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Hindi News ›   India News ›   India Multidimensional Poverty Report 23.8 Crore People Living in Poverty

भारत में 23.8 करोड़ लोग आज भी गरीबी से जूझ रहे: बुनियादी सुविधाओं की कमी सबसे बड़ी वजह, क्या कहते हैं आंकड़े?

Fri, 16 Oct 2026 07:07 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 16 Oct 2026 07:07 AM IST
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सार
भारत में गरीबी की दर में भारी गिरावट आई है, फिर भी 23.8 करोड़ से ज्यादा लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। संयुक्त राष्ट्र और ऑक्सफोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 19% आबादी पर गरीबी के दायरे में आने का खतरा है। आखिर गरीबी की सबसे बड़ी वजह क्या है और बेरोजगारी के आंकड़े क्या तस्वीर दिखाते हैं? पढ़ें पूरी खबर 
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India Multidimensional Poverty Report 23.8 Crore People Living in Poverty
गरीबी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)

विस्तार

भारत में पिछले वर्षों के दौरान गरीबी की दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है लेकिन आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी बुनियादी सुविधाओं से दूर है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम व ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की ओर से जारी वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश के 23.8 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से जूझ रहे थे, जबकि करीब 19 प्रतिशत आबादी के इसके दायरे में आने का जोखिम बना हुआ था।

जीवन स्तर से जुड़े अभाव

सूचकांक के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में केवल आय की कमी गरीबी का मुख्य कारण नहीं है। गरीबी में सबसे बड़ा योगदान जीवन स्तर से जुड़े अभावों का है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसमें मुख्यत: स्वच्छ पेयजल, बेहतर स्वच्छता, खाना पकाने के लिए सुरक्षित ईंधन, बिजली, टिकाऊ आवास और बुनियादी संपत्तियों की कमी शामिल है।

तीन क्षेत्र के 10 पैमानों पर मापी जाती है बहुआयामी गरीबी

  1. स्वास्थ्य : पोषण, बाल मृत्युदर
  2. शिक्षा : शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति
  3. जीवन स्तर : खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति

एनएसओ सर्वे...बेरोजगारी के मोर्चे पर मामूली राहत : राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) से जारी पीरियडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) के अनुसार, इस सितंबर में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए कुल बेरोजगारी दर 5 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह आंकड़ा अगस्त के बराबर ही है यानी इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। 

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भारत की तस्वीर

गरीबी की चपेट में कितनी आबादी
  • 55.1 % -   2005-06
  • 16.4%  -   2019-21

दुनिया का हाल...अफ्रीका, द. एशिया सबसे ज्यादा प्रभावित
  • गरीबी का सबसे अधिक बोझ उप-सहारा अफ्रीका और द. एशिया पर है।
  • चीन ने उल्लेखनीय सुधार किया है (2010 के 9.5% से घटाकर 2014 में 4.2%)।
  • 120 करोड़ लोग अभी बहुआयामी गरीबी की चपेट में।
  • 5.15 करोड़ की संख्या बढ़ी पिछले साल के मुकाबले।
  • 80% से अधिक प्रभावित आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में।

ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर 4.2% रही, जो अगस्त में 4.1% थी। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 6.9% पर पहुंच गई, जो पिछले महीने 6.8% थी।
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