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एक्सप्लेनर: भारत में हफ्तेभर में दूसरे चक्रवाती तूफान का जोखिम क्यों, कैसे खतरे का केंद्र बनी बंगाल की खाड़ी
Mon, 02 Nov 2026 07:56 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 02 Nov 2026 07:56 PM IST
सार
चक्रवात मुरासु को लेकर मौसम विभाग (आईएमडी) ने जारी किया रेड अलर्ट। आंध्र प्रदेश में ओंगोल के पास आधी रात को लैंडफॉल की आशंका। जानें हवा की रफ्तार, बारिश और उड़ानों के ताजा अपडेट।
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चक्रवात मुरासु।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान 'मुरासु' के 3 नवंबर को आंध्र प्रदेश से टकराने का अनुमान है। भारत के मौसम विभाग के मुताबिक, जिस गति से यह चक्रवात बढ़ रहा है, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यह 100-110 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार वाली हवाओं के साथ आंध्र के नेल्लोर और नारसपुर के बीच सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात या अल-सुबह टकराएगा। गौरतलब है कि यह एक हफ्ते के अंदर दूसरा चक्रवाती तूफान होगा, जो कि भारत के दक्षिण-पूर्वी राज्यों को प्रभावित करेगा। इससे पहले चक्रवात अर्नब ने 28 अक्तूबर को आंध्र से टकराने के बाद तटीय राज्यों- आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु को प्रभावित किया था।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर चक्रवात पैदा कैसे होते हैं? बंगाल की खाड़ी से एक हफ्ते के अंदर दो चक्रवाती तूफान की स्थिति कैसे बन गई? अर्नब के बाद अब जो चक्रवात मुरासु भारत की तरफ बढ़ रहा है, वह कितना खतरनाक है और अर्नब के मुकाबले कहां ठहरता है? इसका नाम किसने दिया? भारत में इससे निपटने के लिए क्या तैयारियां की जा रही हैं? आइये जानते हैं...
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर चक्रवात पैदा कैसे होते हैं? बंगाल की खाड़ी से एक हफ्ते के अंदर दो चक्रवाती तूफान की स्थिति कैसे बन गई? अर्नब के बाद अब जो चक्रवात मुरासु भारत की तरफ बढ़ रहा है, वह कितना खतरनाक है और अर्नब के मुकाबले कहां ठहरता है? इसका नाम किसने दिया? भारत में इससे निपटने के लिए क्या तैयारियां की जा रही हैं? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- समुद्र में कैसे पैदा होता है चक्रवाती तूफान?
समुद्र में चक्रवाती तूफान का निर्माण एक जटिल मौसमी प्रक्रिया है, जो गर्म समुद्री पानी और वायुमंडल की खास स्थितियों की वजह से शुरू होती है।
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चक्रवात मुरासु।
- फोटो : अमर उजाला
बंगाल की खाड़ी में यह शुरुआती विक्षोभ अक्सर उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) क्षेत्र में पूर्व से पश्चिम चलने वाली ईस्टरली वेव्स या प्रशांत महासागर से आने वाले तूफानों के बचे-खुचे कमजोर अंशों से तैयार होता है।
2. पृथ्वी का घूमना और हवाओं का घूमना
3. गर्म समुद्री जल और नमी बनते हैं तूफान का ईंधन
ये भी पढ़ें: चक्रवात 'मुरासु' का बढ़ा खतरा: 110 KM से चलेंगी हवाएं, समुद्र में उठेंगी ऊंची लहरें, आंध्र से ओडिशा तक अलर्ट
2. पृथ्वी का घूमना और हवाओं का घूमना
- जब समुद्र के किसी हिस्से में निम्न दबाव बनता है, तो आसपास के उच्च दबाव वाले क्षेत्रों से हवाएं उस केंद्र की ओर तेजी से बहने लगती हैं।
- पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने की वजह से ये हवाएं सीधी रेखा में न जाकर मुड़ जाती हैं और निम्न दबाव वाले केंद्र के चारों ओर गोल-गोल घूमने लगती हैं।
3. गर्म समुद्री जल और नमी बनते हैं तूफान का ईंधन
- विक्षोभ के चक्रवात बनने के लिए समुद्र के पानी का तापमान कम से कम 26.5 डिग्री सेल्सियस होना जरूरी है, और यह तापमान समुद्र में लगभग 50 मीटर की गहराई तक होना चाहिए।
- समुद्र के ऊपर की हवा गर्म होकर भारी मात्रा में नमी सोखती है और ऊपर उठती है। चक्रवात के लिए समुद्री सतह से करीब 5 किमी की ऊंचाई पर भी हवा का नम होना जरूरी है, ताकि गरज-चमक वाले बादल लगातार फैलते रहें।
ये भी पढ़ें: चक्रवात 'मुरासु' का बढ़ा खतरा: 110 KM से चलेंगी हवाएं, समुद्र में उठेंगी ऊंची लहरें, आंध्र से ओडिशा तक अलर्ट
4. संघनन और गर्मी का निकलना, चक्रवात का और ताकतवर होना
5. और खड़ा हो जाता है एक चक्रवाती तूफान
- जैसे-जैसे नम और गर्म हवा ऊपर उठती है, ऊपर जाकर यह ठंडी होती है और कन्डेंसेशन की वजह से बादलों व बारिश में तब्दील हो जाती है।
- इस संघनन की प्रक्रिया के दौरान गर्मी निकलती है, जो कम दबाव वाले क्षेत्र के केंद्र में दबाव को और ज्यादा कम कर देती है।
- दबाव और कम होने से बाहर से और ज्यादा हवाएं तेजी से केंद्र की ओर खिंचती है, जिससे यह पूरा सिस्टम एक विशाल भंवर की तरह और ताकतवर होता जाता है।
5. और खड़ा हो जाता है एक चक्रवाती तूफान
- समुद्र की सतह के पास चलने वाली हवाओं और ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली हवाओं की गति और दिशा तय करती हैं कि चक्रवात कितना ताकतवर होगा। ऊपरी और नीचे की हवाओं की रफ्तार-दिशा के इसी फर्क विंड शियर कहा जाता है।
- विकसित हुआ तूफान गरज-चमक वाले तूफानी बादलों का एक ऊंचा टावर होता है। इसमें ऊपरी और सतह की हवाएं एक दिशा-रफ्तार में होंगी तो यह मजबूत होगा। हालांकि, अगर ऊपरी हवाएं बहुत तेज या विपरीत दिशा में चलेंगी, तो चक्रवात बिखर जाता है।
- आईएमडी के मुताबिक, चक्रवात बनने के लिए विंड शियर का 36 किमी/घंटा से कम होना जरूरी है। यानी ऊपरी वायुमंडल और समुद्र की सतह पर हवाओं की रफ्तार में इससे ज्यादा फर्क होने की स्थिति पर चक्रवात टिक नहीं पाएगा।
चक्रवात मुरासु।
- फोटो : अमर उजाला
6. साधारण तूफान कब बन जाता है चक्रवाती तूफान?
जब इन सभी अनुकूल परिस्थितियों के कारण सिस्टम के केंद्र के चारों ओर हवाओं की निरंतर गति लगभग 62 किमी/घंटा तक पहुंच जाती है, तब आईएमडी इसे आधिकारिक तौर पर चक्रवाती तूफान घोषित करता है। इसके बाद अनुकूल समुद्री तापमान मिलने पर यह गंभीर या अति-गंभीर चक्रवात में तब्दील हो जाता है।
बंगाल की खाड़ी में एक ही हफ्ते के अंदर दो चक्रवाती तूफान- चक्रवात अर्नब और चक्रवात 'मुरासु' पैदा होने के पीछे कई प्रमुख वैज्ञानिक और मौसमी कारण हैं।
1. चक्रवात गुजरने के बाद भी समुद्र का गर्म बने रहना
जब इन सभी अनुकूल परिस्थितियों के कारण सिस्टम के केंद्र के चारों ओर हवाओं की निरंतर गति लगभग 62 किमी/घंटा तक पहुंच जाती है, तब आईएमडी इसे आधिकारिक तौर पर चक्रवाती तूफान घोषित करता है। इसके बाद अनुकूल समुद्री तापमान मिलने पर यह गंभीर या अति-गंभीर चक्रवात में तब्दील हो जाता है।
बंगाल की खाड़ी से एक हफ्ते के अंदर दो चक्रवाती तूफान कैसे पैदा हो गए?
