'मैं दिमागी नक्सल कहलाकर खुश हूं': चिदंबरम का पीएम मोदी के बयान पर पलटवार, नाराज फूफा वाले तंज पर क्या बोले?
पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिमागी नक्सल और नाराज फूफा जैसे तंज पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहलाने पर गर्व है और नाराज फूफा टिप्पणी बेमतलब है। प्रधानमंत्री ने वैचारिक नक्सली सोच के खिलाफ चेतावनी देते हुए यह शब्द इस्तेमाल किया था। दूसरी ओर, नाराज फूफा टिप्पणी सरकारी परियोजनाओं के आलोचकों पर की गई। आखिर इस सियासी जुबानी जंग का मुद्दा क्या है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बीच दिमागी नक्सल और नाराज फूफा जैसे तंज को लेकर सियासी जुबानी जंग तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम ने बुधवार को प्रधानमंत्री के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें दिमागी नक्सल कहलाने पर खुशी और गर्व है। उन्होंने नाराज फूफा टिप्पणी को भी बेमतलब बताया और कहा कि प्रधानमंत्री अक्सर नए नारे और शब्द गढ़ते हैं, जिनकी सोशल मीडिया पर चर्चा होने लगती है।
पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं खुश हूं कि मैं बेवकूफ नक्सल नहीं हूं। मैं खुश हूं कि मैं दिमागी नक्सल हूं। उन्होंने प्रधानमंत्री को स्वघोषित कवि बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री गुजराती में कविताएं लिखते हैं और इसी तरह नए शब्द और नारे गढ़ते हैं। चिदंबरम के मुताबिक, प्रधानमंत्री पहले अच्छे दिन आने वाले हैं जैसे नारे लेकर आए और पिछले 12 वर्षों में करीब 20 से 25 नारे गढ़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि दिमागी नक्सल और नाराज फूफा प्रधानमंत्री के हालिया दो नए शब्द हैं।
नाराज फूफा को चिदंबरम ने बेमतलब क्यों बताया?
- चिदंबरम ने कहा कि प्रधानमंत्री की ये टिप्पणियां सोशल मीडिया पर खासकर जेन जी के बीच चर्चा का विषय बन रही हैं। उन्होंने दावा किया कि नाराज फूफा और दिमागी नक्सल पर काफी मीम बनाए जा रहे हैं। चिदंबरम ने कहा कि जब उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें दिमागी नक्सल होने पर गर्व है, तो उनके पोस्ट को 55 लाख लाइक्स मिले।
- उन्होंने कहा कि वह नहीं जानते कि इन सभी लोगों का दावा खुद को दिमागी नक्सल बताने का है या नहीं, लेकिन इतने लोगों का पोस्ट पसंद करना बताता है कि बड़ी संख्या में लोग प्रधानमंत्री की इस भाषा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कल कोई और शब्द कह सकते हैं और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी कुछ नया कह सकते हैं, लेकिन उनके मुताबिक ये बातें बेमतलब हैं।
एसआईआर पर क्या बोले कांग्रेस नेता चिदंबरम?
- चिदंबरम ने एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर इसे खराब प्रक्रिया और खराब कवायद बताया। उन्होंने कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का नाम भी मतदाता सूची से हटाया गया और मंगलवार को प्रोफेसर सी.एन.आर. राव** का नाम हटने की बात सामने आई।
- उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति भारत में पैदा हुआ है और 18 साल की उम्र पूरी करता है, तो उसे वोट देने का अधिकार है। उसके लिए यह साबित करना जरूरी नहीं होना चाहिए कि उसका जन्म भारत में हुआ है। चिदंबरम के मुताबिक, यह साबित करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है कि कोई व्यक्ति भारत में पैदा नहीं हुआ और वह अवैध प्रवासी के रूप में देश में आया है।
- चिदंबरम ने एसआईआर के अलग-अलग चरणों में मतदाता सूची से हटाए गए नामों के आंकड़े भी बताए। उनके अनुसार, पहले चरण में 65.1 लाख, दूसरे चरण में 6.5 करोड़ और तीसरे चरण में 6.1 करोड़ नाम हटाए गए। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर करीब 13.30 करोड़ नाम हटाए गए हैं।
- उन्होंने वयस्क आबादी के मुकाबले हटाए गए नामों का अनुपात बताते हुए कहा कि पहले चरण में 7.9 प्रतिशत, दूसरे चरण में 12.6 प्रतिशत और तीसरे चरण में 17.18 प्रतिशत नाम हटाए गए। चिदंबरम ने सवाल उठाया कि क्या 13.30 करोड़ लोग बांग्लादेश या किसी दूसरे देश से अवैध प्रवासी बनकर भारत आए थे। उन्होंने इसे हंसी योग्य और फार्सिकल यानी हास्यास्पद बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने दिमागी नक्सल किसे कहा था?
