इसरो की बड़ी तैयारी: अंतरिक्ष में काम करने वाली निजी कंपनियों के लिए बनेगा 'जीरो-डिफेक्ट' मानक, रखी जाएगी नजर
अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ रही है। जुलाई 2026 तक सरकार की तरफ से निजी संस्थाओं को अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए 105 मंजूरियां दी जा चुकी हैं। अब ये कंपनियां उपग्रह और दूसरे अंतरिक्ष उपकरण बनाने में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में इसरो ने गुणवत्ता को लेकर अपना फोकस बढ़ाया है। इसरो के साथ काम करने वाली कंपनियों को तय गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना होगा। उपकरण के डिजाइन से लेकर परीक्षण और अंतरिक्ष में काम करने तक उसकी गुणवत्ता पर नजर रहेगी। मतलब अब इसरो अंतरिक्ष में जाने वाले वैज्ञानिक उपकरणों और उनसे मिलने वाले आंकड़ों को 'जीरो-डिफेक्ट' बनाने की तैयारी कर रहा है। मकसद साफ है अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद उपकरण में खराबी की गुंजाइश न्यूनतम हो और उससे मिलने वाला डेटा भरोसेमंद रहे।
डिजाइन से अंतरिक्ष में काम करने तक हर चरण की जांच
इसरो के मुताबिक, जीरो डिफेक्ट नियम के लिए करीब 120 वैज्ञानिक और इंजीनियर्स के बीच चर्चा हुई। इसमें इसरो के विभिन्न केंद्रों के साथ वैज्ञानिक और शोध संस्थानों ने भी हिस्सा लिया। इसमें वैज्ञानिक उपकरणों के पूरे जीवनचक्र पर चर्चा हुई। यानी उपकरण के डिजाइन से शुरुआत, उसके निर्माण और परीक्षण से होते हुए अंतरिक्ष में उसके काम करने तक गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। पुराने अभियानों से मिले अनुभव भी साझा किए गए। इनमें एस्ट्रोसैट, आदित्य-एल1, एक्सपोसैट, चंद्रयान-1, चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और मंगलयान जैसे अभियान शामिल हैं।
गलत डेटा से बचने के लिए भी बनेगी एक जैसी व्यवस्था
इस तैयारी का दूसरा बड़ा हिस्सा अंतरिक्ष से मिलने वाले आंकड़े हैं। उपग्रह का सेंसर सही तरीके से काम करे, लेकिन उससे मिले आंकड़ों को संभालने या तैयार करने में गलती हो जाए तो वैज्ञानिक विश्लेषण प्रभावित हो सकता है। इसलिए आंकड़ों को जुटाकर और लोगों तक पहुंचाने के लिए अपनाए जाने वाले मानकों पर भी चर्चा हुई। इसरो के भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान डेटा केंद्र में अंतरिक्ष अभियानों से मिले आंकड़ों को ग्रहण करने, उनकी प्रक्रिया करने, संग्रहित करने और वैज्ञानिक समुदाय तक पहुंचाने का काम होता है। अलग-अलग अभियानों के आंकड़ों में मूल आंकड़ों के साथ सुधारे और विश्लेषित किए गए आंकड़े, अंशांकन संबंधी जानकारी और दूसरे जरूरी दस्तावेज भी रखे जाते हैं। इसरो की नई पहल के तहत अलग-अलग कंपनियां या संस्थान उपकरण बनाएं, फिर भी गुणवत्ता जांच और आंकड़े तैयार करने की प्रक्रिया में बुनियादी अंतर न रहे। इससे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में उपकरणों और वैज्ञानिक आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।