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दिल्ली से गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन को मंजूरी: चिकन नेक से कैसे गुजरेगी, परियोजना में कितना खर्च आने की संभावना

Tue, 03 Nov 2026 10:03 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 03 Nov 2026 10:03 PM IST
सार

दिल्ली से गुवाहाटी तक प्रस्तावित बुलेट ट्रेन चिकन नेक गलियारे से गुजरेगी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के मुताबिक, इस संकरे रास्ते में ट्रेन के लिए भूमिगत सुरंग या जमीन से ऊपर एलिवेटेड ट्रैक बनाया जा सकता है। इसके लिए सामान्य से दो से तीन गुना अधिक निवेश की जरूरत पड़ सकती है। आखिर 16 से 22 किलोमीटर चौड़े इस रणनीतिक गलियारे से बुलेट ट्रेन कैसे गुजरेगी? आइए, विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं...

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Delhi-Guwahati Bullet Train Approved: How Will It Cross the Chicken’s Neck Corridor and What Will It Cost?
पूर्वोत्तर को मिलेगी बुलेट ट्रेन की सौगात - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन पहुंचाने की योजना को मंजूरी मिलने के बाद अब इसके रास्ते और तकनीक को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। यह ट्रेन पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले संवेदनशील चिकन नेक गलियारे से गुजरेगी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने मंगलवार को बताया कि इस संकरे रास्ते को पार करने के लिए भूमिगत सुरंग या जमीन से ऊपर एलिवेटेड ट्रैक बनाया जा सकता है। अभी इसका अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इसके लिए सर्वे और तकनीकी अध्ययन किया जाएगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस परियोजना पर सामान्य रेल परियोजना के मुकाबले दो से तीन गुना अधिक खर्च आ सकता है।

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बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़ी अहम बातें क्या हैं?

  • प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नई दिल्ली से गुवाहाटी तक जाएगी।
  • इसके लिए उत्तर कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है।
  • प्रस्तावित मार्ग में दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, पटना और सिलीगुड़ी शामिल हैं।
  • चिकन नेक गलियारे को पार करने के लिए भूमिगत या एलिवेटेड ट्रैक का विकल्प अपनाया जा सकता है।
  • इस हिस्से में अलग तकनीक और विशेष इंजीनियरिंग की जरूरत होगी।
  • बुलेट ट्रेन के लिए मौजूदा रेलवे ट्रैक का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए अलग रेल लाइन बनानी होगी।
  • परियोजना की लागत सामान्य स्थिति के मुकाबले दो से तीन गुना तक हो सकती है।


चिकन नेक से बुलेट ट्रेन को निकालना चुनौतीपूर्ण क्यों है?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया कि चिकन नेक गलियारा करीब 22 किलोमीटर चौड़ा है। कुछ हिस्सों में इसकी चौड़ाई केवल 16 किलोमीटर रह जाती है। यही संकरा रास्ता पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इस इलाके में पहले से राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे लाइन मौजूद हैं। ऐसे में बुलेट ट्रेन के लिए अलग ट्रैक बनाना आसान नहीं होगा। ट्रेन को मौजूदा रेलवे लाइन पर नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए पूरी तरह अलग रेल मार्ग तैयार करना होगा। जमीन की कमी और इलाके की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए विशेष इंजीनियरिंग की जरूरत पड़ेगी। इसी कारण सरकार के सामने भूमिगत और एलिवेटेड ट्रैक के विकल्प हैं। भूमिगत ट्रैक का मतलब जमीन के नीचे सुरंग बनाकर ट्रेन चलाना है। वहीं, एलिवेटेड ट्रैक जमीन से ऊपर खंभों पर बनाया जाता है। दोनों में से कौन-सा विकल्प चुना जाएगा, यह सर्वे और तकनीकी अध्ययन के बाद तय होगा।

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क्या पहले गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन पहुंचाना मुश्किल माना जा रहा था?
सरमा ने बताया कि शुरुआत में केंद्र सरकार ने संकेत दिया था कि गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन पहुंचाना संभव नहीं हो सकता। इसके बाद उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इन बैठकों के बाद गुवाहाटी को बुलेट ट्रेन नेटवर्क में शामिल करने पर सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने इसे बड़ा, उल्लेखनीय और साहसिक फैसला बताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि अभी इस परियोजना की तकनीक और रास्ते को लेकर कई जानकारियां सामने आनी बाकी हैं। वह अगली बार दिल्ली जाने पर रेल मंत्री से मुलाकात करेंगे। इस दौरान चिकन नेक से ट्रेन निकालने की तकनीक और परियोजना की दूसरी जानकारियों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने साफ किया कि लाइन को मंजूरी मिलना शुरुआती कदम है। इसके बाद सर्वे, तकनीकी योजना और अलग रेलवे लाइन तैयार करने जैसे कई काम किए जाएंगे।
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इस परियोजना पर कितना खर्च आने की संभावना है?
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकन नेक जैसे संकरे और संवेदनशील इलाके से बुलेट ट्रेन निकालने के लिए काफी पैसा खर्च करना होगा। सामान्य रेल परियोजना की तुलना में इस हिस्से पर दो से तीन गुना तक अधिक निवेश हो सकता है। इसकी वजह अलग तकनीक, सुरंग या एलिवेटेड ट्रैक का निर्माण और विशेष इंजीनियरिंग की जरूरत है। अभी परियोजना की विस्तृत लागत तय नहीं हुई है। इसके लिए पहले रास्ते का सर्वे किया जाएगा। इसके बाद यह तय होगा कि किस हिस्से में किस तरह का ट्रैक बनाया जाए। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलेट ट्रेन परियोजना के उत्तर कॉरिडोर को मंजूरी दी है। यह कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, पटना और सिलीगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक जाएगा। इस तरह गुवाहाटी को देश के प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।

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