआरपीएफ' ने जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियों में 10 हजार फुट की ऊंचाई पर छिपे आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है। विभिन्न इलाकों में 50 से ज्यादा टेम्पोरेरी ऑपरेशन बेस 'टीओबी' स्थापित कर दिए हैं। पहले इतनी ऊंचाई पर सुरक्षा बलों की नियमित गश्त नहीं होती थी। नतीजा, आतंकवादी वहां पर छिपने का स्थान ढूंढ लेते थे। जुलाई 2025 के बाद से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीआरपीएफ ने 'टीओबी' के जरिए आतंकियों को खदेड़ दिया है।
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आतंकियों के मददगारों पर हो रहा प्रहार 
जेएंडके में आतंकियों के मददगार यानी 'ओवर ग्राउंड वर्कर' की पहचान कर उन्हें सलाखों के पीछे लाया जा रहा है। इसमें दर्जनों सरकारी कर्मचारी भी गिरफ्त में आए हैं। अब आतंकियों को मददगार आसानी से नहीं मिल रहे। चौथा, लोकल भर्ती पूरी तरह से बंद हो गई है। अब पाकिस्तानी आतंकी संगठनों को जम्मू कश्मीर में नए आतंकी तैयार करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पांचवां, सीमा पार से भी अब आतंकियों को भारतीय सीमा में एंट्री नहीं मिल पा रही। सूत्रों के मुताबिक, सीमा पार आतंकवादियों के दर्जनभर लॉन्चिंग पैड हैं। लगभग 140 आतंकी घुसपैठ के लिए तैयार बैठे हैं, लेकिन भारतीय सुरक्षा बल, बॉर्डर पर ऐसा कोई छिद्र नहीं छोड़ रहे, जिससे पाकिस्तानी दहशतगर्द जेएंडके में घुसपैठ कर सकें। इन सबके चलते अब जम्मू कश्मीर में छिपे पाकिस्तानी आतंकियों के लिए अपने नापाक मंसूबों को पार लगाना मुश्किल हो गया है।  


टीओबी से मिल रही सफलता 
टीओबी पर सीआरपीएफ के जवान 24 घंटे तैनात रहते हैं। जैसे ही एक टीम वापस आती है तो दूसरी टीम वहां पहुंच जाती है। जवानों को किसी भी तरह की मुठभेड़ में मदद करने वाले उपकरणों से लैस किया गया है। जवानों के पास आधुनिक हथियार, स्नाइनर गन, दूरबीन, स्नो शूज, स्लीपिंग बैग और सेटेलाइट ट्रैकर आदि उपकरण हैं। वहां पर जवानों की तैनाती की रणनीति इस तरह से बनाई गई है कि अगर कहीं आतंकी मुठभेड़ होती है तो बिना किसी देरी के दूसरा दस्ता मौके पर पहुंच सकता है। पहाड़ियों पर बनी गुफाओं को नष्ट किया जा रहा है। इसके अलावा आतंकियों के संभावित रूट की पहचान की जा रही है। टीओबी का फायदा यह भी हुआ है कि आतंकियों तक पहुंचने वाली सप्लाई चेन भी हो रही है। 
 
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