चिदंबरम की यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस के लाल किले से दिए भाषण के बाद आई। प्रधानमंत्री ने लोगों और प्रशासन से ऐसे लोगों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने की अपील की थी, जिनकी सोच ‘दिमागी नक्सल’ या वैचारिक नक्सल जैसी है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि 2014 के बाद सरकार की कार्रवाई से जंगलों में चल रहा नक्सली विद्रोह काफी हद तक खत्म हो चुका है। उन्होंने दावा किया था कि इस हिंसा में 3,500 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की जान गई। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया था कि पहले ‘माओवादी मानसिकता’ वाले कुछ लोग सरकारी समितियों में पदों पर रहे और नीतियों को प्रभावित करते रहे।
प्रधानमंत्री ने वैचारिक नक्सलवाद को लेकर क्या चेतावनी दी?
- प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि सशस्त्र माओवादी हिंसा अब अपने अंतिम दौर में है, लेकिन कुछ संस्थानों में वैचारिक नक्सली सोच अभी भी मौजूद है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि ऐसी विचारधारा को देश के युवाओं पर प्रभाव डालने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
- इसके बाद चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी का जवाब देते हुए लिखा था, “मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है।” अब उन्होंने उसी टिप्पणी को लेकर विस्तार से अपनी प्रतिक्रिया दी है और प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर अपने रुख को दोहराया है।
नाराज फूफा वाला तंज किस संदर्भ में आया?
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को वडोदरा में नमो फॉर विकसित भारत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विपक्ष के आलोचकों पर नाराज फूफा का तंज कसा। वह डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी और समर्पित माल ढुलाई गलियारे के फायदे बता रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से वडोदरा तक डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन चलाई गई, जिसमें एक कंटेनर के ऊपर दूसरा कंटेनर रखा गया था। प्रधानमंत्री के अनुसार, एक यात्रा में मुंबई से वडोदरा जितना माल पहुंचा, वह 250 से ज्यादा ट्रकों के बराबर था। इसी पर उन्होंने तंज करते हुए कहा कि नाराज फूफा पूछेंगे कि ट्रक चालकों का क्या होगा और जिन्होंने ट्रक खरीदे हैं, उनका क्या होगा।
पहले भी नाराज फूफा कहकर आलोचकों पर निशाना साध चुके हैं पीएम?
प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में भी ‘नाराज फूफा’ शब्द का इस्तेमाल कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं के आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा था कि दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने पर भी ऐसे लोग पूछते थे कि इसकी जरूरत क्या है। हाई-स्पीड ट्रेन शुरू करने पर भी सवाल उठाए गए। प्रधानमंत्री ने यूपीआई का उदाहरण देते हुए कहा था कि जब इसे शुरू किया गया तो आलोचकों ने पूछा कि यूपीआई की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा था कि भारत ने ऐसे आलोचकों को जवाब दिया है और देश के लिए जरूरी काम करने से भारत को कोई नहीं रोक सकता। अब ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे शब्दों को लेकर चिदंबरम के पलटवार ने प्रधानमंत्री और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है।