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क्या भारत में बढ़ेगा निवेश?: वित्त मंत्री ने की वैश्विक कंपनियों से चर्चा, इन क्षेत्रों पर दिया जा रहा जोर

Sat, 10 Oct 2026 10:15 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 10 Oct 2026 10:15 PM IST
सार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिंगापुर में जीआईसी, टेमासेक, डीबीएस और स्टैंडर्ड चार्टर्ड सहित कई वैश्विक निवेश संस्थानों के प्रमुखों से मुलाकात की। चर्चा में भारत के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, बैंकिंग, ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और विनिर्माण में निवेश बढ़ाने पर जोर रहा। जीआईएफटी सिटी और एनआईआईएफ के जरिए निवेश के अवसरों पर भी बात हुई। ऐसे में भारत में विदेशी पूंजी लाने के लिए क्या संभावनाएं हैं और इन बैठकों से देश को क्या फायदा हो सकता है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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FM Nirmala Sitharaman Meets Global Investors in Singapore to Discuss Long-Term Investment Opportunities in Ind
निवेशकों से मिली वित्त मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को सिंगापुर में दुनिया के बड़े निवेश फंडों, बैंकों और कंपनियों के प्रमुखों से मुलाकात की। इन बैठकों में भारत में लंबे समय तक निवेश बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हुई। बुनियादी ढांचे, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य, विनिर्माण और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया। सरकार की कोशिश है कि देश की विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक निवेशकों और निजी कंपनियों की पूंजी जुटाई जाए।
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सीतारमण ने इन बैठकों में भारत की आर्थिक विकास संभावनाओं, निवेश के बदलते माहौल और देश की विकास प्राथमिकताओं के लिए लंबे समय की पूंजी जुटाने के तरीकों पर विचार साझा किए। उन्होंने सिंगापुर के सरकारी निवेश कोष जीआईसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लिम चाउ कियाट, टेमासेक होल्डिंग्स के प्रमुख दिलहान पिल्लई संड्रसेगरा और निजी निवेश कंपनी टीपीजी के कार्यकारी अध्यक्ष जिम कूल्टर से मुलाकात की। इन चर्चाओं में भारत के बुनियादी ढांचे और वित्तीय सेवाओं सहित विकास से जुड़े क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर बात हुई।
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भारत के बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने पर क्या चर्चा हुई?
सीतारमण ने जीआईसी के प्रमुख लिम चाउ कियाट के साथ भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं और संस्थागत निवेशकों की भूमिका पर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने टेमासेक के प्रमुख दिलहान पिल्लई संड्रसेगरा से मुलाकात की। इस बैठक में भारत में निवेश के अवसर बढ़ाने और राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के जरिए बुनियादी ढांचे सहित अन्य क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर बात हुई। टीपीजी के कार्यकारी अध्यक्ष और संस्थापक साझेदार जिम कूल्टर के साथ हुई बैठक में भी भारत के विकास और निजी पूंजी के निवेश पर चर्चा की गई।
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स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाओं में निवेश के क्या अवसर हैं?
वित्त मंत्री ने आईएचएच हेल्थकेयर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रेम नायर और कंपनी के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी अशोक पंडित से भी मुलाकात की। इसमें भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, अस्पतालों का बुनियादी ढांचा मजबूत करने और उनकी क्षमता बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निवेश के अवसर तलाशना था। सीतारमण ने वेलिंगटन मैनेजमेंट की एशिया में निवेश प्रमुख जेनेट पेरुमल से भी बातचीत की। इस बैठक में गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (जीआईएफटी आईएफएससी) और एनआईआईएफ के माध्यम से निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई। वेलिंगटन मैनेजमेंट ने भारत में जीएसटी से जुड़े बदलावों, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों में ढील और विनिवेश सहित नीतिगत सुधारों की सराहना की।

बैंकिंग और भारत-सिंगापुर सहयोग को लेकर क्या बातचीत हुई?
सीतारमण ने डीबीएस समूह की मुख्य कार्यकारी अधिकारी टैन सु शान, संस्थागत बैंकिंग समूह के प्रमुख हान क्वे जुआन और डीबीएस इंडिया के प्रमुख रजत वर्मा से मुलाकात की। इसमें भारत की वित्तीय व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के लिए वित्त जुटाने और आर्थिक विकास को समर्थन देने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने भारत-सिंगापुर के बीच वित्तीय संपर्क मजबूत करने के साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, सेमीकंडक्टर और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर विचार किया। गोल्ड बुलियन एक्सचेंज और जीआईएफटी सिटी के जरिए वैश्विक निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के प्रमुख बिल विंटर्स के साथ व्यापार वित्त, सीमा पार बैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन को मजबूत करने पर बात हुई। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कर और नियामकीय व्यवस्था तथा जीआईएफटी आईएफएससी में ट्रेजरी केंद्र स्थापित करने और उनका विस्तार करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।


ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और एआई में निवेश पर क्या योजना बनी?
सीतारमण ने ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लेस्ली मास्डॉर्प और एशिया के प्रबंध निदेशक एवं प्रमुख श्रीनि नागराजन से भी मुलाकात की। इस बैठक में भारत के लिए लंबे समय की पूंजी जुटाने पर जोर रहा। दोनों पक्षों ने नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों, वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे में निवेश के अवसरों पर चर्चा की। एआई के जरिए उत्पादकता बढ़ाने और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर भी विचार हुआ। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने, आपदाओं के बाद उबरने की क्षमता बढ़ाने और टिकाऊ कृषि को समर्थन देने के लिए मिश्रित वित्तपोषण की संभावनाएं भी चर्चा में शामिल रहीं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य भारत के विकास के लिए वैश्विक संस्थागत निवेशकों और निजी कंपनियों की पूंजी आकर्षित करना रहा।
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