बंगाल की खाड़ी में एक ही हफ्ते के अंदर दो चक्रवाती तूफान- चक्रवात अर्नब और चक्रवात 'मुरासु' पैदा होने के पीछे कई प्रमुख वैज्ञानिक और मौसमी कारण हैं।
1. चक्रवात गुजरने के बाद भी समुद्र का गर्म बने रहना
- आम तौर पर जब कोई चक्रवात समुद्र से गुजरता है, तो उसकी तेज हवाएं पानी का मंथन करती हैं और नीचे से ठंडे पानी को सतह पर ले आती हैं, जिससे समुद्र ठंडा हो जाता है और तत्काल दूसरा तूफान बनने की संभावना घट जाती है।
- हालांकि, मानसून के बाद बंगाल की खाड़ी में इस ठंडेपन का असर लगभग तीन गुना कमजोर होता है। मानसून के दौरान नदियों के बहाव और बारिश से बंगाल की खाड़ी की सतह पर कम खारे (मीठे) पानी की एक परत बन जाती है, जो नीचे के ठंडे व खारे पानी के साथ आसानी से नहीं मिलती।
- साथ ही, मानसून के बाद गर्म पानी काफी गहराई तक मौजूद है। इसलिए चक्रवात 'अर्नब' के गुजरने के बाद भी समुद्र की सतह का तापमान ठंडा नहीं हुआ और नए सिस्टम को बनने के लिए जरूरी गर्मी (ऊर्जा) तुरंत उपलब्ध रही।
चक्रवात मुरासु।
- फोटो : अमर उजाला
2. मानसून के बाद अनुकूल वायुमंडलीय स्थितियां
3. 2026 में सक्रिय 'अल नीनो' का असर
- चक्रवात बनने के लिए समुद्र का तापमान कम से कम 26.5 डिग्री सेल्सियस और लगभग 50 मीटर की गहराई तक गर्म होना चाहिए। बंगाल की खाड़ी मानसून के बाद 28 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म बनी रहती है।
- मानसून के दौरान ऊपरी और निचली हवाओं के बीच गति का अंतर काफी ज्यादा होता है, जिससे चक्रवात नहीं बन पाता। हालांकि, मानसून के लौटने (अक्तूबर–नवंबर) के बाद यह विंड शियर घटकर 36 किमी प्रतिघंटा से नीचे आ जाता है, जो लगातार तूफानी बादलों के ऊंचे चक्रवात बनने के लिए सबसे आदर्श स्थिति होती है।
3. 2026 में सक्रिय 'अल नीनो' का असर
- 2026 में अल नीनो की तीव्रता काफी ज्यादा दर्ज की गई, जिससे भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर और उत्तरी हिंद महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 से 2.8 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहा।
- भारत में अक्तूबर 2026 का औसत अधिकतम तापमान 1901 के बाद से सबसे गर्म दर्ज किया गया था। महासागरों की यह अतिरिक्त गर्मी चक्रवातों के तीव्र होने में मुख्य ईंधन का काम करती है, जिससे बैक-टू-बैक तूफानी प्रणालियां तेजी से मजबूत हुईं।
पिछले चक्रवात अर्नब के मुकाबले कहां ठहरता है मुरासु?
