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सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स: दिल्ली में 47 लाख वोटरों के नाम कटने का मामला, चुनाव आयोग की सफाई को अदालत में चुनौती

Wed, 04 Nov 2026 05:06 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 04 Nov 2026 05:06 PM IST
सार

दिल्ली में एसआईआर के दौरान करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग ने ऐसे लोगों को नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने की अनुमति दी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट 19 नवंबर को सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुराने मतदाताओं को फॉर्म-8 का विकल्प मिलना चाहिए। आखिर आयोग का स्पष्टीकरण सही है? क्या अदालत समयसीमा बढ़ाने का निर्देश देगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Delhi SIR: Supreme Court to Hear Plea Against EC Form 6 Clarification on November 19
सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम तारीख तय की है। अदालत 19 नवंबर को चुनाव आयोग के उस स्पष्टीकरण पर सुनवाई करेगी, जिसमें कहा गया है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम कटने वाले लोग दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भर सकते हैं। इस फैसले को लेकर याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों के नाम पहले से मतदाता सूची में थे, उन्हें नए मतदाता की तरह आवेदन करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के तीन नवंबर के स्पष्टीकरण को रिकॉर्ड पर रखने के लिए उचित आवेदन दाखिल करने को कहा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर नाम जुड़वाने की समयसीमा बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई अदालत कर रही है, इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने चुनाव आयोग के नए स्पष्टीकरण पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि तीन नवंबर को जारी आयोग का निर्देश 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर से की गई टिप्पणियों के विपरीत दिखाई देता है। पिछली सुनवाई में अदालत ने सवाल उठाया था कि जिन मतदाताओं के नाम पहले से सूची में थे और एसआईआर के दौरान काट दिए गए, उनसे नए सिरे से फॉर्म-6 क्यों भरवाया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसे लोगों को फॉर्म-8 या गणना फॉर्म के जरिए अपना नाम दोबारा जुड़वाने का मौका मिलना चाहिए। उन्हें पहली बार मतदाता बनने वाले लोगों की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए।
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चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 को लेकर क्या सफाई दी है?
चुनाव आयोग ने तीन नवंबर को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं हैं, वे अंतिम सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं। यह नियम उन लोगों पर भी लागू होगा, जिनके नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज थे और जिन्होंने पिछले चुनावों में मतदान किया था। आयोग ने कहा कि ऐसी स्थिति में फॉर्म-6 भरना अपने आप में गलत घोषणा नहीं माना जाएगा। केवल इस आधार पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई भी नहीं की जाएगी कि किसी व्यक्ति का नाम पहले मतदाता सूची में था और उसने एसआईआर के दौरान या बाद में फॉर्म-6 जमा किया है। हालांकि, इसके लिए शर्त है कि उस व्यक्ति का नाम पहले से किसी दूसरी लोकसभा या विधानसभा सीट की मतदाता सूची में दर्ज नहीं होना चाहिए। साथ ही उसकी घोषणा कानून के नियमों के मुताबिक होनी चाहिए। आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट के नीलोत्पल दत्ता बनाम चुनाव आयोग मामले में की गई टिप्पणियों का भी हवाला दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्टूबर को कहा था कि मतदान का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण है और किसी मतदाता का नाम केवल उसकी अनुपस्थिति के कारण नहीं काटा जा सकता। अदालत ने चुनाव आयोग से दिल्ली के उन 47 लाख लोगों तक पहुंचने के लिए व्यवस्था बनाने को कहा था, जिनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं। दिल्ली में एसआईआर से पहले करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे। अदालत ने आयोग से पूछा था कि पहले से मतदाता रहे लोगों को नए मतदाता की तरह फॉर्म-6 भरने की जरूरत क्यों पड़ रही है। मुख्य न्यायाधीश ने सुझाव दिया था कि जिन लोगों के नाम हटे हैं, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए और उन्हें नजदीकी बूथ स्तर अधिकारी यानी बीएलओ से संपर्क कर फॉर्म-8 भरने के लिए कहा जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि आयोग समयसीमा को लेकर सख्ती न करे और हटाए गए मतदाताओं के गणना फॉर्म स्वीकार करने का रास्ता निकाले। आयोग ने तब देर से जमा होने वाले गणना फॉर्म स्वीकार करने और जरूरत पड़ने पर 30 अक्टूबर की समयसीमा बढ़ाने पर विचार करने की बात कही थी।

मतदाता सूची से नाम कटने पर याचिकाकर्ताओं ने क्या मांग की है?
याचिका में चुनाव आयोग से मांग की गई है कि एसआईआर के दौरान जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए। साथ ही प्रत्येक नोटिस जारी करने का स्पष्ट कारण भी बताया जाए। प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया था कि दिल्ली की करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं वाली सूची में से लगभग 47 लाख नाम हटा दिए गए हैं। चुनाव आयोग ने 31 अगस्त को एसआईआर के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की थी। अब सुप्रीम कोर्ट 19 नवंबर को आयोग के तीन नवंबर के स्पष्टीकरण और याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर सुनवाई करेगा। इस दौरान यह मुद्दा अहम रहेगा कि पहले से पंजीकृत मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए कौन सा फॉर्म इस्तेमाल किया जाना चाहिए और उन्हें आवेदन के लिए कितना समय दिया जाना चाहिए। अदालत ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर समयसीमा बढ़ाने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।

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