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'डूसू चुनाव में धनबल का दिखा असर': अभिजीत दीपके ने लगाए कई आरोप, कहा- लग्जरी गाड़ियों से आते हैं प्रचारक
Mon, 21 Sep 2026 10:12 AM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, छत्रपति संभाजीनगर
पीटीआई, छत्रपति संभाजीनगर
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 21 Sep 2026 10:12 AM IST
सार
डूसू चुनाव को लेकर सीजेपी संयोजक अभिजीत दीपके ने चुनाव प्रचार में धनबल के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रचार करने वाले लोग महंगी कारों से आते हैं। दीपके ने विश्वविद्यालयों में वैचारिक प्रभाव, एमपीएसी, आदिवासी स्कूलों में सुविधाओं और आईआईटी बॉम्बे में छात्र की आत्महत्या जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।
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अभिजीत दीपके, सीजेपी संयोजक
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संयोजक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि चुनावों में धनबल का प्रभाव रहता है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी डूसू चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की हालिया जीत का जिक्र करते हुए दावा किया कि चुनाव प्रचार करने वाले लोग महंगी लग्जरी कारों से आते हैं।
एबीवीपी ने शनिवार को हुए डूसी चुनाव में केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर जीत दर्ज की। यह चुनाव सीजेपी के नेतृत्व में हुए हालिया जेन जी प्रदर्शनों के बाद आयोजित हुआ था। कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) केंद्रीय पैनल की चारों सीटों में से कोई भी नहीं जीत सकी। एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की।
डूसू चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके ने कहा, "चुनाव में पैसे का असर होता है और कुछ नहीं। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रचार करने वाले रॉल्स रॉयस से आते हैं, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये है। वे ऑडी और बीएमडब्ल्यू से आते हैं। इसलिए वहां पैसे का असर होता है।"
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क्या संस्थानों में आरएसएस-भाजपा के लोगों को मिल रहा बढ़ावा?
राहुल गांधी के उस दावे के बारे में पूछे जाने पर कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार वैचारिक जुड़ाव रखने वाले लोगों को बढ़ावा दे रही है, दीपके ने भी इसी तरह की चिंता जताई। उन्होंने कहा, "अमरावती में मैंने देखा कि कुलपति कुमुद शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से आती हैं।" कुमुद शर्मा वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति हैं, जो अमरावती के पास स्थित है।
दीपके ने दावा किया, "जब से वह कुलपति बनी हैं, 50 से अधिक छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। जब छात्र किसी मुद्दे को लेकर विरोध करते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। लेकिन जब एबीवीपी किसी चीज का विरोध करती है या किसी गेट पर ताला लगाती है तो उसके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं होती। विचारधारा का विरोध करने वाले दलित और आदिवासी छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाते हैं। यह संस्थानों यानी विश्वविद्यालयों को आरएसएस की शाखा बनाने का रोडमैप है।"
एमपीएसी परीक्षा व्यवस्था पर भी खड़े किए सवाल
सीजेपी संस्थापक ने आगे दावा किया कि छात्रों का शिक्षा व्यवस्था से भरोसा कम हो रहा है। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अभ्यर्थी कई दिनों से एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और इसके लिए आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों का परीक्षा व्यवस्था से भरोसा उठ गया है। जब तक भीमनवार इस्तीफा नहीं देते, छात्र कैसे भरोसा रखें कि परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से होंगी?"
दीपके ने कहा कि सीजेपी जल्द ही एमपीएससी अभ्यर्थियों के साथ मिलकर ऑनलाइन अभियान "भीमनवार राजीनामा द्या" शुरू करेगा। इसमें छात्र बताएंगे कि भीमनवार कौन हैं, उनकी "उपलब्धियां" क्या हैं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उनका क्या संबंध है और उनके इस्तीफे की जरूरत क्यों है?
आईआईटी बॉम्बे में छात्र की आत्महत्या को लेकर क्या बोले अभिजीत दीपके?
पिछले सप्ताह आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की आत्महत्या के मामले पर दीपके ने कहा कि केवल नकल करते पकड़े जाने के कारण इसे सही नहीं ठहराया जा सकता। अधिकारियों के अनुसार, छात्र शुक्रवार शाम अपने हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटका मिला था। इससे कुछ घंटे पहले उसे मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन और चैटजीपीटी का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था।
दीपके ने कहा, "आईआईटी बॉम्बे में आत्महत्या की घटना दुखद है। यह छात्रों के शिक्षा व्यवस्था से भरोसा खोने का नतीजा है। बच्चे पिछड़े इलाकों के साथ-साथ बड़े शहरों में भी जान दे रहे हैं। वे इसलिए आत्महत्या कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका साथ देने वाला कोई नहीं है।"
उन्होंने कहा, "अगर वह नकल करते पकड़ा गया तो आत्महत्या को सही नहीं ठहराया जा सकता। क्या हमने कभी किसी मंत्री को भ्रष्टाचार में पकड़े जाने के बाद आत्महत्या करते सुना है, या किसी ऐसे कारोबारी के बारे में सुना है जिसने बैंक को लूटा और भाग गया हो? यहां मानसिक स्वास्थ्य परामर्श ज्यादा जरूरी है। यह ऐसी गंभीर गलती नहीं थी कि आत्महत्या की जाए।"
सीजेपी संयोजक का गुजरात दौरे का एलान
सीजेपी नेता ने कहा कि "आदिवासी स्कूल ठीक करो" अभियान जारी रहेगा और इसे देशभर में विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "मैंने महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों का दौरा किया है और गुजरात भी जाऊंगा, जिसके बारे में कोई मुझसे नहीं पूछ रहा है।"
चुनाव आयोग की ओर से तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के फैसले पर दिपके ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए, विपक्षी दलों को भंग कर देना चाहिए और उनके चुनाव चिह्न भी फ्रीज कर देने चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "एक पार्टी चुनाव लड़ेगी और एक पार्टी चुनाव जीतेगी।"
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एबीवीपी ने शनिवार को हुए डूसी चुनाव में केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर जीत दर्ज की। यह चुनाव सीजेपी के नेतृत्व में हुए हालिया जेन जी प्रदर्शनों के बाद आयोजित हुआ था। कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) केंद्रीय पैनल की चारों सीटों में से कोई भी नहीं जीत सकी। एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की।
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डूसू चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके ने कहा, "चुनाव में पैसे का असर होता है और कुछ नहीं। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रचार करने वाले रॉल्स रॉयस से आते हैं, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये है। वे ऑडी और बीएमडब्ल्यू से आते हैं। इसलिए वहां पैसे का असर होता है।"
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क्या संस्थानों में आरएसएस-भाजपा के लोगों को मिल रहा बढ़ावा?