मौसम विभाग की तरफ से अर्नब के ट्रैकिंग डेटा और मुरासु को लेकर लगाए गए पूर्वानुमान की तुलना की जाए तो सामने आता है कि अर्नब ज्यादा शक्तिशाली चक्रवात था। यह 'अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान' के रूप में तट से टकराया था और भारी तबाही मचाकर गया था। दूसरी तरफ मुरासु के मुख्य रूप से 'प्रचंड चक्रवाती तूफान' के रूप में दस्तक देने का अनुमान है, जो कि अर्नब से कमजोर रह सकता है।ये भी पढ़ें: 'अर्नब' के बाद अब 'मुरासु' का खतरा: बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात, अलर्ट जारी; क्या है तैयारी?
चक्रवात मुरासु।
- फोटो : अमर उजाला
भारत में चक्रवात मुरासु से निपटने के लिए क्या तैयारियां?
चक्रवात 'मुरासु' के आंध्र प्रदेश तट के करीब पहुंचने और कई राज्यों में भारी बारिश व तेज हवाओं के खतरे को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा बड़े पैमाने पर आपदा प्रबंधन और सुरक्षा तैयारियां की गई हैं।एनडीआरएफ और राहत दलों की तैनाती
- तमिलनाडु के रानीपेट जिले (अराक्कोणम के पास नागरिक्कुप्पम) स्थित चौथी बटालियन से राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) की तीन टीमें तुरंत आंध्र प्रदेश के प्रभावित होने वाले क्षेत्रों के लिए रवाना की गईं।
- ओडिशा में चक्रवात अर्नब के समय से तैनात राहत दलों को मुरासु के लिए भी उसी स्थान पर बनाए रखा गया है। राज्य में एनडीआरएफ, ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ओडीआरएएफ) और अग्निशमन दल की 300 से अधिक बचाव टीमें संवेदनशील इलाकों में पहले से तैनात हैं।
आंध्र प्रदेश में प्रशासनिक तैयारियां और हेल्पलाइन
ओडिशा में निकासी और भूस्खलन पर विशेष ध्यान
- मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अपना दिल्ली दौरा रद्द कर आपदा तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को राहत व बचाव के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए। - उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने नेल्लोर, प्रकाशम, बापटला और कृष्णा जिलों में अत्यधिक सतर्कता बरतने, नहरों व जलधाराओं के पास आवाजाही रोकने और बिजली-पानी की तत्काल बहाली सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए।
- 12 जिलों में अनुमानित 15,128 बिजली के खंभों को संभावित नुकसान से बचाने और आपूर्ति जल्द बहाल करने के लिए आवश्यक उपकरण और कर्मियों को पहले ही संवेदनशील स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।
- नागरिकों की मदद के लिए 'मना मित्रा' व्हाट्सएप सेवा (9552300009) और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के टोल-फ्री नंबर (112, 1070 और 18004250101) सक्रिय किए गए हैं।
ओडिशा में निकासी और भूस्खलन पर विशेष ध्यान
- चक्रवात अर्नब के दौरान 10 भूस्खलन और मौतों के खराब अनुभव को देखते हुए, ओडिशा सरकार ने गजपति जिले में भूस्खलन के प्रति संवेदनशील 150 स्थानों की पहचान कर लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों पर पहुंचाने का आदेश दिया।
- राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री ने गंजम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जैसे दक्षिणी जिलों के कलेक्टर्स को हाई अलर्ट पर रखा है और निचले इलाकों से लोगों को निकालने का काम तेज किया गया है।
- दक्षिणी ओडिशा के चक्रवात प्रभावित इलाकों में बिजली व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए 6,400 से अधिक कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
तमिलनाडु में जलभराव प्रबंधन और स्कूलों की छुट्टी
- चेन्नई और तिरुवल्लूर जिलों में अत्यधिक भारी बारिश के 'ऑरेंज अलर्ट' को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित कर दिया।
- चेन्नई में जलभराव से निपटने के लिए संवेदनशील जगहों पर मोटर पंप और बैकअप टीमें तैनात की गईं।
- सबवे और सड़कों से पानी निकालने तथा यातायात को सुचारू रखने के लिए नगर निगम और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से निगरानी कर रहे हैं।