राहुल गांधी के उस दावे के बारे में पूछे जाने पर कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार वैचारिक जुड़ाव रखने वाले लोगों को बढ़ावा दे रही है, दीपके ने भी इसी तरह की चिंता जताई। उन्होंने कहा, "अमरावती में मैंने देखा कि कुलपति कुमुद शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से आती हैं।" कुमुद शर्मा वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति हैं, जो अमरावती के पास स्थित है।
दीपके ने दावा किया, "जब से वह कुलपति बनी हैं, 50 से अधिक छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। जब छात्र किसी मुद्दे को लेकर विरोध करते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। लेकिन जब एबीवीपी किसी चीज का विरोध करती है या किसी गेट पर ताला लगाती है तो उसके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं होती। विचारधारा का विरोध करने वाले दलित और आदिवासी छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाते हैं। यह संस्थानों यानी विश्वविद्यालयों को आरएसएस की शाखा बनाने का रोडमैप है।"
एमपीएसी परीक्षा व्यवस्था पर भी खड़े किए सवाल
सीजेपी संस्थापक ने आगे दावा किया कि छात्रों का शिक्षा व्यवस्था से भरोसा कम हो रहा है। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अभ्यर्थी कई दिनों से एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और इसके लिए आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों का परीक्षा व्यवस्था से भरोसा उठ गया है। जब तक भीमनवार इस्तीफा नहीं देते, छात्र कैसे भरोसा रखें कि परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से होंगी?"
दीपके ने कहा कि सीजेपी जल्द ही एमपीएससी अभ्यर्थियों के साथ मिलकर ऑनलाइन अभियान "भीमनवार राजीनामा द्या" शुरू करेगा। इसमें छात्र बताएंगे कि भीमनवार कौन हैं, उनकी "उपलब्धियां" क्या हैं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उनका क्या संबंध है और उनके इस्तीफे की जरूरत क्यों है?
आईआईटी बॉम्बे में छात्र की आत्महत्या को लेकर क्या बोले अभिजीत दीपके?
पिछले सप्ताह आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की आत्महत्या के मामले पर दीपके ने कहा कि केवल नकल करते पकड़े जाने के कारण इसे सही नहीं ठहराया जा सकता। अधिकारियों के अनुसार, छात्र शुक्रवार शाम अपने हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटका मिला था। इससे कुछ घंटे पहले उसे मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन और चैटजीपीटी का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था।
दीपके ने कहा, "आईआईटी बॉम्बे में आत्महत्या की घटना दुखद है। यह छात्रों के शिक्षा व्यवस्था से भरोसा खोने का नतीजा है। बच्चे पिछड़े इलाकों के साथ-साथ बड़े शहरों में भी जान दे रहे हैं। वे इसलिए आत्महत्या कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका साथ देने वाला कोई नहीं है।"
उन्होंने कहा, "अगर वह नकल करते पकड़ा गया तो आत्महत्या को सही नहीं ठहराया जा सकता। क्या हमने कभी किसी मंत्री को भ्रष्टाचार में पकड़े जाने के बाद आत्महत्या करते सुना है, या किसी ऐसे कारोबारी के बारे में सुना है जिसने बैंक को लूटा और भाग गया हो? यहां मानसिक स्वास्थ्य परामर्श ज्यादा जरूरी है। यह ऐसी गंभीर गलती नहीं थी कि आत्महत्या की जाए।"
सीजेपी संयोजक का गुजरात दौरे का एलान
सीजेपी नेता ने कहा कि "आदिवासी स्कूल ठीक करो" अभियान जारी रहेगा और इसे देशभर में विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "मैंने महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों का दौरा किया है और गुजरात भी जाऊंगा, जिसके बारे में कोई मुझसे नहीं पूछ रहा है।"
चुनाव आयोग की ओर से तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के फैसले पर दिपके ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए, विपक्षी दलों को भंग कर देना चाहिए और उनके चुनाव चिह्न भी फ्रीज कर देने चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "एक पार्टी चुनाव लड़ेगी और एक पार्टी चुनाव जीतेगी।"